29 जुलाई 2026
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अहमदाबाद नगर निगम का मेगा प्लान: 41 झीलों-तालाबों की इंटरलिंकिंग से बारिश की हर बूंद होगी सुरक्षित

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अहमदाबाद नगर निगम का मेगा प्लान: 41 झीलों-तालाबों की इंटरलिंकिंग से बारिश की हर बूंद होगी सुरक्षित

सारांश

अहमदाबाद नगर निगम ने 'कैच द रेन' और 'सुजलाम सुफलाम' अभियान के तहत शहर की 41 झीलों को पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ दिया है — 32 और जोड़ी जाएंगी। एक तालाब भरते ही पानी अगले में स्थानांतरित होगा। यह मॉडल भूजल रिचार्ज, जलभराव नियंत्रण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा का ब्लूप्रिंट बन सकता है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने 41 झीलों और तालाबों को पाइपलाइन नेटवर्क से परस्पर जोड़ने का काम पूरा किया।
32 और झीलों को जोड़ने का काम प्रगति पर है; 17 झीलों की योजना तैयार — कुल 90 जल निकाय नेटवर्क का हिस्सा बनेंगे।
परियोजना से शहर की वर्षा जल भंडारण क्षमता में लाखों क्यूबिक फीट की वृद्धि हुई है।
योजना 'कैच द रेन' (केंद्र) और 'सुजलाम सुफलाम जल अभियान' (गुजरात) के तहत क्रियान्वित; केंद्र व राज्य सरकार का वित्तीय सहयोग।
नगर आयुक्त बंछानिधि पाणि के अनुसार भूजल स्तर अभी संकट में नहीं, लेकिन पुनर्भरण प्राथमिकता है।
अहमदाबाद मॉडल को राज्य और देश के अन्य शहरों के लिए अनुकरणीय माना जा रहा है।

अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने 29 जुलाई 2026 को शहर की 41 झीलों और तालाबों को परस्पर जोड़ने वाली इंटरलिंकिंग परियोजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। 'सुजलाम सुफलाम जल अभियान' और केंद्र सरकार के 'कैच द रेन' अभियान के तहत क्रियान्वित यह योजना वर्षा जल की बर्बादी रोकने, भूजल स्तर सुधारने और शहरी जलभराव घटाने के तीन लक्ष्यों को एक साथ साधने का प्रयास है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मार्गदर्शक ढाँचा बन सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एएमसी) के चीफ इंजीनियर राकेश बोडीवाला के अनुसार, अब तक शहर की 41 झीलें आपस में जोड़ी जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 32 झीलों को जोड़ने का काम प्रगति पर है और 17 झीलों की योजना तैयार की जा चुकी है। इस प्रकार कुल 90 जल निकाय इस नेटवर्क का हिस्सा बनेंगे।

इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली सरल किंतु प्रभावी है — जब कोई एक तालाब पूरी तरह भर जाता है, तो उसका अतिरिक्त पानी पाइपलाइन के माध्यम से स्वतः अगले तालाब में स्थानांतरित हो जाता है। इससे वर्षा जल जो पहले नालों के रास्ते बह जाता था, अब संग्रहित होगा।

परियोजना का व्यापक दायरा

इस इंटरलिंकिंग परियोजना से अहमदाबाद की वर्षा जल भंडारण क्षमता में लाखों क्यूबिक फीट की वृद्धि दर्ज की गई है। एएमसी के नगर आयुक्त बंछानिधि पाणि ने बताया, 'केंद्र और गुजरात सरकार की मदद से यह इंटरलिंकिंग स्कीम अभी लागू हो रही है। अभी इस पानी को स्टोर करके ग्राउंड लेवल के नीचे का पानी रिचार्ज किया जा रहा है और हमारे लिए भूजल स्तर बहुत ज़्यादा नीचे नहीं है।'

परियोजना के लाभ केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं। शहर में जलभराव की समस्या में कमी, भूजल पुनर्भरण और मानसून के बाद जल उपलब्धता में सुधार — ये तीनों पहलू इस योजना के दीर्घकालिक उद्देश्यों में शामिल हैं।

आम जनता पर असर

बारिश के मौसम में पानी से लबालब ये तालाब और झीलें शहरवासियों के लिए मनोरंजन और भ्रमण के केंद्र के रूप में भी विकसित होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब बढ़ती आबादी और तेज़ शहरीकरण के चलते देश के लगभग हर बड़े शहर में भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है।

गौरतलब है कि जल संकट अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या नहीं रही — अहमदाबाद जैसे महानगर भी गर्मियों में जल आपूर्ति के दबाव का सामना करते हैं। इस परियोजना के पूर्ण होने पर शहरवासियों को पेयजल आपूर्ति में दीर्घकालिक राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार जल संरक्षण और सतत शहरी विकास को प्राथमिकता दे रही है। केंद्र सरकार के 'कैच द रेन' अभियान के साथ राज्य की 'सुजलाम सुफलाम' पहल का यह समन्वय एक नीतिगत तालमेल का उदाहरण है।

क्या होगा आगे

एएमसी के अनुसार 32 झीलों को जोड़ने का काम जारी है और 17 और झीलों की योजना तैयार है। परियोजना के पूरी तरह क्रियान्वित होने पर अहमदाबाद का यह जल-प्रबंधन मॉडल राज्य और देश के अन्य शहरों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — 41 में से 32 झीलें अभी भी जुड़नी बाकी हैं और 17 केवल योजना के स्तर पर हैं। भारत के शहरी जल संकट का पैमाना इतना बड़ा है कि एक मॉडल परियोजना की सफलता तभी सार्थक होगी जब उसके भंडारण क्षमता और भूजल पुनर्भरण के दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित हों। गौरतलब है कि देश के कई शहरों में 'जल संरक्षण मेगा प्लान' घोषित होते हैं, पर बजट आवंटन और रखरखाव के अभाव में ढाँचा जर्जर हो जाता है। अहमदाबाद के पास इस मॉडल को टिकाऊ बनाने का अवसर है — बशर्ते पाइपलाइन नेटवर्क के दीर्घकालिक रखरखाव की योजना भी उतनी ही ठोस हो जितनी निर्माण की।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद नगर निगम की झील इंटरलिंकिंग परियोजना क्या है?
यह 'सुजलाम सुफलाम जल अभियान' और 'कैच द रेन' अभियान के तहत शहर की झीलों-तालाबों को पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है, जिसमें एक तालाब भरने पर उसका अतिरिक्त पानी स्वतः अगले तालाब में स्थानांतरित हो जाता है। अब तक 41 झीलें जोड़ी जा चुकी हैं और कुल 90 जल निकायों को इस नेटवर्क में शामिल करने का लक्ष्य है।
इस परियोजना से अहमदाबाद के नागरिकों को क्या फायदा होगा?
परियोजना से वर्षा जल भंडारण क्षमता में लाखों क्यूबिक फीट की वृद्धि होगी, भूजल स्तर बेहतर होगा और शहर में जलभराव कम होगा। इसके अतिरिक्त ये जल निकाय मानसून में नागरिकों के लिए मनोरंजन केंद्र के रूप में भी विकसित होंगे।
परियोजना को कौन-से सरकारी अभियानों का समर्थन मिल रहा है?
यह परियोजना केंद्र सरकार के 'कैच द रेन' अभियान और गुजरात सरकार के 'सुजलाम सुफलाम जल अभियान' के अंतर्गत क्रियान्वित हो रही है। नगर आयुक्त बंछानिधि पाणि के अनुसार केंद्र और राज्य दोनों का वित्तीय सहयोग इस इंटरलिंकिंग स्कीम को मिल रहा है।
परियोजना कब तक पूरी होगी?
एएमसी के चीफ इंजीनियर राकेश बोडीवाला के अनुसार 41 झीलों को जोड़ने का काम पूरा हो चुका है, 32 झीलों पर काम जारी है और 17 झीलों की योजना तैयार है। पूर्ण समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
क्या अहमदाबाद का यह मॉडल दूसरे शहरों के लिए भी अपनाया जा सकता है?
विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार अहमदाबाद की यह इंटरलिंकिंग परियोजना शहरी जल सुरक्षा का एक व्यावहारिक ब्लूप्रिंट है जिसे राज्य और देश के अन्य शहरों में दोहराया जा सकता है। हालाँकि इसकी सफलता दीर्घकालिक रखरखाव और स्वतंत्र निगरानी पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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