नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान पर खतरा: MFA उपाध्यक्ष रयान मेनेजेस बोले — 10,000 बच्चों का भविष्य दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के बांद्रा रिक्लेमेशन में स्थित नेविल डिसूजा फुटबॉल टर्फ को कन्वेंशन सेंटर में बदलने के प्रस्तावित फैसले के विरोध में 23 अगस्त 2026 को स्थानीय निवासियों, फुटबॉल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन (MFA) के उपाध्यक्ष रयान मेनेजेस ने चेतावनी दी कि यह कदम मुंबई की फुटबॉल विरासत के लिए अपूरणीय क्षति साबित हो सकता है।
मैदान का महत्व और बच्चों पर असर
रयान मेनेजेस ने कहा, "यह मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन को आधिकारिक रूप से आवंटित 11-ए-साइड फुटबॉल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मैदान है। यहाँ हर साल 10,000 से अधिक बच्चे खेलते हैं और हम प्रतिवर्ष आधिकारिक मैचों का आयोजन करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि इस मैदान पर खेलने वाले अधिकांश युवा आगे चलकर MFA, जिला, राज्य और राष्ट्रीय टीमों में अपनी जगह बनाते हैं।
मेनेजेस ने स्पष्ट किया कि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा, "MFA की ओर से हमने अधिकारियों को कई पत्र सौंपे हैं। भारत के मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों ने भी इस फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। हमें माननीय न्यायालय के अगले आदेश का इंतजार है और हमें पूरा विश्वास है कि न्याय होगा।"
प्रदर्शनकारियों की आवाज़
विरोध में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि नेविल डिसूजा मैदान मुंबई की उन गिनी-चुनी खुली जगहों में से एक है जो युवाओं के लिए खेल का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने याद दिलाया, "जब हम बच्चे थे, तो पथरीले और कीचड़ भरे मैदानों पर खेलते थे। अब जब एस्ट्रो-टर्फ जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं, तो ऐसे मैदान छीनना युवाओं के साथ अन्याय होगा।"
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि इस मैदान से मुंबई के जमीनी फुटबॉल का पूरा इकोसिस्टम जुड़ा हुआ है। उनके शब्दों में, "अगर यह मैदान तोड़ दिया गया, तो हमारा फुटबॉल इकोसिस्टम आखिरकार खत्म हो जाएगा।"
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई जैसे महानगरों में खेल के मैदानों की उपलब्धता पहले से ही गंभीर चिंता का विषय रही है। शहरीकरण की तेज़ रफ्तार के बीच सार्वजनिक खेल अवसंरचना का संकुचन, विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वर्ग के युवाओं के लिए, एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। गौरतलब है कि बांद्रा रिक्लेमेशन क्षेत्र में खाली भूमि की बेहद कमी है, जिससे यह मैदान और भी मूल्यवान हो जाता है।
कानूनी स्थिति और आगे की राह
मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार है। MFA और खिलाड़ियों के संगठनों ने अधिकारियों से मैदान को खेल प्रयोजन के लिए बनाए रखने की माँग की है। न्यायालय का आगामी निर्णय न केवल इस मैदान बल्कि मुंबई में फुटबॉल के भविष्य की दिशा तय करेगा।