उत्तर प्रदेश: GPS ट्रैकिंग से गन्ना ढुलाई वाहनों पर 24 घंटे निगरानी, चीनी मिलों तक समय पर पहुँचेगा गन्ना
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास विभाग ने 31 अगस्त 2026 को गन्ना आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक अहम पहल की घोषणा की है। इस नई व्यवस्था के तहत गन्ना क्रय केंद्रों से लेकर चीनी मिल गेट तक गन्ना ढुलाई में लगे सभी वाहनों की जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग की जाएगी, जिससे किसानों को वजन में होने वाले नुकसान और हेराफेरी से सुरक्षा मिलेगी। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने बताया कि यह कदम गन्ना उद्योग में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है।
मुख्य घटनाक्रम
विभाग की योजना के अनुसार एक केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जहाँ से अधिकारी गन्ने से लदे वाहनों की आवाजाही पर 24 घंटे रियल-टाइम नज़र रखेंगे। इस निगरानी प्रणाली से वाहनों के रास्ते में अनावश्यक रुकावट, अनधिकृत ठहराव और किसी भी प्रकार की हेराफेरी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। विभाग इस उद्देश्य के लिए व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) लागू करने पर विचार कर रहा है।
किसानों पर सीधा असर
गन्ना आयुक्त ने बताया कि अब तक खेत से गन्ने की कटाई के बाद मिल तक पहुँचने में काफी समय लग जाता था, जिससे धूप और हवा के कारण गन्ना सूखने लगता था और किसानों को वजन में कटौती का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद गन्ने की कटाई के 24 घंटे के भीतर चीनी मिलों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे गन्ने की ताजगी और प्राकृतिक वजन बरकरार रहेगा, जो सीधे किसानों की आय से जुड़ा है।
चीनी उद्योग पर प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहाँ की चीनी मिलें प्रतिवर्ष लाखों टन गन्ने की पेराई करती हैं। गन्ना आपूर्ति में देरी और हेराफेरी की शिकायतें लंबे समय से उद्योग की बड़ी समस्या रही हैं। GPS-आधारित निगरानी से मिलों को भी नियोजित तरीके से गन्ना प्राप्त होगा, जिससे उनकी पेराई क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
क्या होगा आगे
गन्ना विकास विभाग व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम के तकनीकी पहलुओं पर अभी विचार-विमर्श कर रहा है। केंद्रीय कंट्रोल रूम की स्थापना और वाहनों में GPS उपकरण लगाने की प्रक्रिया के लिए समयसीमा की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। गौरतलब है कि यह पहल आगामी पेराई सत्र से पहले लागू करने की तैयारी है, ताकि किसानों को इसका लाभ शीघ्र मिल सके।