पश्चिम बंगाल शराब नीति विवाद: BJP सांसदों और कारोबारियों ने राजारहाट में लगाए अनियमितता के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के राजारहाट में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य की आबकारी नीति को लेकर तीखा विवाद उभरा, जब शराब कारोबारी संगठन के सचिव बिजन पात्रा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो तथा सौमित्र खान ने राज्य सरकार की शराब व्यवस्था पर एक साथ सवाल उठाए। 7 जून को हुए इस कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं, कम मुनाफे, अतिरिक्त शुल्क और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए।
कारोबारियों की शिकायत: मार्जिन सिर्फ 2-3 प्रतिशत
शराब कारोबारी संगठन के सचिव बिजन पात्रा ने कहा कि राज्य में शराब विक्रेताओं को मिलने वाला मुनाफा बेहद कम है। उनके अनुसार, दुकानदारों को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर केवल 2 से 3 प्रतिशत का मार्जिन मिलता है, और विभिन्न शुल्कों व कटौतियों के बाद यह और भी घट जाता है। पात्रा ने माँग की कि MRP पर कम-से-कम 10 प्रतिशत मार्जिन सुनिश्चित किया जाए, ताकि छोटे दुकानदार अपना कारोबार व्यवहार्य रूप से चला सकें।
पात्रा ने यह भी कहा कि कई मामलों में दुकान का वास्तविक मालिक स्वयं व्यवसाय नहीं चला पाता और अन्य लोग उसका लाभ उठाते हैं। उन्होंने सरकार से छोटे व्यवसायियों के हित में लाभांश बढ़ाने की अपील की।
पारदर्शिता पर सवाल और 'स्पेशल पर्पज फीस' का बोझ
पात्रा ने आरोप लगाया कि शराब कारोबार में विभिन्न प्रोत्साहन राशियों (इंसेंटिव) को लेकर पारदर्शिता की कमी है। उनके अनुसार, कारोबारियों को बताया जाता है कि मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 'कहीं और चली जाती है।' हालाँकि, उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उनके पास इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है।
कार्यक्रम में 'स्पेशल पर्पज फीस' को लेकर भी चिंता जताई गई। पात्रा ने कहा कि कोविड काल के दौरान लगाए गए कुछ शुल्क आज भी जारी हैं, जिससे दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बना हुआ है। यह ऐसे समय में उठाई गई माँग है जब देश के कई राज्यों में आबकारी नीतियों की समीक्षा चल रही है।
BJP सांसद का नकली शराब पर बड़ा आरोप
BJP सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने आरोप लगाया कि राज्य के कई जिलों में नकली शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि हर महीने लाखों बोतलों में मिलावट कर बाजार में बेची जाती है। महतो ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए कहा कि यदि जाँच हुई तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। गौरतलब है कि ये आरोप अभी तक अप्रमाणित हैं और राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मदरसा निरीक्षण पर भी उठी आवाज़
कार्यक्रम के दौरान महतो ने राज्य में मदरसों के निरीक्षण अभियान पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन सभी शिक्षण संस्थानों को करना चाहिए और किसी भी संस्था को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार ही कार्य करना होगा।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कारोबारी संगठन की माँगें और BJP सांसदों के आरोप राज्य की आबकारी नीति पर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन सवालों का जवाब किस रूप में देती है।