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बीरभूम के 5 बागी TMC विधायकों को अतिरिक्त सुरक्षा, ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन के बाद बड़ा फैसला

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बीरभूम के 5 बागी TMC विधायकों को अतिरिक्त सुरक्षा, ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन के बाद बड़ा फैसला

सारांश

पश्चिम बंगाल में तृणमूल की आंतरिक दरार अब सुरक्षा-इंतज़ाम तक पहुँच गई है — बीरभूम के 5 बागी विधायकों को दो-दो अतिरिक्त सशस्त्र गार्ड मिले। ऋतब्रत बनर्जी गुट की यह बगावत अब दिल्ली तक फैलने के संकेत दे रही है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने बीरभूम जिले के 5 बागी TMC विधायकों को प्रत्येक को 2 अतिरिक्त सशस्त्र गार्ड दिए।
सुरक्षा पाने वाले विधायक: फैजुल हक (काजल शेख) , राजेंद्र प्रसाद सिंह , मोशर्रफ हुसैन , चंद्रनाथ सिन्हा और बिधान चंद्र माझी ।
इन सभी ने पार्टी निर्देश के विरुद्ध ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन दिया।
सूत्रों के अनुसार, TMC के लगभग दो-तिहाई लोकसभा सदस्य शीर्ष नेतृत्व से नाराज़ हैं।
सांसद काकली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सांसद कल्याण बनर्जी पर उत्पीड़न के आरोप लगाए।

पश्चिम बंगाल सरकार ने बीरभूम जिले के उन पाँच तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायकों की सुरक्षा बढ़ा दी है, जिन्होंने राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार, 7 जून को यह जानकारी दी। पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करने वाले इन विधायकों को अब प्रत्येक को दो अतिरिक्त सशस्त्र सुरक्षा गार्ड मुहैया कराए गए हैं।

किन विधायकों की सुरक्षा बढ़ाई गई

सुरक्षा बढ़ाए गए विधायकों में बीरभूम जिला परिषद के अध्यक्ष एवं हंसन विधायक फैजुल हक (काजल शेख), नलहाटी विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह, मुरारई से विधायक मोशर्रफ हुसैन, पूर्व मंत्री एवं बोलपुर विधायक चंद्रनाथ सिन्हा और नानूर विधायक बिधान चंद्र माझी शामिल हैं।

बगावत की पृष्ठभूमि

सूत्रों के अनुसार, इन पाँचों विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक निर्देशों को नकारते हुए नए विपक्षी नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी का खुलकर समर्थन किया। यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस की विधायक दल में आंतरिक दरारें लगातार गहरी होती जा रही हैं। पार्टी के एक वर्ग का कहना है कि प्रशासन का यह कदम कथित तौर पर आंदोलनकारी खेमे को मज़बूती देने की सोची-समझी रणनीति है।

दिल्ली तक पहुँच सकती है बगावत

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह बगावत जल्द ही संसदीय स्तर पर भी असर दिखा सकती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, तृणमूल के लगभग दो-तिहाई लोकसभा सदस्य शीर्ष नेतृत्व से नाराज़ बताए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में जो 'अच्छा तृणमूल' गुट उभरा है, उसकी प्रतिध्वनि नई दिल्ली में भी सुनाई दे सकती है।

काकली घोष दस्तीदार का मामला

वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तीदार के भी इसी राह पर चलने की अटकलें हैं। हाल ही में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी पर अपमानजनक व्यवहार और महिला-विरोधी आचरण के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा परिसर के भीतर उन्हें बार-बार परेशान किया।

आगे क्या हो सकता है

यदि संसदीय दल में भी यही विद्रोह फैलता है, तो तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर संगठनात्मक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, राज्य सरकार का सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय इस पूरे प्रकरण को और जटिल बना रहा है, जिसे लेकर सभी की निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें राज्य संसाधनों से सुरक्षा देना किसके हित में है। अगर यह बगावत संसदीय दल तक पहुँचती है, तो तृणमूल के लिए यह महज़ एक ज़िले की समस्या नहीं रहेगी — यह राष्ट्रीय राजनीति में उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाएगी। काकली घोष दस्तीदार का लोकसभा अध्यक्ष को पत्र इस बात का संकेत है कि असंतोष अब बंद कमरों से बाहर आ चुका है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीरभूम के किन TMC विधायकों की सुरक्षा बढ़ाई गई है?
फैजुल हक (काजल शेख), राजेंद्र प्रसाद सिंह, मोशर्रफ हुसैन, चंद्रनाथ सिन्हा और बिधान चंद्र माझी — इन पाँचों को दो-दो अतिरिक्त सशस्त्र गार्ड दिए गए हैं। इन सभी ने पार्टी निर्देश की अनदेखी कर ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया था।
ऋतब्रत बनर्जी को TMC विधायकों का समर्थन क्यों मिला?
ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में बीरभूम के पाँच विधायकों ने समर्थन दिया, जो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों से असहमत थे। यह TMC के भीतर बढ़ते असंतोष का हिस्सा माना जा रहा है।
क्या यह बगावत संसद तक पहुँच सकती है?
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, TMC के लगभग दो-तिहाई लोकसभा सदस्य शीर्ष नेतृत्व से नाराज़ हैं। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि विधानसभा स्तर पर शुरू हुई यह बगावत जल्द ही संसदीय दल तक भी पहुँच सकती है।
काकली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र क्यों लिखा?
वरिष्ठ TMC सांसद काकली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी पर अपमानजनक व्यवहार और महिला-विरोधी आचरण के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा परिसर के भीतर उन्हें बार-बार परेशान किया।
पश्चिम बंगाल सरकार ने बागी विधायकों को सुरक्षा क्यों दी?
अधिकारियों के अनुसार, पार्टी निर्देशों की अनदेखी के बाद इन विधायकों की सुरक्षा को लेकर आशंका जताई गई थी, जिसके मद्देनज़र यह कदम उठाया गया। हालाँकि पार्टी के एक वर्ग का कहना है कि यह प्रशासनिक निर्णय बागी खेमे को मज़बूती देने की रणनीति हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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