अभिषेक सिंघवी का खुलासा: भाजपा का माहौल और चुनावी नतीजे
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा का चुनावी माहौल हमेशा अनुकूल नहीं होता।
- तमिलनाडु में भाजपा की स्वीकार्यता नहीं है।
- असम में भाजपा को नुकसान होने की संभावना है।
- ममता बनर्जी
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक सिंघवी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने हार-जीत, राजनीतिक समीकरण और गठबंधनों पर अपने विचार साझा किए। साथ ही, मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरने का प्रयास किया।
सवाल: 5 राज्यों में चुनाव की घोषणा हुई है। आप इन चुनावों को कैसे देखते हैं और इनमें किसका पलड़ा भारी है?
जवाब: राजनीतिक इतिहास के अनुसार, अधिकांश चुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए आशाजनक नहीं होने चाहिए। यह कोई पूर्वानुमान नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक इतिहास का नतीजा है।
केरल में भाजपा चाहे जितना शोर मचाए, परिणाम अक्सर उसके विपरीत आते हैं। भाजपा ऐसा माहौल बनाती है कि उसके सामने कोई और दल नहीं है, लेकिन परिणाम हमेशा उलट होते हैं। अगर हम केरल की बात करें, तो भाजपा को वहां या तो शून्य या अधिकतम एक सीट मिल सकती है।
तमिलनाडु में भाजपा प्रयत्न कर रही है, लेकिन वहां उसके सिद्धांतों को कोई मान्यता नहीं है। भाजपा के अनेक सिद्धांत हैं, जो स्थानीय संस्कृति के बिल्कुल विपरीत हैं। इसलिए वहां भाजपा को एक-दो प्रतिशत की बढ़त हो सकती है, लेकिन परिणाम निराशाजनक होंगे।
असम में भाजपा को लगता है कि वह सबसे अधिक सीटें पाएगी, लेकिन यह सच नहीं है। भाजपा विभाजन की राजनीति में माहिर है, और यह असम में भद्देपन की चरम सीमा तक पहुँच चुकी है।
हमारी टीम बहुत मेहनत कर रही है। गोगोई एक सक्षम नेता हैं और असम के लोग समझते हैं कि विभाजन का राजनीतिक खेल अब नहीं चलेगा।
असम में भाजपा के लिए हिमंत बिस्वा सरमा की भद्देपन की परिभाषा बहुत नुकसानदायक साबित होगी।
मैं मानता हूँ कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक मजबूत नेता हैं। राज्य की जनता को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भाजपा केवल माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।
बंगाल में कांग्रेस के लिए गठबंधन का निर्णय आवश्यक है। लेकिन कई कारणों से ऐसा नहीं हो पाता।
हाल में, अरविंद केजरीवाल के मामले में न्यायिक दुरुपयोग की बात सामने आई है। मैं मानता हूँ कि राजनीतिक मामलों में यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
इस स्थिति में, भाजपा के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है।