वैशाली ने टोक्यो में WR विमेंस चेस टूर जीता, भाई प्रज्ञानंद के नॉर्वे चेस खिताब के कुछ घंटों बाद
सारांश
मुख्य बातें
ग्रैंडमास्टर आर वैशाली ने 6 जून 2025 को टोक्यो, जापान में आयोजित WR विमेंस चेस टूर के पहले इवेंट का खिताब अपने नाम किया — और यह उपलब्धि उनके भाई ग्रैंडमास्टर रमेशबाबू प्रज्ञानंद द्वारा नॉर्वे चेस चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय बनने के महज कुछ घंटों बाद आई। एक ही दिन में भाई-बहन की इस दोहरी जीत ने भारतीय शतरंज के इतिहास में एक अभूतपूर्व अध्याय जोड़ दिया है।
मुकाबले का घटनाक्रम
चेन्नई की 24 वर्षीय वैशाली ने आठ खिलाड़ियों वाले रैपिड इवेंट में दमदार प्रदर्शन किया। इस इवेंट में टाइम कंट्रोल 15 मिनट था, जिसमें हर चाल के बाद 10 सेकंड का अतिरिक्त समय जुड़ता गया।
क्वार्टर फाइनल में वैशाली ने आईएम इरीन सुकंदर को 1.5-0.5 से हराया — एक गेम जीतकर और दूसरा ड्रॉ खेलकर। सेमीफाइनल में उन्होंने पूर्व महिला विश्व चैंपियन एलेक्जेंड्रा कोस्टेनियुक को भी 1.5-0.5 के अंतर से मात दी। फाइनल में कजाकिस्तान की आईएम अलुआ नूरमान को 1.5-0.5 से हराकर वैशाली ने खिताब पर कब्जा किया।
प्रतिस्पर्धियों का स्तर
इस इवेंट में रूस की एलेक्जेंड्रा कोस्टेनियुक और कैटरीना लैग्नो, बुल्गारिया की एंटोएनेटा स्टेफानोवा, अन्ना सरगस्यान, इरीन सुकंदर, अलुआ नूरमान और अजुमी सकाई जैसी मजबूत खिलाड़ी शामिल थीं। वैशाली इन सभी से आगे रहीं।
प्रज्ञानंद का नॉर्वे चेस में ऐतिहासिक प्रदर्शन
इससे कुछ घंटे पहले, शुक्रवार रात 20 वर्षीय प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस चैंपियनशिप के 10वें और आखिरी राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर यह खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का कारनामा किया। सफेद मोहरों से खेलते हुए उन्होंने मिडिल-गेम में कीमर की गलतियों का फायदा उठाया और 45वीं चाल में जीत दर्ज की।
प्रज्ञानंद ने टूर्नामेंट का समापन 18 अंकों के साथ किया — पाँच जीत, दो हार और दो ड्रॉ; दोनों ड्रॉ मुकाबले उन्होंने आर्मागेडन गेम में जीते। इस जीत के साथ उन्होंने $1,00,000 का टॉप प्राइज भी अपने नाम किया।
आगे क्या
रैपिड खिताब जीतने के बाद वैशाली अब रविवार से शुरू होने वाले ब्लिट्ज इवेंट में भी खिताब जीतकर 'डबल' हासिल करने की दौड़ में हैं। यदि वे ब्लिट्ज भी जीतती हैं, तो यह WR विमेंस चेस टूर के उद्घाटन संस्करण में एक असाधारण उपलब्धि होगी।