14 सितंबर 2026
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विहिप ने यूसीसी पर अमित शाह की घोषणा का स्वागत किया, गैर भाजपा राज्यों से भी पहल की अपील

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विहिप ने यूसीसी पर अमित शाह की घोषणा का स्वागत किया, गैर भाजपा राज्यों से भी पहल की अपील

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह के 2029 तक सभी 21 भाजपा एनडीए राज्यों में यूसीसी लागू करने के ऐलान पर विहिप ने खुलकर समर्थन जताया है। विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे महिला और बाल अधिकारों की दिशा में 'मील का पत्थर' बताया और गैर भाजपा राज्यों से भी पहल करने की अपील की।

मुख्य बातें

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यूसीसी घोषणा का स्वागत किया।
विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक्स पर कहा कि यह फैसला महिला और बाल अधिकारों में 'मील का पत्थर' साबित होगा।
गृह मंत्री शाह ने 13 सितंबर 2026 को ऐलान किया कि 2029 से पहले सभी 21 भाजपा एनडीए राज्यों में यूसीसी लागू होगी।
अभी तक 5 राज्यों में यूसीसी लागू हो चुकी है; 3 राज्य प्रक्रिया में हैं।
विहिप ने गैर भाजपा शासित राज्यों से भी यूसीसी लागू करने की पहल करने की अपील की।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ताज़े ऐलान का खुलकर समर्थन किया है। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 14 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह फैसला देश में शेष लैंगिक असमानता और भेदभाव को खत्म कर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। साथ ही उन्होंने गैर भाजपा शासित राज्यों से भी यूसीसी लागू करने की दिशा में पहल करने की अपील की।

विहिप का स्वागत और उनका तर्क

विनोद बंसल ने एक्स पर लिखा, "5 राज्यों में लागू हो चुका है तथा तीन राज्य इस प्रक्रिया में हैं, किंतु इसी बीच 2029 तक संपूर्ण भारत के भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने संबंधी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान स्वागत योग्य है।" उन्होंने आगे जोड़ा कि यह निर्णय भारत में "शेष बची लैंगिक असमानता तथा भेदभाव को मिटाकर महिला और बाल अधिकारों के विकास में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।"

बंसल ने मोदी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि यूसीसी के ज़रिये "देश की आधी आबादी के बड़े हिस्से के वंचित वर्ग को पिछले 75 वर्षों में जो अधिकार नहीं मिल पाए थे, वे उन्हें मिल सकेंगे तथा कट्टरपंथियों और अलगाववादियों के चंगुल से महिलाओं और बच्चों को मुक्ति मिल सकेगी।"

अमित शाह की मूल घोषणा

इससे एक दिन पहले, 13 सितंबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दी जाएगी। शाह ने कहा कि इसे "चरणबद्ध तरीके" से लागू किया जाएगा और उन्हें पूरा भरोसा है कि यह प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी होगी।

उल्लेखनीय है कि अभी तक 5 राज्यों में यूसीसी लागू हो चुकी है और 3 राज्य इस प्रक्रिया में हैं। शाह के इस बयान को भाजपा की यूसीसी महत्वाकांक्षा का अब तक का सबसे ठोस और समयबद्ध रोडमैप माना जा रहा है।

गैर भाजपा राज्यों से अपील का महत्व

विहिप की ओर से गैर भाजपा शासित राज्यों को भी यूसीसी लागू करने की अपील ने इस मुद्दे को स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल यूसीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़ी संवेदनशीलताओं का हवाला देते हैं। गौरतलब है कि यूसीसी का मुद्दा दशकों से भारतीय राजनीति में एक विभाजनकारी लेकिन केंद्रीय बहस रहा है — इसे पहली बार संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निर्देशक तत्व के रूप में शामिल किया गया था।

आम जनता और महिलाओं पर संभावित असर

यूसीसी लागू होने पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने से संबंधित कानून सभी धर्मों के नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे। समर्थकों का तर्क है कि इससे मुस्लिम महिलाओं समेत अन्य वंचित वर्गों को तीन तलाक जैसी प्रथाओं के खिलाफ बेहतर कानूनी संरक्षण मिलेगा। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि इसके क्रियान्वयन में धार्मिक सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना एक बड़ी चुनौती होगी।

क्या होगा आगे

भाजपा एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने का लक्ष्य 2029 के आम चुनावों से ठीक पहले के राजनीतिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। राज्य दर राज्य क्रियान्वयन की दिशा में कानूनी और प्रशासनिक ढाँचा तैयार करने की प्रक्रिया अब तेज़ होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरी कवायद पर सर्वोच्च न्यायालय की भावी टिप्पणियाँ भी निर्णायक होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्रियान्वयन का ढाँचा क्या होगा — विशेषकर उन राज्यों में जहाँ जनजातीय और अल्पसंख्यक समुदायों के अपने पारिवारिक कानून हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि 'चरणबद्ध तरीके' की बात तो की गई है, लेकिन अभी तक कोई विस्तृत विधायी रोडमैप सार्वजनिक नहीं हुआ है — और बिना उसके, यह वादा अगले चुनाव तक एक शक्तिशाली नारा बना रह सकता है, ठोस कानून नहीं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह की यूसीसी घोषणा क्या है?
गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर 2026 को ऐलान किया कि भाजपा एनडीए द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही गई है।
विहिप ने यूसीसी का समर्थन क्यों किया?
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि यूसीसी से देश में लैंगिक असमानता और भेदभाव खत्म होगा तथा पिछले 75 वर्षों से वंचित महिलाओं और बच्चों को उनके अधिकार मिलेंगे। उन्होंने इसे महिला व बाल अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर बताया।
अभी तक कितने राज्यों में यूसीसी लागू हो चुकी है?
विनोद बंसल की एक्स पोस्ट के अनुसार, 5 राज्यों में यूसीसी लागू हो चुकी है और 3 राज्य इस प्रक्रिया में हैं। शेष भाजपा एनडीए शासित राज्यों में इसे 2029 से पहले लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
विहिप ने गैर भाजपा राज्यों से क्या अपील की?
विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक्स पर अपील की कि गैर भाजपा शासित राज्य सरकारों को भी यूसीसी लागू करने की दिशा में स्वयं पहल करनी चाहिए। उनके अनुसार यूसीसी एक राष्ट्रीय आवश्यकता है, न कि केवल किसी एक दल की नीति।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यूसीसी एक ऐसा कानूनी ढाँचा है जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों पर धर्म की परवाह किए बिना एकसमान नियम लागू करता है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निर्देशक तत्व के रूप में शामिल है और दशकों से एक प्रमुख राजनीतिक कानूनी बहस का केंद्र रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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