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वुशू: एक अद्वितीय मार्शल आर्ट जो आत्मरक्षा और संतुलन की कला है

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वुशू: एक अद्वितीय मार्शल आर्ट जो आत्मरक्षा और संतुलन की कला है

सारांश

वुशू एक प्राचीन चीनी मार्शल आर्ट है जो न केवल आत्मरक्षा सिखाता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक विकास में भी सहायता करता है। जानें इसके इतिहास और तकनीकों के बारे में।

मुख्य बातें

वुशू एक प्राचीन चीनी मार्शल आर्ट है।
इसका अभ्यास आत्मरक्षा , फुर्ती और संतुलन में सहायता करता है।
मुख्य श्रेणियाँ हैं: ताओलू और सांडा ।
मुकाबले लेताई पर होते हैं।
विजेता का निर्णय 2 राउंड जीतने पर होता है।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चीनी मार्शल आर्ट 'वुशू' आत्मरक्षा, फुर्ती और संतुलन का खेल है, जो शारीरिक क्षमता, अनुशासन और मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने में सहायता करता है। 'वु' का अर्थ है सैन्य या मार्शल 'युद्ध', जबकि 'शू' का तात्पर्य है 'कला'। वुशू एक सामूहिक शब्द है उन मार्शल आर्ट अभ्यासों के लिए जिनका विकास और प्रसार चीन में हुआ। यह कला चीनी मार्शल आर्ट की संस्कृति और छवि को प्रदर्शित करती है।

ऐसा माना जाता है कि वुशू की जड़ें 3000-1200 ईसा पूर्व से जुड़ी हैं। उस काल में आदिमानव अपनी रक्षा के लिए इस तकनीक का उपयोग करते थे। मध्यकालीन समय में इसे 'वी यू' के नाम से जाना गया। 1626-1644 के दौरान कविताओं में वुशू का उल्लेख भी मिलता है।

साल 1928 में नानजिंग (चीन) में नेशनल मार्शल आर्ट एकेडमी की स्थापना हुई, जिससे इस खेल को प्रोत्साहन मिला। फिर 1950 के दशक में चीनी सरकार ने इसे एक पारंपरिक खेल के रूप में मान्यता दी। 1990 में इंटरनेशनल वुशू फेडरेशन (आईडब्ल्यूयूएफ) का गठन हुआ, और अगले वर्ष बीजिंग में पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप आयोजित की गई।

स्पोर्ट वुशू को दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: 'ताओलू' और 'सांडा'

ताओलू वुशू के सेट रूटीन (फॉर्म) अभ्यास वाले हिस्से को कहते हैं। इसमें पहले से तय तकनीकों का एक सेट होता है, जो हमले और बचाव की शैलियों को प्रदर्शित करता है। इसमें हाथ और पैर की तकनीकें, कूदने के तरीके, पकड़ना, फेंकना, कुश्ती और संतुलन शामिल हैं।

दूसरी ओर, सांडा बगैर किसी हथियार के प्रदर्शन करता है, जिसमें मुक्के, लात, फेंकना, कुश्ती और बचाव की तकनीकें शामिल होती हैं।

मुकाबले एक ऊंचे मंच पर होते हैं, जिसे 'लेताई' कहा जाता है। लेताई की ऊंचाई 80 सेंटीमीटर, चौड़ाई 8 मीटर और लंबाई 8 मीटर होती है। इस मंच पर उच्च घनत्व वाले फोम का उपयोग होता है, जिसे कैनवास से ढका जाता है। मंच के चारों ओर सुरक्षात्मक कुशन होता है। खिलाड़ी मुकाबले के समय सुरक्षात्मक गियर पहनते हैं, जिसमें हेडगार्ड, चेस्ट प्रोटेक्टर, दस्ताने, माउथगार्ड और जॉकस्ट्रैप शामिल होते हैं।

हर मुकाबले में कुल 3 राउंड होते हैं, प्रत्येक राउंड दो मिनट का होता है। दो राउंड के बीच एक मिनट का ब्रेक मिलता है। विजेता का निर्णय तब होता है जब कोई खिलाड़ी 2 राउंड जीत ले या उसका विरोधी नॉकआउट हो जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह शारीरिक और मानसिक विकास में भी योगदान देता है। इसे चीनी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा माना जाता है और इसके अभ्यास से अनुशासन और संतुलन में सुधार होता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वुशू की मुख्य श्रेणियाँ कौन सी हैं?
वुशू मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित है: ताओलू और सांडा।
वुशू का इतिहास क्या है?
वुशू की जड़ें 3000-1200 ईसा पूर्व से जुड़ी हैं और यह चीन की प्राचीन तकनीकों का प्रतिनिधित्व करती है।
क्या वुशू केवल आत्मरक्षा के लिए है?
नहीं, वुशू शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।
वुशू के मुकाबले कैसे होते हैं?
वुशू के मुकाबले एक ऊँचे मंच पर होते हैं जिसमें कुल 3 राउंड होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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