विशाखापत्तनम: आदिवासी छात्रों के स्थानांतरण के विरोध में वाईएसआरसीपी नेता हिरासत में, 480 बच्चों का भविष्य दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
विशाखापत्तनम में मारिकावालसा आदिवासी कल्याण आवासीय विद्यालय के 480 छात्रों के जबरन स्थानांतरण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों से मिलने जा रहे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के वरिष्ठ नेताओं को मंगलवार, 1 सितंबर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पार्टी के अनुसार, पूर्व उपमुख्यमंत्री पुष्पा श्रीवाणी और पूर्व मंत्री बालाराजू को विद्यालय परिसर तक पहुँचने से पहले ही रोककर पुलिस वाहन में बैठा लिया गया।
विवाद की जड़: गुरुकुलम को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने का फैसला
वर्ष 2004 से संचालित मारिकावालसा एपी ट्राइबल वेलफेयर रेजिडेंशियल बॉयज इंग्लिश मीडियम स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में रूपांतरित करने के सरकारी फैसले ने इस विवाद को जन्म दिया। प्रस्तावित केंद्र में नीट और आईआईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष कोचिंग दी जानी है। इसी के चलते वर्तमान में पढ़ रहे 480 छात्रों — जिनमें कक्षा 10 के विद्यार्थी भी हैं — को शैक्षणिक सत्र के बीच में सब्बावरम, श्रीकृष्णापुरम, देवरापल्ली, पर्वतीपुरम और अन्य आवासीय विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया।
अभिभावकों का विरोध और पुलिस की तैनाती
अभिभावकों ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया और माँग की कि स्कूल मारिकावालसा में ही जारी रहे। अभिभावक समिति ने इस संदर्भ में प्रस्ताव पारित कर अधिकारियों को सौंपा, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार पुलिस की मौजूदगी में ही स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी की गई। अनिश्चितता के माहौल में करीब 70 छात्रों ने ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) भी ले लिया, जो इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है।
वाईएसआरसीपी के आरोप और सरकार पर निशाना
वाईएसआरसीपी ने टीडीपी नीत गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया कि उसने शैक्षणिक सत्र के बीच आदिवासी बच्चों को उनके गुरुकुलम से विस्थापित किया और विरोध में खड़े नेताओं के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल किया। पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार, छात्रों की पढ़ाई में किसी भी बाधा की समाप्ति, और यह स्पष्टीकरण कि निजी संस्थानों की भागीदारी वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस किन शर्तों पर स्थापित किए जा रहे हैं।
वाईएसआरसीपी प्रवक्ता का बयान
पार्टी प्रवक्ता कोंडा राजीव ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआरसीपी आदिवासी छात्रों के अधिकारों और शिक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार नया COE स्थापित करना चाहती है, तो इसके लिए वैकल्पिक भूमि पर नया परिसर बनाया जाए — न कि दशकों से चल रहे आदिवासी गुरुकुलम से बच्चों को बेदखल किया जाए।
आगे क्या होगा
यह मामला आंध्र प्रदेश में आदिवासी शिक्षा नीति और राजनीतिक जवाबदेही दोनों के लिहाज से अहम हो गया है। गौरतलब है कि शैक्षणिक सत्र के बीच में इस तरह का स्थानांतरण कक्षा 10 के उन छात्रों के लिए विशेष रूप से नुकसानदेह है जो बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में हैं। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।