युजवेंद्र चहल ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में की भस्म आरती, बोले — 'पहला अनुभव अविस्मरणीय रहा'
सारांश
मुख्य बातें
क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने 19 जून 2026 को उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन किए और इसे अपना पहला एवं अविस्मरणीय अनुभव बताया। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी के अवसर पर आयोजित इस दिव्य भस्म आरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के साथ चहल भी शामिल हुए।
चहल का अनुभव
मंदिर परिसर से बाहर निकलने के बाद चहल ने कहा, 'मुझे बहुत अच्छा लगा। यह मेरा पहला भस्म आरती का अनुभव था और सब कुछ बहुत आसानी से हो गया। यहाँ जिस तरह से लोगों को मैनेज और गाइड किया गया, वह वाकई तारीफ के काबिल था।' यह टिप्पणी मंदिर प्रशासन की व्यवस्था की सराहना के रूप में सामने आई।
भस्म आरती का दिव्य क्रम
शुक्रवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषण अर्पित कर दिव्य शृंगार किया गया।
जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गूँज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
भस्म आरती की परंपरा और नियम
जानकारी के अनुसार, पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था
बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार की देर रात से ही दर्शन के लिए पंक्तिबद्ध हो गए थे। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। मंदिर परिसर और उसके आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और यहाँ आम श्रद्धालुओं से लेकर बड़ी हस्तियाँ भी दर्शन के लिए आती रहती हैं। चहल की यह यात्रा इसी परंपरा की एक और कड़ी है।