27 अगस्त 2026
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चीनी महंगाई पर विजयवर्गीय का विवादित बयान, कांग्रेस-माकपा ने मध्य प्रदेश सरकार को घेरा

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चीनी महंगाई पर विजयवर्गीय का विवादित बयान, कांग्रेस-माकपा ने मध्य प्रदेश सरकार को घेरा

सारांश

मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान — कि 90% लोग मीठा नहीं खाते, इसलिए शक्कर महंगी हो तो हर्ज नहीं — विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बन गया है। कांग्रेस और माकपा ने इसे सरकार की जन-विरोधी सोच का प्रमाण बताया और मुख्यमंत्री मोहन यादव की चुप्पी को सहमति करार दिया।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि 90 प्रतिशत लोग आजकल मीठा खाना पसंद नहीं करते और शक्कर महंगी होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
कांग्रेस के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने इस बयान को जन-विरोधी बताते हुए इंदौर में गटर के पानी की समस्या का भी जिक्र किया।
माकपा राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि यह बयान मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार का आधिकारिक रुख माना जाना चाहिए क्योंकि BJP ने कोई खंडन नहीं किया।
माकपा ने कहा कि शक्कर की महंगाई ने राखी त्योहार की मिठास पहले ही फीकी कर दी थी, और यह बयान जले पर नमक है।
विपक्ष ने सरकार से स्पष्टीकरण और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण की माँग की है।

मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा शक्कर की बढ़ती कीमतों पर दिए गए बयान ने भोपाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। बुधवार, 27 अगस्त को विजयवर्गीय ने कहा कि आज के दौर में 90 प्रतिशत लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते और शक्कर भले ही खूब महंगी हो जाए, लेकिन बच्चों के लिए नियंत्रित कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए। इस बयान के बाद विपक्षी दल हमलावर हो गए हैं।

मंत्री का विवादित बयान

कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर की महंगाई को लेकर कहा कि 90 प्रतिशत लोग आजकल मीठा खाना पसंद नहीं करते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शक्कर के दाम बढ़ें तो बढ़ें, किंतु बच्चों के लिए इसकी कीमत नियंत्रित रखी जानी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में खाद्य महंगाई आम जनता के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।

कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस के राज्य मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि शक्कर ही नहीं, हर उपभोक्ता वस्तु महंगी हो गई है — तो क्या लोगों को खाना-पीना बंद कर देना चाहिए? उन्होंने इंदौर में नागरिकों के घरों तक गटर का पानी पहुँचने का मामला भी उठाया और विजयवर्गीय पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या लोगों को जिंदा भी रहना चाहिए या नहीं।

माकपा ने बताया सरकार का आधिकारिक रुख

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते कैलाश विजयवर्गीय सरकार के प्रवक्ता भी हैं, इसलिए इस बयान को व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की भाजपा सरकार का आधिकारिक रुख माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुख्यमंत्री या भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसी नेता ने अब तक इस बयान का खंडन नहीं किया है।

राखी त्योहार और महंगाई का संदर्भ

जसविंदर सिंह ने कहा कि राखी का त्योहार धर्म से ऊपर उठकर हर परिवार मनाता है। उनके अनुसार, शक्कर की कीमतों में उछाल से कालाबाजारियों और सटोरियों को फायदा पहुँचा और इस स्नेही त्योहार की मिठास पहले ही फीकी पड़ चुकी थी — अब मंत्री का यह बयान 'जले पर नमक छिड़कने से भी बढ़कर' है। गौरतलब है कि महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष पहले से ही राज्य सरकार को घेरता रहा है।

आगे क्या होगा

विपक्ष की माँग है कि सरकार इस बयान पर स्पष्टीकरण दे और शक्कर समेत आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि BJP नेतृत्व विजयवर्गीय के बयान से दूरी बनाता है या उसका समर्थन करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से पूरी तरह सटीक नहीं है, लेकिन राजनीतिक रूप से प्रभावी है — खासकर तब जब मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई खंडन नहीं आया। असली सवाल यह है कि खाद्य महंगाई पर राज्य सरकार की नीति क्या है — और यह बयान उस सवाल का जवाब देने की बजाय उसे और उलझा देता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर की महंगाई पर क्या कहा था?
विजयवर्गीय ने बुधवार को कहा कि आज के दौर में 90 प्रतिशत लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते, इसलिए शक्कर महंगी हो तो भी कोई बड़ी बात नहीं — हालाँकि बच्चों के लिए नियंत्रित कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए। इस बयान को विपक्ष ने जन-विरोधी सोच का प्रमाण बताया है।
कांग्रेस ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस के राज्य मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि सिर्फ शक्कर नहीं, हर उपभोक्ता वस्तु महंगी हो गई है और इंदौर में लोगों के घरों तक गटर का पानी पहुँच रहा है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या लोगों को जिंदा भी रहना चाहिए या नहीं।
माकपा ने इस बयान को सरकार का आधिकारिक रुख क्यों बताया?
माकपा राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने तर्क दिया कि विजयवर्गीय संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते सरकार के प्रवक्ता भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री या BJP के किसी नेता ने इस बयान का खंडन नहीं किया, जिससे यह सरकार की सहमति जैसा प्रतीत होता है।
राखी त्योहार का इस विवाद से क्या संबंध है?
माकपा ने कहा कि शक्कर की बढ़ती कीमतों ने राखी के त्योहार की मिठास पहले ही फीकी कर दी थी और कालाबाजारियों व सटोरियों को फायदा पहुँचाया। मंत्री का यह बयान त्योहार के मौसम में आम जनता की पीड़ा पर 'जले पर नमक छिड़कने से भी बढ़कर' है।
इस विवाद में आगे क्या होने की संभावना है?
विपक्ष ने सरकार से इस बयान पर स्पष्टीकरण और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण की माँग की है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि BJP नेतृत्व विजयवर्गीय के बयान से दूरी बनाता है या उसका बचाव करता है।
राष्ट्र प्रेस
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