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पश्चिम बंगाल शराब नीति विवाद: BJP सांसदों और कारोबारियों ने राजारहाट में लगाए अनियमितता के आरोप

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पश्चिम बंगाल शराब नीति विवाद: BJP सांसदों और कारोबारियों ने राजारहाट में लगाए अनियमितता के आरोप

सारांश

पश्चिम बंगाल के राजारहाट में एक कार्यक्रम ने राज्य की शराब नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया — कारोबारी 2-3% मार्जिन से परेशान हैं, BJP सांसद नकली शराब की जाँच माँग रहे हैं, और कोविड-कालीन शुल्क अब भी जारी हैं। राज्य सरकार की चुप्पी सवालों को और गहरा बना रही है।

मुख्य बातें

राजारहाट में 7 जून को आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की आबकारी नीति पर गंभीर आरोप लगाए गए।
शराब कारोबारी संगठन के सचिव बिजन पात्रा ने कहा कि दुकानदारों को MRP पर केवल 2-3% मार्जिन मिलता है; उन्होंने 10% मार्जिन की माँग रखी।
BJP सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने आरोप लगाया कि राज्य में हर महीने लाखों बोतलों में मिलावटी शराब बिकती है; निष्पक्ष जाँच की माँग की।
कोविड काल के दौरान लगाए गए 'स्पेशल पर्पज फीस' अभी भी जारी हैं, जिससे छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
पात्रा ने प्रोत्साहन राशि में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पश्चिम बंगाल के राजारहाट में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य की आबकारी नीति को लेकर तीखा विवाद उभरा, जब शराब कारोबारी संगठन के सचिव बिजन पात्रा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो तथा सौमित्र खान ने राज्य सरकार की शराब व्यवस्था पर एक साथ सवाल उठाए। 7 जून को हुए इस कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं, कम मुनाफे, अतिरिक्त शुल्क और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए।

कारोबारियों की शिकायत: मार्जिन सिर्फ 2-3 प्रतिशत

शराब कारोबारी संगठन के सचिव बिजन पात्रा ने कहा कि राज्य में शराब विक्रेताओं को मिलने वाला मुनाफा बेहद कम है। उनके अनुसार, दुकानदारों को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर केवल 2 से 3 प्रतिशत का मार्जिन मिलता है, और विभिन्न शुल्कों व कटौतियों के बाद यह और भी घट जाता है। पात्रा ने माँग की कि MRP पर कम-से-कम 10 प्रतिशत मार्जिन सुनिश्चित किया जाए, ताकि छोटे दुकानदार अपना कारोबार व्यवहार्य रूप से चला सकें।

पात्रा ने यह भी कहा कि कई मामलों में दुकान का वास्तविक मालिक स्वयं व्यवसाय नहीं चला पाता और अन्य लोग उसका लाभ उठाते हैं। उन्होंने सरकार से छोटे व्यवसायियों के हित में लाभांश बढ़ाने की अपील की।

पारदर्शिता पर सवाल और 'स्पेशल पर्पज फीस' का बोझ

पात्रा ने आरोप लगाया कि शराब कारोबार में विभिन्न प्रोत्साहन राशियों (इंसेंटिव) को लेकर पारदर्शिता की कमी है। उनके अनुसार, कारोबारियों को बताया जाता है कि मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 'कहीं और चली जाती है।' हालाँकि, उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उनके पास इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।

कार्यक्रम में 'स्पेशल पर्पज फीस' को लेकर भी चिंता जताई गई। पात्रा ने कहा कि कोविड काल के दौरान लगाए गए कुछ शुल्क आज भी जारी हैं, जिससे दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बना हुआ है। यह ऐसे समय में उठाई गई माँग है जब देश के कई राज्यों में आबकारी नीतियों की समीक्षा चल रही है।

BJP सांसद का नकली शराब पर बड़ा आरोप

BJP सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने आरोप लगाया कि राज्य के कई जिलों में नकली शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि हर महीने लाखों बोतलों में मिलावट कर बाजार में बेची जाती है। महतो ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए कहा कि यदि जाँच हुई तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। गौरतलब है कि ये आरोप अभी तक अप्रमाणित हैं और राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मदरसा निरीक्षण पर भी उठी आवाज़

कार्यक्रम के दौरान महतो ने राज्य में मदरसों के निरीक्षण अभियान पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन सभी शिक्षण संस्थानों को करना चाहिए और किसी भी संस्था को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार ही कार्य करना होगा।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कारोबारी संगठन की माँगें और BJP सांसदों के आरोप राज्य की आबकारी नीति पर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन सवालों का जवाब किस रूप में देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पात्रा ने खुद माना कि उनके पास प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। नकली शराब के 'लाखों बोतलों' के दावे गंभीर हैं, लेकिन बिना जाँच-आधारित आँकड़ों के ये राजनीतिक आरोप ही रहेंगे। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार इन माँगों को संज्ञान में लेकर आबकारी ढाँचे की समीक्षा करेगी, या यह विवाद भी विपक्षी प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल शराब नीति विवाद क्या है?
7 जून को राजारहाट में एक कार्यक्रम के दौरान शराब कारोबारियों और BJP सांसदों ने राज्य की आबकारी नीति पर सवाल उठाए। आरोपों में कम मार्जिन, पारदर्शिता की कमी, कोविड-कालीन अतिरिक्त शुल्क और नकली शराब का कारोबार शामिल हैं।
शराब दुकानदारों को कितना मार्जिन मिलता है और उनकी माँग क्या है?
कारोबारी संगठन के सचिव बिजन पात्रा के अनुसार, दुकानदारों को MRP पर केवल 2 से 3 प्रतिशत का मार्जिन मिलता है। उन्होंने माँग की है कि यह मार्जिन बढ़ाकर कम-से-कम 10 प्रतिशत किया जाए।
BJP सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने क्या आरोप लगाए?
महतो ने दावा किया कि राज्य के कई जिलों में हर महीने लाखों बोतलों में मिलावटी शराब बाजार में बेची जाती है। उन्होंने निष्पक्ष जाँच की माँग की और कहा कि जाँच होने पर बड़े नाम सामने आ सकते हैं। ये आरोप अभी तक अप्रमाणित हैं।
'स्पेशल पर्पज फीस' क्या है और इसे क्यों हटाने की माँग हो रही है?
यह कोविड काल के दौरान शराब दुकानदारों पर लगाया गया एक अतिरिक्त शुल्क है। पात्रा के अनुसार, यह शुल्क अब भी जारी है और सीधे दुकानदारों के मुनाफे को प्रभावित कर रहा है, इसलिए इसे हटाने की माँग की जा रही है।
राज्य सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
अब तक पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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