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आरएफसीएल रामागुंडम में यूरिया उत्पादन फिर शुरू, 9 दिन की बंदी के बाद किसानों को राहत

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आरएफसीएल रामागुंडम में यूरिया उत्पादन फिर शुरू, 9 दिन की बंदी के बाद किसानों को राहत

सारांश

9 दिन की बंदी के बाद रामागुंडम का आरएफसीएल संयंत्र फिर चालू हो गया है — लेकिन यह राहत अधूरी है। 50% क्षमता पर चल रहा यह संयंत्र इस साल दूसरी बार अमोनिया लीकेज से ठप हुआ, और 7 राज्यों के किसान खरीफ सीजन में यूरिया के लिए इसी पर निर्भर हैं।

मुख्य बातें

आरएफसीएल रामागुंडम में 19 जुलाई को यूरिया उत्पादन फिर शुरू हुआ, जो 9 जुलाई से अमोनिया लीकेज के कारण बंद था।
इस बंदी से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश सहित 7 राज्यों में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया आपूर्ति प्रभावित हुई।
संयंत्र की क्षमता 3,850 टन प्रतिदिन है, लेकिन गैस संकट के कारण यह 50% क्षमता पर चल रहा था।
यह इस वर्ष दूसरी बार है जब अमोनिया लीकेज के कारण प्लांट बंद हुआ — इससे पहले मार्च में भी एक सप्ताह की बंदी हुई थी।
सांसद गदम वामसी ने केंद्र पर आरएफसीएल की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कॉर्पोरेट कार्यालय नोएडा से रामागुंडम स्थानांतरित करने की माँग की।

रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (आरएफसीएल) ने 19 जुलाई को अमोनिया पाइपलाइन में लीकेज और तकनीकी खराबी के चलते 9 जुलाई से बंद पड़े संयंत्र में यूरिया उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है। तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले स्थित इस सार्वजनिक क्षेत्र के उर्वरक संयंत्र की बंदी से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश सहित पाँच अन्य राज्यों में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया आपूर्ति बाधित हुई थी।

मुख्य घटनाक्रम

संयंत्र अधिकारियों के अनुसार, मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद प्लांट की सभी इकाइयाँ फिर से चालू कर दी गई हैं। अधिकारियों ने कहा कि तकनीकी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। साथ ही, मौजूदा खरीफ फसल सीजन में यूरिया की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता को अधिकतम करने का प्रयास किया जा रहा है।

बंदी का कारण और पृष्ठभूमि

9 जुलाई को अमोनिया पाइपलाइन में लीकेज के कारण संयंत्र की सभी इकाइयाँ बंद करनी पड़ी थीं। समस्या तत्काल ठीक न हो पाने के कारण प्लांट को पूरी तरह शटडाउन करना पड़ा। गौरतलब है कि यह इस वर्ष दूसरी बार है जब अमोनिया लीकेज की वजह से आरएफसीएल को उत्पादन रोकना पड़ा — इससे पहले मार्च में भी संयंत्र लगभग एक सप्ताह के लिए बंद रहा था। यह ऐसे समय में आया है जब संयंत्र मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति में कमी के चलते पहले से ही अपनी 3,850 टन प्रतिदिन की क्षमता के मात्र 50 प्रतिशत पर काम कर रहा था।

आम जनता और किसानों पर असर

आरएफसीएल तेलंगाना के लिए यूरिया का एकमात्र स्रोत है। इस बंदी से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश समेत पाँच राज्यों में उर्वरक आपूर्ति ठप हो गई थी, जिससे खरीफ सीजन के बीच किसानों में चिंता बढ़ गई थी। राज्य सरकार पहले से ही केंद्र से माँग कर रही है कि आरएफसीएल से होने वाला संपूर्ण यूरिया उत्पादन तेलंगाना को आवंटित किया जाए।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

पेड्डापल्ली के सांसद गदम वामसी ने केंद्र सरकार पर आरएफसीएल की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने माँग की है कि आरएफसीएल का कॉर्पोरेट कार्यालय नोएडा (उत्तर प्रदेश) से रामागुंडम स्थानांतरित किया जाए। कांग्रेस सांसद वामसी ने कहा कि रामागुंडम मुख्य परिचालन आधार होने और अधिकांश मानव संसाधन व तकनीकी कर्मचारी वहीं तैनात होने के बावजूद, कार्यालय स्थानांतरण के प्रस्ताव को बार-बार टाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना, और विशेष रूप से रामागुंडम को उसके उचित प्रशासनिक और संस्थागत हिस्से से वंचित किया जा रहा है।

क्या होगा आगे

उत्पादन पुनः शुरू होने से किसानों को खरीफ सीजन में समय पर यूरिया मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालाँकि, संयंत्र की आधी क्षमता पर संचालन और गैस आपूर्ति की अनिश्चितता को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक आपूर्ति स्थिरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो बार-बार होने वाली बंदी केवल आपूर्ति श्रृंखला की समस्या नहीं, बल्कि कृषि संकट की पूर्व-चेतावनी है। कॉर्पोरेट कार्यालय स्थानांतरण की माँग भले ही प्रतीकात्मक लगे, लेकिन यह उस गहरी असमानता को उजागर करती है जिसमें परिचालन केंद्र और निर्णय-केंद्र के बीच की दूरी जवाबदेही को कमज़ोर करती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएफसीएल रामागुंडम में यूरिया उत्पादन क्यों बंद हुआ था?
9 जुलाई को अमोनिया पाइपलाइन में लीकेज के कारण संयंत्र की सभी इकाइयाँ बंद करनी पड़ी थीं। समस्या तत्काल ठीक न होने के कारण प्लांट को पूर्ण शटडाउन में रखा गया और 19 जुलाई को मरम्मत के बाद उत्पादन फिर शुरू हुआ।
इस बंदी से कौन-से राज्य प्रभावित हुए?
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित कुल सात राज्यों में यूरिया आपूर्ति बाधित हुई। आरएफसीएल तेलंगाना के लिए यूरिया का एकमात्र स्रोत है, इसलिए खरीफ सीजन के बीच किसानों पर इसका सीधा असर पड़ा।
क्या आरएफसीएल में पहले भी ऐसी बंदी हुई है?
हाँ, यह इस वर्ष दूसरी बार है। मार्च में भी अमोनिया लीकेज के कारण संयंत्र लगभग एक सप्ताह के लिए बंद रहा था। बार-बार होने वाली ये घटनाएँ संयंत्र के रखरखाव पर सवाल उठाती हैं।
आरएफसीएल की उत्पादन क्षमता कितनी है और अभी कितनी पर काम हो रहा है?
संयंत्र की अधिकतम क्षमता 3,850 टन यूरिया प्रतिदिन है। मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति में कमी के चलते यह कुछ समय से 50 प्रतिशत क्षमता पर ही चल रहा था।
सांसद गदम वामसी ने क्या माँग की है?
पेड्डापल्ली के कांग्रेस सांसद गदम वामसी ने केंद्र सरकार पर आरएफसीएल की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए संयंत्र का कॉर्पोरेट कार्यालय नोएडा से रामागुंडम स्थानांतरित करने की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा कि तेलंगाना को आरएफसीएल से उत्पादित संपूर्ण यूरिया आवंटित किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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