चीनी महंगाई पर विजयवर्गीय का विवादित बयान, कांग्रेस-माकपा ने मध्य प्रदेश सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा शक्कर की बढ़ती कीमतों पर दिए गए बयान ने भोपाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। बुधवार, 27 अगस्त को विजयवर्गीय ने कहा कि आज के दौर में 90 प्रतिशत लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते और शक्कर भले ही खूब महंगी हो जाए, लेकिन बच्चों के लिए नियंत्रित कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए। इस बयान के बाद विपक्षी दल हमलावर हो गए हैं।
मंत्री का विवादित बयान
कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर की महंगाई को लेकर कहा कि 90 प्रतिशत लोग आजकल मीठा खाना पसंद नहीं करते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शक्कर के दाम बढ़ें तो बढ़ें, किंतु बच्चों के लिए इसकी कीमत नियंत्रित रखी जानी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में खाद्य महंगाई आम जनता के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के राज्य मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि शक्कर ही नहीं, हर उपभोक्ता वस्तु महंगी हो गई है — तो क्या लोगों को खाना-पीना बंद कर देना चाहिए? उन्होंने इंदौर में नागरिकों के घरों तक गटर का पानी पहुँचने का मामला भी उठाया और विजयवर्गीय पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या लोगों को जिंदा भी रहना चाहिए या नहीं।
माकपा ने बताया सरकार का आधिकारिक रुख
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते कैलाश विजयवर्गीय सरकार के प्रवक्ता भी हैं, इसलिए इस बयान को व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की भाजपा सरकार का आधिकारिक रुख माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुख्यमंत्री या भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसी नेता ने अब तक इस बयान का खंडन नहीं किया है।
राखी त्योहार और महंगाई का संदर्भ
जसविंदर सिंह ने कहा कि राखी का त्योहार धर्म से ऊपर उठकर हर परिवार मनाता है। उनके अनुसार, शक्कर की कीमतों में उछाल से कालाबाजारियों और सटोरियों को फायदा पहुँचा और इस स्नेही त्योहार की मिठास पहले ही फीकी पड़ चुकी थी — अब मंत्री का यह बयान 'जले पर नमक छिड़कने से भी बढ़कर' है। गौरतलब है कि महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष पहले से ही राज्य सरकार को घेरता रहा है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की माँग है कि सरकार इस बयान पर स्पष्टीकरण दे और शक्कर समेत आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि BJP नेतृत्व विजयवर्गीय के बयान से दूरी बनाता है या उसका समर्थन करता है।