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वंदे मातरम विवाद: सीडब्ल्यूसी के दो पद गाने के फैसले पर वीएचपी का हमला, '1937 की मुस्लिम लीग सोच' का आरोप

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वंदे मातरम विवाद: सीडब्ल्यूसी के दो पद गाने के फैसले पर वीएचपी का हमला, '1937 की मुस्लिम लीग सोच' का आरोप

सारांश

कांग्रेस वर्किंग कमेटी के वंदे मातरम के केवल दो पद गाने के फैसले ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है — वीएचपी ने '1937 की मुस्लिम लीग सोच' का आरोप लगाया, बंकिमचंद्र के वंशज ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी और सूफी संगठन ने भी निंदा की।

मुख्य बातें

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) ने स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के केवल दो पद गाने का निर्णय लिया।
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे 1937 की 'मुस्लिम लीग की सोच' से जोड़ते हुए कड़ी आलोचना की।
बंकिमचंद्र चटर्जी के वंशज और भाजपा विधायक सौमित्र चटर्जी ने परिवार व पार्टी से विचार-विमर्श के बाद कानूनी कदम उठाने की बात कही।
इंडियन सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने सोनिया गांधी पर देश के कानून के खिलाफ काम करने का आरोप लगाते हुए निंदा की।
स्वतंत्रता सेनानी प्रवीण छाबड़ा ने वंदे मातरम को स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणाशक्ति बताते हुए इससे राजनीति को दुर्भाग्यपूर्ण कहा।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के केवल दो पद गाने के फैसले ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस निर्णय को 1937 की 'मुस्लिम लीग की सोच' से जोड़ते हुए कड़ी आलोचना की है। इस विवाद में बंकिमचंद्र चटर्जी के वंशज और भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक सौमित्र चटर्जी ने भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

वीएचपी का आरोप: '1937 दोहराया गया'

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, 'उन्होंने वही दोहराया है जो 1937 में हुआ था। मुस्लिम लीग की सोच से प्रभावित होकर और देश-विरोध की पराकाष्ठा तक ले जाकर उन्होंने वंदे मातरम को फिर से काट दिया है।' बंसल ने तर्क दिया कि शेष पदों में विद्या, वाणी, मंदिर, धर्म और दुर्गा जैसे शब्द हैं, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय विरासत के प्रतीक हैं — और इन्हीं शब्दों से कांग्रेस को 'पीड़ा' होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अब यह मामला कानूनी दायरे में आ चुका है और वंदे मातरम का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति को — चाहे वह कांग्रेसी हो या कोई और — कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।

बंकिमचंद्र के वंशज की कानूनी चेतावनी

वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी के वंशज और भाजपा विधायक सौमित्र चटर्जी ने कहा, 'कांग्रेस एक पार्टी है; वो सीडब्ल्यूसी में कुछ भी करें, लेकिन अगर भारत में रहना है तो भारतीय कानून के दायरे में काम करना होगा।' उन्होंने संकेत दिया कि वे अपने परिवार और पार्टी से विचार-विमर्श के बाद कानूनी कदम उठाने पर निर्णय लेंगे।

स्वतंत्रता सेनानी और सूफी संगठन की प्रतिक्रिया

स्वतंत्रता सेनानी प्रवीण छाबड़ा ने इस विवाद को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणाशक्ति था। उन्होंने कहा कि इस पवित्र गीत के नाम पर अनगिनत क्रांतिकारियों ने अपनी जान दी थी, और इसके साथ किसी भी प्रकार की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है।

इंडियन सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने कहा कि राजनीतिक दल वोट बैंक के लालच में ऐसे कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सोनिया गांधी ने देश के कानून के खिलाफ काम किया है तो यह गलत है, और मैं इसकी निंदा करता हूं।' वारसी ने यह भी कहा कि कानून बनने के बाद हर नागरिक का उसका पालन करना कर्तव्य है, और इसके उल्लंघन पर सरकार को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर यह विवाद नया नहीं है। 1937 में भी इस गीत के कुछ पदों को लेकर आपत्तियाँ उठाई गई थीं, और तब से यह प्रश्न समय-समय पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता रहा है। वंदे मातरम को भारत का राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है और इसके सम्मान से जुड़े कानूनी प्रावधान भी लागू हैं।

आगे क्या होगा

सौमित्र चटर्जी के परिवार और भाजपा की ओर से संभावित कानूनी कदम इस विवाद को अदालत तक ले जा सकते हैं। कांग्रेस की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला आने वाले दिनों में संसदीय और कानूनी दोनों मोर्चों पर गर्म रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे राजनीतिक विरोधियों ने बड़े मुद्दे में बदल दिया। वीएचपी का '1937 की मुस्लिम लीग' वाला तुलनात्मक तर्क ऐतिहासिक संदर्भ को सरलीकृत करता है, लेकिन यह भी सच है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ किसी भी दल का व्यवहार जनभावनाओं को गहराई से प्रभावित करता है। कांग्रेस की चुप्पी इस विवाद को और लंबा खींच सकती है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने वंदे मातरम के केवल दो पद गाने का फैसला क्यों किया?
सीडब्ल्यूसी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम के केवल दो पद गाने का निर्णय लिया। कांग्रेस की ओर से इस निर्णय का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। विरोधियों का आरोप है कि शेष पदों में हिंदू धार्मिक प्रतीकों से जुड़े शब्द होने के कारण यह निर्णय लिया गया।
वीएचपी ने इस फैसले को '1937 की मुस्लिम लीग सोच' से क्यों जोड़ा?
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि 1937 में भी वंदे मातरम के कुछ पदों पर आपत्ति जताई गई थी और उस समय मुस्लिम लीग ने इन पदों का विरोध किया था। उनके अनुसार, कांग्रेस का मौजूदा फैसला उसी ऐतिहासिक पैटर्न को दोहराता है।
सौमित्र चटर्जी कौन हैं और वे कानूनी कार्रवाई क्यों करना चाहते हैं?
सौमित्र चटर्जी वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी के वंशज और भाजपा विधायक हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार और पार्टी से विचार-विमर्श के बाद इस मामले में कानूनी कदम उठाने पर निर्णय लेंगे, क्योंकि भारत में रहने वालों को भारतीय कानून के दायरे में काम करना होगा।
इंडियन सूफी फाउंडेशन का इस विवाद पर क्या रुख है?
इंडियन सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने कहा कि राजनीतिक दल वोट बैंक के लालच में ऐसे कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सोनिया गांधी ने देश के कानून के खिलाफ काम किया है तो यह गलत है और इसकी निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से उचित कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
वंदे मातरम को लेकर कानूनी प्रावधान क्या हैं?
वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसके सम्मान से जुड़े कानूनी प्रावधान लागू हैं। विनोद बंसल ने कहा कि वंदे मातरम का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति को — चाहे वह किसी भी दल का हो — कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। हालाँकि, इस विशेष मामले में कोई एफआईआर या कानूनी कार्रवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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