भूपेंद्र यादव का WCEF 2026 में आह्वान: 'पहले मरम्मत, फिर बदलाव' — सर्कुलर इकोनॉमी रीसाइक्लिंग प्लांट से नहीं, बाजार से शुरू होगी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 सितंबर 2026 को गांधीनगर में आयोजित वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में सर्कुलर इकोनॉमी की असली शुरुआत रीसाइक्लिंग संयंत्रों से नहीं, बल्कि उत्पादों के डिजाइन, खरीद और उपभोग के तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने 'बदलने से पहले मरम्मत, फेंकने से पहले दोबारा इस्तेमाल' के सिद्धांत को भारत की नीति-दिशा का मूल बताया। उनका यह संबोधन वैश्विक पर्यावरण नीति के संदर्भ में भारत की स्थिति को रेखांकित करने वाला रहा।
मुख्य संदेश: चक्रीयता एक आदत है, नियम नहीं
मंत्री यादव ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी को केवल कचरा निपटान या रीसाइक्लिंग तक सीमित करना एक अधूरी समझ है। उन्होंने कहा, 'बदलने से पहले मरम्मत, फेंकने से पहले दोबारा इस्तेमाल और कचरा बनने से पहले रिकवरी।' उनके अनुसार, सर्कुलरिटी की शुरुआत बाजार से होनी चाहिए, घरों में जारी रहनी चाहिए और अंततः यह रोजमर्रा की आदत बन जानी चाहिए।
उन्होंने सर्कुलरिटी को कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली में गहराई से रची-बसी सोच बताया। उनके शब्दों में, 'भारत के लिए सर्कुलर इकोनॉमी कोई नई मंजिल नहीं है, यह पुरानी समझ को देखने का एक नया नजरिया है।'
संसाधनों का पूरा जीवन-चक्र नीति का हिस्सा
यादव ने जोर देकर कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी नीति में संसाधनों का पूरा जीवन-चक्र शामिल होना चाहिए — प्रोडक्ट डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर उपयोग, मरम्मत, पुनः उपयोग, री-मैन्युफैक्चरिंग और रिकवरी तक। उन्होंने कहा कि रेगुलेटरी सुधारों और डिजिटल कंप्लायंस सिस्टम के जरिए इस नजरिए को व्यवहारिक रूप दिया जा रहा है।
इसमें प्लास्टिक, ई-वेस्ट और बैटरी जैसे क्षेत्रों के लिए 'एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी' (EPR) प्रणाली भी शामिल है। मंत्री यादव ने बताया कि अगस्त 2026 तक अलग-अलग EPR फ्रेमवर्क के तहत 83,000 से अधिक प्रोड्यूसर और 4,802 रीसाइक्लर पंजीकृत हो चुके थे, और विनियमित अपशिष्ट धाराओं में लगभग 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका था।
LiFE पहल से जुड़ाव और कचरे की नई परिभाषा
केंद्रीय मंत्री ने इस दृष्टिकोण को केंद्र सरकार की 'लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट' (LiFE) पहल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के लिए जिम्मेदारी से वस्तुओं का उपयोग करना अनिवार्य है।
उन्होंने कचरे की पारंपरिक परिभाषा को चुनौती देते हुए कहा कि कचरे को अब किसी उत्पाद की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नए संसाधन-चक्र की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, 'सर्कुलर इकोनॉमी का असली पैमाना यह नहीं होगा कि हम कितना कचरा रीसाइकल करते हैं, बल्कि यह होगा कि हम कितनी कम वैल्यू को बर्बाद होने देते हैं।'
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भारत का जोर
यादव ने यह भी रेखांकित किया कि सर्कुलर इकोनॉमी की ओर बदलाव कोई एक देश अकेले पूरा नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि भारत ने G20 प्रेसिडेंसी के दौरान 'रिसोर्स एफिशिएंसी एंड सर्कुलर इकोनॉमी इंडस्ट्री कोएलिशन' की शुरुआत की थी, और BRICS चेयरमैनशिप के दौरान भी सर्कुलर इकोनॉमी को प्राथमिकता दी गई।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर संसाधन दक्षता और जलवायु वित्त पर बहस तेज हो रही है, और भारत खुद को एक जिम्मेदार एवं अनुभवी आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। WCEF 2026 में भारत की यह प्रस्तुति आने वाले वैश्विक पर्यावरण वार्ताओं में देश के रुख को और स्पष्ट करेगी।