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हलीचरण नारजारी 'असम गौरव पुरस्कार' के लिए चयनित, बेसहारा बचपन से राष्ट्रीय फुटबॉल तक का सफर

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हलीचरण नारजारी 'असम गौरव पुरस्कार' के लिए चयनित, बेसहारा बचपन से राष्ट्रीय फुटबॉल तक का सफर

सारांश

जूते खरीदने के साधन नहीं थे, फिर भी मैदान नहीं छोड़ा — हलीचरण नारजारी का बारपेटा से भारतीय टीम तक का सफर अब 'असम गौरव पुरस्कार' से सम्मानित हुआ। 27 अंतरराष्ट्रीय मैच, ISL खिताब और डूरंड कप में एक मैच में चार गोल — पूर्वोत्तर फुटबॉल का यह सितारा आज लाखों युवाओं की प्रेरणा है।

मुख्य बातें

हलीचरण नारजारी को असम सरकार के प्रतिष्ठित 'असम गौरव पुरस्कार' के लिए चुना गया है।
उन्होंने 2015 में सीनियर भारतीय फुटबॉल टीम में पदार्पण किया और देश के लिए 27 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले।
वह 2021-22 ISL खिताब जीतने वाली हैदराबाद एफसी टीम का हिस्सा रहे।
डूरंड कप 2026 में बोडोलैंड एफसी की कप्तानी करते हुए एक मैच में चार गोल दागे।
उन्होंने 2015 SAFF चैंपियनशिप और 2018 इंटरकॉन्टिनेंटल कप विजेता भारतीय टीम में भी योगदान दिया।
पेशेवर करियर की शुरुआत 2010 में पाईलान एरोज से हुई थी।

भारतीय फुटबॉल टीम के अनुभवी फॉरवर्ड हलीचरण नारजारी को असम सरकार के प्रतिष्ठित 'असम गौरव पुरस्कार' के लिए चुना गया है। बारपेटा जिले से ताल्लुक रखने वाले नारजारी को खेल जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस सम्मान हेतु अलंकृत किया गया है। यह चयन असम के युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है।

संघर्ष से सितारा बनने की प्रेरणादायक कहानी

हलीचरण नारजारी की यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बचपन में उनके पास पैरों में जूते पहनने तक के साधन नहीं थे और खेल की बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं थीं। इन विकट परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अदम्य इच्छाशक्ति और अथक परिश्रम के बल पर भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में अपनी जगह बनाई।

आज उनका यह संघर्षपूर्ण सफर देशभर के उभरते खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल बन चुका है। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण है जब पूर्वोत्तर भारत से उभरने वाले फुटबॉलरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

घरेलू करियर: क्लब से क्लब तक का शानदार सफर

हलीचरण नारजारी ने अपने पेशेवर क्लब करियर की शुरुआत 2010 में पाईलान एरोज से की थी। इसके बाद वह डेम्पो एससी से जुड़े। इंडियन सुपर लीग (ISL) में उन्होंने एफसी गोवा, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी, केरल ब्लास्टर्स, चेन्नैयिन एफसी और बेंगलुरु एफसी जैसे प्रमुख क्लबों का प्रतिनिधित्व किया।

उनके करियर का एक ऐतिहासिक पड़ाव वह रहा जब वे हैदराबाद एफसी का हिस्सा थे और उस टीम ने 2021-22 सीजन में ISL खिताब अपने नाम किया। गौरतलब है कि 2026 में उन्होंने अपनी गृह क्षेत्र की टीम बोडोलैंड एफसी से जुड़कर करियर का एक नया अध्याय शुरू किया।

डूरंड कप 2026 में कप्तानी और चार गोल की धमाकेदार वापसी

डूरंड कप 2026 में हलीचरण ने बोडोलैंड एफसी की कप्तानी की और एक ही मैच में चार गोल ठोककर सुर्खियाँ बटोरीं। एक वरिष्ठ खिलाड़ी का ऐसा प्रदर्शन इस टूर्नामेंट में असाधारण था और उन्होंने अपनी टीम को नई ऊर्जा प्रदान की।

अंतरराष्ट्रीय करियर: 27 मैच और दो बड़े खिताब

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलीचरण ने भारत की अंडर-19 और अंडर-23 टीमों में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 2015 में सीनियर भारतीय फुटबॉल टीम के लिए पदार्पण किया और देश के लिए 27 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। वह 2015 SAFF चैंपियनशिप और 2018 इंटरकॉन्टिनेंटल कप विजेता भारतीय टीम के अहम सदस्य भी रहे।

'असम गौरव पुरस्कार' न केवल हलीचरण की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत के उस फुटबॉल आंदोलन को भी मान्यता देती है जो वर्षों से राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश में है। आने वाले समय में यह पुरस्कार असम और पूर्वोत्तर के नए खिलाड़ियों को फुटबॉल की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सिस्टम की ताकत नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत जिजीविषा का प्रमाण है। असली सवाल यह है कि क्या असम और पूर्वोत्तर के राज्य अब ऐसी प्रतिभाओं के लिए ढाँचागत निवेश करेंगे — जिससे अगली पीढ़ी को नारजारी जैसा संघर्ष न करना पड़े। पुरस्कार प्रेरित करते हैं, लेकिन टर्फ मैदान, अकादमियाँ और वज़ीफे बदलाव लाते हैं।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हलीचरण नारजारी को 'असम गौरव पुरस्कार' क्यों दिया जा रहा है?
भारतीय फुटबॉल में हलीचरण नारजारी के उल्लेखनीय योगदान के लिए असम सरकार ने उन्हें 'असम गौरव पुरस्कार' हेतु चयनित किया है। उन्होंने 27 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, ISL खिताब जीता और पूर्वोत्तर भारत के फुटबॉल को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
हलीचरण नारजारी का फुटबॉल करियर कैसा रहा है?
हलीचरण नारजारी ने 2010 में पाईलान एरोज से करियर की शुरुआत की और ISL में एफसी गोवा, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड, केरल ब्लास्टर्स, चेन्नैयिन एफसी, बेंगलुरु एफसी और हैदराबाद एफसी जैसे क्लबों के लिए खेले। 2021-22 में हैदराबाद एफसी के साथ ISL खिताब जीतना उनके करियर का एक बड़ा मील का पत्थर है।
हलीचरण नारजारी ने भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए कितने मैच खेले हैं?
हलीचरण नारजारी ने 2015 में सीनियर भारतीय फुटबॉल टीम में पदार्पण किया और कुल 27 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। वह 2015 SAFF चैंपियनशिप और 2018 इंटरकॉन्टिनेंटल कप जीतने वाली भारतीय टीमों के भी सदस्य रहे।
बोडोलैंड एफसी और डूरंड कप 2026 में नारजारी का प्रदर्शन कैसा रहा?
2026 में हलीचरण अपनी गृह क्षेत्र की टीम बोडोलैंड एफसी से जुड़े और डूरंड कप 2026 में टीम की कप्तानी की। एक ही मैच में उन्होंने चार गोल दागे, जिसने खेल जगत में व्यापक चर्चा बटोरी।
'असम गौरव पुरस्कार' क्या है?
'असम गौरव पुरस्कार' असम सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राज्य सम्मान है। यह पुरस्कार खेल, संस्कृति, विज्ञान आदि में असम का नाम रोशन करने वाले व्यक्तित्वों को दिया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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