15 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भूपेंद्र यादव का WCEF 2026 में आह्वान: 'पहले मरम्मत, फिर बदलाव' — सर्कुलर इकोनॉमी रीसाइक्लिंग प्लांट से नहीं, बाजार से शुरू होगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भूपेंद्र यादव का WCEF 2026 में आह्वान: 'पहले मरम्मत, फिर बदलाव' — सर्कुलर इकोनॉमी रीसाइक्लिंग प्लांट से नहीं, बाजार से शुरू होगी

सारांश

गांधीनगर में WCEF 2026 मंच से पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने साफ कहा — सर्कुलर इकोनॉमी रीसाइक्लिंग प्लांट से नहीं बनती, यह बाजार, घर और आदत से बनती है। EPR के तहत 83,000 से अधिक प्रोड्यूसर और 482 लाख मीट्रिक टन वेस्ट प्रोसेसिंग के साथ भारत इस दिशा में एक वैश्विक उदाहरण बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 सितंबर 2026 को गांधीनगर में WCEF 2026 को संबोधित किया।
उन्होंने 'बदलने से पहले मरम्मत, फेंकने से पहले दोबारा इस्तेमाल' के सिद्धांत को भारत की सर्कुलर इकोनॉमी नीति का आधार बताया।
अगस्त 2026 तक EPR फ्रेमवर्क के तहत 83,000 से अधिक प्रोड्यूसर और 4,802 रीसाइक्लर पंजीकृत; लगभग 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण।
सर्कुलरिटी को LiFE (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) पहल से जोड़ा गया।
भारत ने G20 प्रेसिडेंसी और BRICS चेयरमैनशिप के दौरान सर्कुलर इकोनॉमी को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर रखा।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 सितंबर 2026 को गांधीनगर में आयोजित वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में सर्कुलर इकोनॉमी की असली शुरुआत रीसाइक्लिंग संयंत्रों से नहीं, बल्कि उत्पादों के डिजाइन, खरीद और उपभोग के तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने 'बदलने से पहले मरम्मत, फेंकने से पहले दोबारा इस्तेमाल' के सिद्धांत को भारत की नीति-दिशा का मूल बताया। उनका यह संबोधन वैश्विक पर्यावरण नीति के संदर्भ में भारत की स्थिति को रेखांकित करने वाला रहा।

मुख्य संदेश: चक्रीयता एक आदत है, नियम नहीं

मंत्री यादव ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी को केवल कचरा निपटान या रीसाइक्लिंग तक सीमित करना एक अधूरी समझ है। उन्होंने कहा, 'बदलने से पहले मरम्मत, फेंकने से पहले दोबारा इस्तेमाल और कचरा बनने से पहले रिकवरी।' उनके अनुसार, सर्कुलरिटी की शुरुआत बाजार से होनी चाहिए, घरों में जारी रहनी चाहिए और अंततः यह रोजमर्रा की आदत बन जानी चाहिए।

उन्होंने सर्कुलरिटी को कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली में गहराई से रची-बसी सोच बताया। उनके शब्दों में, 'भारत के लिए सर्कुलर इकोनॉमी कोई नई मंजिल नहीं है, यह पुरानी समझ को देखने का एक नया नजरिया है।'

संसाधनों का पूरा जीवन-चक्र नीति का हिस्सा

यादव ने जोर देकर कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी नीति में संसाधनों का पूरा जीवन-चक्र शामिल होना चाहिए — प्रोडक्ट डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर उपयोग, मरम्मत, पुनः उपयोग, री-मैन्युफैक्चरिंग और रिकवरी तक। उन्होंने कहा कि रेगुलेटरी सुधारों और डिजिटल कंप्लायंस सिस्टम के जरिए इस नजरिए को व्यवहारिक रूप दिया जा रहा है।

इसमें प्लास्टिक, ई-वेस्ट और बैटरी जैसे क्षेत्रों के लिए 'एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी' (EPR) प्रणाली भी शामिल है। मंत्री यादव ने बताया कि अगस्त 2026 तक अलग-अलग EPR फ्रेमवर्क के तहत 83,000 से अधिक प्रोड्यूसर और 4,802 रीसाइक्लर पंजीकृत हो चुके थे, और विनियमित अपशिष्ट धाराओं में लगभग 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका था।

LiFE पहल से जुड़ाव और कचरे की नई परिभाषा

केंद्रीय मंत्री ने इस दृष्टिकोण को केंद्र सरकार की 'लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट' (LiFE) पहल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के लिए जिम्मेदारी से वस्तुओं का उपयोग करना अनिवार्य है।

उन्होंने कचरे की पारंपरिक परिभाषा को चुनौती देते हुए कहा कि कचरे को अब किसी उत्पाद की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नए संसाधन-चक्र की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, 'सर्कुलर इकोनॉमी का असली पैमाना यह नहीं होगा कि हम कितना कचरा रीसाइकल करते हैं, बल्कि यह होगा कि हम कितनी कम वैल्यू को बर्बाद होने देते हैं।'

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भारत का जोर

यादव ने यह भी रेखांकित किया कि सर्कुलर इकोनॉमी की ओर बदलाव कोई एक देश अकेले पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि भारत ने G20 प्रेसिडेंसी के दौरान 'रिसोर्स एफिशिएंसी एंड सर्कुलर इकोनॉमी इंडस्ट्री कोएलिशन' की शुरुआत की थी, और BRICS चेयरमैनशिप के दौरान भी सर्कुलर इकोनॉमी को प्राथमिकता दी गई।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर संसाधन दक्षता और जलवायु वित्त पर बहस तेज हो रही है, और भारत खुद को एक जिम्मेदार एवं अनुभवी आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। WCEF 2026 में भारत की यह प्रस्तुति आने वाले वैश्विक पर्यावरण वार्ताओं में देश के रुख को और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि EPR के तहत 83,000 पंजीकृत प्रोड्यूसर और 482 लाख मीट्रिक टन वेस्ट प्रोसेसिंग के आँकड़े ज़मीनी उपभोक्ता व्यवहार में कितने बदलाव लाए हैं। 'मरम्मत पहले' का नारा तब तक नीतिगत सफलता नहीं बनता जब तक मरम्मत सेवाओं की पहुँच, सामर्थ्य और मानकीकरण नहीं होता — जिसका कोई ब्यौरा इस संबोधन में नहीं था। LiFE पहल से जुड़ाव दिशा सही देता है, पर क्रियान्वयन का ढाँचा अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WCEF 2026 में भूपेंद्र यादव ने सर्कुलर इकोनॉमी पर क्या कहा?
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 सितंबर 2026 को गांधीनगर में WCEF 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल रीसाइक्लिंग प्लांट से नहीं बनती — इसकी शुरुआत उत्पादों के डिजाइन, खरीद और उपभोग से होनी चाहिए। उन्होंने 'बदलने से पहले मरम्मत और फेंकने से पहले दोबारा इस्तेमाल' के सिद्धांत को भारत की नीति-दिशा का मूल बताया।
भारत में EPR फ्रेमवर्क की स्थिति क्या है?
अगस्त 2026 तक, विभिन्न EPR (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) फ्रेमवर्क के तहत 83,000 से अधिक प्रोड्यूसर और 4,802 रीसाइक्लर पंजीकृत हो चुके हैं। विनियमित अपशिष्ट धाराओं में लगभग 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।
LiFE पहल और सर्कुलर इकोनॉमी का क्या संबंध है?
केंद्र सरकार की 'लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट' (LiFE) पहल नागरिकों को जिम्मेदार उपभोग की ओर प्रेरित करती है। यादव ने इसे सर्कुलर इकोनॉमी नीति से जोड़ते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के लिए व्यक्तिगत उपभोग की आदतें बदलना आवश्यक है।
भारत ने G20 और BRICS में सर्कुलर इकोनॉमी को कैसे आगे बढ़ाया?
भारत ने G20 प्रेसिडेंसी के दौरान 'रिसोर्स एफिशिएंसी एंड सर्कुलर इकोनॉमी इंडस्ट्री कोएलिशन' की शुरुआत की थी। BRICS चेयरमैनशिप के दौरान भी सर्कुलर इकोनॉमी को प्राथमिकताओं में शामिल किया गया, जो वैश्विक संसाधन दक्षता पर भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
सर्कुलर इकोनॉमी की सफलता को कैसे मापा जाना चाहिए?
यादव के अनुसार, सर्कुलर इकोनॉमी की सफलता का पैमाना केवल रीसाइकल किए गए कचरे की मात्रा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि असली मापदंड यह होगा कि कितनी कम वैल्यू को बर्बाद होने दिया गया — यानी संसाधनों का अधिकतम उपयोग और न्यूनतम अपव्यय।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 15 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 4 सप्ताह पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले