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मदुरै में 4,000 एकड़ गन्ने की फसल पर जलसंकट, किसानों ने मदुरै कलेक्ट्रेट तक वॉकथॉन का ऐलान किया

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मदुरै में 4,000 एकड़ गन्ने की फसल पर जलसंकट, किसानों ने मदुरै कलेक्ट्रेट तक वॉकथॉन का ऐलान किया

सारांश

मदुरै के मेलूर और वाडीपट्टी में भूमिगत जलस्तर गिरने से 4,000 एकड़ गन्ने की फसल सूखने की कगार पर है। ऊपर से आठ साल से बंद पड़ी अलंगनल्लूर सहकारी चीनी मिल किसानों की तकलीफ दोगुनी कर रही है। अब किसान कलेक्ट्रेट तक वॉकथॉन कर सरकार को जगाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य बातें

मदुरै जिले के मेलूर और वाडीपट्टी क्षेत्र में सिंचाई की कमी से लगभग 4,000 एकड़ गन्ने की फसल संकट में है।
प्रभावित भूमि में 1,500 एकड़ पर हरा गन्ना और शेष पर बैंगनी गन्ने की खेती होती है।
सिंचाई कुएं सूखने के बाद किसान पूरी तरह बोरवेल पर निर्भर हैं; भूमिगत जलस्तर तेज़ी से गिर रहा है।
अलंगनल्लूर नेशनल कोऑपरेटिव शुगर मिल पिछले आठ वर्षों से बंद है, जिससे किसानों के पास फसल बेचने का कोई भरोसेमंद माध्यम नहीं।
किसान संगठनों ने सितंबर के पहले सप्ताह में अलंगनल्लूर से मदुरै कलेक्ट्रेट तक वॉकथॉन का ऐलान किया है।

तमिलनाडु के मदुरै जिले के मेलूर, वाडीपट्टी और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई जल की गंभीर कमी के कारण लगभग 4,000 एकड़ गन्ने की खड़ी फसल संकट में है। किसानों के अनुसार, यदि अगले तीन हफ्तों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो फसल को व्यापक नुकसान अवश्यंभावी है। यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब क्षेत्र की एकमात्र सहकारी चीनी मिल आठ वर्षों से बंद पड़ी है।

फसल की स्थिति और जल-स्तर में गिरावट

प्रभावित क्षेत्र में कुल खेती योग्य भूमि में से लगभग 1,500 एकड़ पर हरे गन्ने की खेती होती है, जबकि शेष भूमि पर बैंगनी गन्ने उगाए जाते हैं। किसानों का कहना है कि भूमिगत जलस्तर तेज़ी से नीचे जाने के कारण सिंचाई कुएं सूख गए हैं और अब उन्हें खड़ी फसलें बचाने के लिए पूरी तरह बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

कई किसानों के पास सिंचाई के लिए केवल एक या दो बोरवेल हैं, जो इस असाधारण जलसंकट में पर्याप्त नहीं हैं। बैंगनी गन्ने की खेती करने वाले किसान विशेष रूप से प्रभावित हैं, क्योंकि इस किस्म को अधिक नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। नए लगाए गए गन्ने की वृद्धि पहले ही उल्लेखनीय रूप से धीमी हो गई है।

गन्ने की खेती पर दीर्घकालिक असर

गन्ने की फसल को, विशेष रूप से प्रारंभिक अवस्था में, नियमित सिंचाई की अनिवार्य आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक जलाभाव की स्थिति में न केवल पैदावार घटती है, बल्कि गन्ने की गुणवत्ता — विशेषकर उसकी मिठास और रस की मात्रा — पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसानों के अनुसार, बार-बार की सिंचाई समस्याओं के कारण अलंगनल्लूर और आसपास के क्षेत्रों में गन्ने की खेती का रकबा पहले ही काफी सिकुड़ चुका है।

अलंगनल्लूर चीनी मिल बंद होने का संकट

सिंचाई समस्या के साथ-साथ किसान अलंगनल्लूर नेशनल कोऑपरेटिव शुगर मिल के दीर्घकालिक बंद होने से भी आहत हैं। यह मिल कभी जिले के गन्ना किसानों के लिए फसल खरीद और विपणन का एक विश्वसनीय केंद्र थी। किसान संगठनों का आरोप है कि पिछले आठ वर्षों में कई बार विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

किसान संगठनों ने एक प्रस्ताव पारित कर सहकारी मिल को तत्काल पुनः चालू करने की माँग की है। उन्होंने सरकार से मिल को फिर से शुरू करने हेतु आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने और जलसंकट से जूझ रहे गन्ना किसानों को राहत देने की अपील की है।

किसानों का विरोध प्रदर्शन

अपनी माँगों को लेकर किसानों ने सितंबर के पहले सप्ताह में अलंगनल्लूर से मदुरै जिला कलेक्ट्रेट तक एक वॉकथॉन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस पदयात्रा के माध्यम से किसान राज्य सरकार पर सिंचाई समस्या के समाधान और सहकारी चीनी मिल को पुनः चालू करने के लिए दबाव बनाएँगे। यह कदम क्षेत्र के गन्ना किसानों की बढ़ती बेचैनी और सरकारी उदासीनता के प्रति उनके आक्रोश को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नीति-निर्माता बार-बार नज़रअंदाज़ करते आए हैं। आठ साल में कई विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद अलंगनल्लूर सहकारी मिल का बंद रहना यह बताता है कि सरकारी तंत्र किसानों की माँगों को गंभीरता से नहीं ले रहा। जब सिंचाई का बुनियादी ढाँचा चरमराए और फसल की बिक्री का एकमात्र सहारा भी बंद हो, तो किसान का बोरवेल पर निर्भर रहना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि संकट को और गहरा करना है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मदुरै में गन्ने की फसल पर संकट क्यों आया है?
मदुरै जिले के मेलूर और वाडीपट्टी क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर तेज़ी से गिरने के कारण सिंचाई कुएं सूख गए हैं, जिससे लगभग 4,000 एकड़ गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। किसानों के अनुसार, अगले तीन हफ्तों में बारिश न हुई तो फसल बड़े पैमाने पर नष्ट हो सकती है।
अलंगनल्लूर सहकारी चीनी मिल कब से बंद है और इसका क्या असर है?
अलंगनल्लूर नेशनल कोऑपरेटिव शुगर मिल पिछले आठ वर्षों से बंद है। यह मिल क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए फसल खरीद और विपणन का प्रमुख केंद्र थी; इसके बंद होने से किसानों के पास उचित मूल्य पर फसल बेचने का कोई विश्वसनीय विकल्प नहीं रहा।
किसान अपनी माँगों के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
किसान संगठनों ने सितंबर के पहले सप्ताह में अलंगनल्लूर से मदुरै जिला कलेक्ट्रेट तक वॉकथॉन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस पदयात्रा के ज़रिए वे सरकार पर सिंचाई समस्या के समाधान और सहकारी मिल को पुनः चालू करने का दबाव बनाएँगे।
इस जलसंकट से किस किस्म की गन्ने की फसल सबसे ज़्यादा प्रभावित है?
प्रभावित 4,000 एकड़ में से 1,500 एकड़ पर हरा गन्ना और शेष पर बैंगनी गन्ने की खेती होती है। बैंगनी गन्ने के किसान विशेष रूप से प्रभावित हैं, क्योंकि सिंचाई कुएं सूखने के बाद उनके पास फसल बचाने के सीमित विकल्प हैं।
गन्ने की फसल को सिंचाई की कमी से क्या नुकसान होता है?
गन्ने को, विशेष रूप से प्रारंभिक अवस्था में, नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक जलाभाव की स्थिति में पैदावार घटती है और गन्ने की गुणवत्ता — रस की मात्रा और मिठास — पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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