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तेजी बच्चन: जाति, संस्कृति और सत्ता की सीमाएं तोड़ीं, जिनके विचारों ने गढ़ा ‘महानायक’ और बदली सामाजिक सोच
नई दिल्ली, 20 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। 1941 की एक सुहानी शाम, लाहौर के एक सजे-धजे हॉल में इलाहाबाद का एक युवा कवि अपनी कविता का पाठ कर रहा था। कविता का शीर्षक था, "क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी..."।…