10 अगस्त 2026
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युजवेंद्र चहल ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में की भस्म आरती, बोले — 'पहला अनुभव अविस्मरणीय रहा'

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युजवेंद्र चहल ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में की भस्म आरती, बोले — 'पहला अनुभव अविस्मरणीय रहा'

सारांश

क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन कर इसे अपना पहला और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी पर आयोजित इस दिव्य आरती में देशभर के श्रद्धालु उमड़े और मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा।

मुख्य बातें

क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने 19 जून 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन किए।
चहल ने इसे अपना पहला भस्म आरती अनुभव बताया और मंदिर प्रशासन की व्यवस्था की सराहना की।
आरती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी को भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ संपन्न हुई।
अब भस्म आरती में श्मशान राख की जगह कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य पोशाक है।

क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने 19 जून 2026 को उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन किए और इसे अपना पहला एवं अविस्मरणीय अनुभव बताया। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी के अवसर पर आयोजित इस दिव्य भस्म आरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के साथ चहल भी शामिल हुए।

चहल का अनुभव

मंदिर परिसर से बाहर निकलने के बाद चहल ने कहा, 'मुझे बहुत अच्छा लगा। यह मेरा पहला भस्म आरती का अनुभव था और सब कुछ बहुत आसानी से हो गया। यहाँ जिस तरह से लोगों को मैनेज और गाइड किया गया, वह वाकई तारीफ के काबिल था।' यह टिप्पणी मंदिर प्रशासन की व्यवस्था की सराहना के रूप में सामने आई।

भस्म आरती का दिव्य क्रम

शुक्रवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषण अर्पित कर दिव्य शृंगार किया गया।

जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गूँज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

भस्म आरती की परंपरा और नियम

जानकारी के अनुसार, पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था

बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार की देर रात से ही दर्शन के लिए पंक्तिबद्ध हो गए थे। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। मंदिर परिसर और उसके आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और यहाँ आम श्रद्धालुओं से लेकर बड़ी हस्तियाँ भी दर्शन के लिए आती रहती हैं। चहल की यह यात्रा इसी परंपरा की एक और कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक प्रवृत्ति को भी रेखांकित करती है जिसमें खेल जगत की हस्तियाँ तीर्थस्थलों पर जाकर अपनी आध्यात्मिक पहचान को सार्वजनिक करती हैं। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर पिछले कुछ वर्षों में महाकाल लोक परियोजना के बाद से पर्यटन और श्रद्धा दोनों के केंद्र के रूप में उभरा है। यह ध्यान देने योग्य है कि जब कोई सार्वजनिक हस्ती इस तरह के अनुभव साझा करती है, तो इससे मंदिर की पहुँच और श्रद्धालुओं की संख्या दोनों पर असर पड़ता है — जो मंदिर प्रशासन के लिए व्यवस्था की दृष्टि से एक चुनौती भी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

युजवेंद्र चहल महाकाल मंदिर कब गए?
युजवेंद्र चहल ने 19 जून 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन किए। यह ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी का दिन था।
भस्म आरती का अनुभव चहल ने कैसा बताया?
चहल ने कहा कि यह उनका पहला भस्म आरती का अनुभव था और सब कुछ बहुत आसानी से हो गया। उन्होंने मंदिर में लोगों को मैनेज और गाइड करने के तरीके की विशेष तारीफ की।
महाकाल की भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा को स्वच्छता और आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए किया गया।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पोशाक अनिवार्य है?
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा को बनाए रखने के लिए लागू है।
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती कितनी प्रसिद्ध है?
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और यहाँ आम श्रद्धालुओं से लेकर बड़ी हस्तियाँ भी दर्शन के लिए आती हैं। मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं, जिसके लिए बड़े पैमाने पर पुलिस व्यवस्था भी तैनात रहती है।
राष्ट्र प्रेस
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