15 सितंबर 2026
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असम: चार वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म-हत्या में उत्पल रॉय को मौत की सजा, बिलासिपारा अदालत का फैसला

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असम: चार वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म-हत्या में उत्पल रॉय को मौत की सजा, बिलासिपारा अदालत का फैसला

सारांश

असम के बिलासिपारा की अदालत ने 2023 में चाय बागान में चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या करने के आरोपी उत्पल रॉय को दोषी मानते हुए POCSO अधिनियम के तहत मृत्युदंड सुनाया। घटना के तीन साल बाद आया यह फैसला परिवार के लिए न्याय की जीत है।

मुख्य बातें

बिलासिपारा की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को उत्पल रॉय को मृत्युदंड सुनाया।
दोषी ने सितंबर 2023 में गोलपारा जिले के कृष्णाकाली चाय बागान में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या की थी।
बच्ची के लापता होने के तीन दिन बाद खोजी कुत्ते की मदद से शव बरामद हुआ।
मामला IPC धारा 363(A), 376, 302, 201 और POCSO धारा 6 के तहत दर्ज था।
अभियोजन पक्ष की पैरवी सरकारी वकील तपन भट्ट ने की; दोषी को उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार।

असम के गोलपारा जिले की बिलासिपारा स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को उत्पल रॉय को 2023 में चपर के कृष्णाकाली चाय बागान में चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या का दोषी पाते हुए मृत्युदंड सुनाया। यह फैसला बच्ची की मृत्यु के लगभग तीन वर्ष बाद आया है और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज इस गंभीर मामले में न्यायिक प्रक्रिया की परिणति है।

घटना का पूरा घटनाक्रम

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़ित बच्ची सितंबर 2023 में अपने घर से अचानक लापता हो गई थी। लापता होते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। तीन दिन की खोज के बाद, खोजी कुत्ते की सहायता से कृष्णाकाली चाय बागान के भीतर बच्ची का शव बरामद हुआ।

शव की बरामदगी के समय मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक टीम मौजूद थी और घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि रॉय बच्ची को चाय बागान में ले गया, वहाँ उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और अपराध छिपाने के इरादे से उसकी हत्या कर शव वहीं छोड़ दिया।

मामले की कानूनी कार्यवाही

पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर चपर पुलिस ने मामला संख्या 179/23 दर्ज किया। मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363(A), 376, 302 और 201 के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) की धारा 6 के तहत दर्ज किया गया।

जाँच की शुरुआत पुलिस अधिकारी अर्पणा तालुकदार ने की, जिसे बाद में रंजीत काकाती ने संभाला। अंत में जाँच अधिकारी दीपज्योति इंगती ने अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील तपन भट्ट ने पैरवी की।

अदालत का फैसला

साक्ष्यों की सम्पूर्ण समीक्षा और अभियोजन तथा बचाव दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उत्पल रॉय को दोषी करार दिया। POCSO अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।

गौरतलब है कि यह निर्णय घटना के लगभग तीन वर्ष बाद आया है, जो ऐसे संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई को रेखांकित करता है।

आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देश में नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों को लेकर कड़े दंड की माँग सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर तेज़ होती जा रही है। POCSO अधिनियम के तहत मृत्युदंड का यह फैसला अदालतों द्वारा बच्चों के साथ जघन्य अपराधों में कड़ी सजा सुनाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

बच्ची का परिवार तीन वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में था। न्यायिक प्रणाली की यह परिणति स्थानीय समुदाय के लिए राहत का विषय बताई जा रही है, हालाँकि दोषी के पास उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार शेष है।

आगे क्या होगा

भारतीय कानून के अनुसार, उत्पल रॉय इस फैसले को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है। मृत्युदंड की किसी भी सजा को उच्च न्यायालय की अनिवार्य पुष्टि की आवश्यकता होती है। अदालती प्रक्रिया का अगला चरण उच्च न्यायालय में इस सजा की समीक्षा से तय होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन घटना के तीन वर्ष बाद आया यह निर्णय न्याय प्रदान करने की गति पर सवाल भी उठाता है। बाल यौन उत्पीड़न के मामलों में त्वरित न्यायिक प्रक्रिया की माँग लगातार उठती रही है, फिर भी ऐसे जघन्य अपराधों में वर्षों का इंतजार आम है। मृत्युदंड की यह सजा उच्च न्यायालय की अनिवार्य समीक्षा से गुजरेगी, जहाँ परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन होगा — असली सवाल यह है कि क्या अपीलीय प्रक्रिया भी उतनी ही लंबी खिंचेगी।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्पल रॉय को मौत की सजा क्यों सुनाई गई?
बिलासिपारा की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने उत्पल रॉय को 2023 में गोलपारा जिले के कृष्णाकाली चाय बागान में चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या का दोषी पाया। POCSO अधिनियम की धारा 6 सहित IPC की कई धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।
यह घटना कब और कहाँ हुई थी?
यह घटना सितंबर 2023 में असम के गोलपारा जिले के चपर क्षेत्र स्थित कृष्णाकाली चाय बागान में हुई थी। बच्ची अपने घर से लापता हुई और तीन दिन बाद खोजी कुत्ते की मदद से उसका शव बरामद किया गया।
इस मामले में किन कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चला?
मामला IPC की धारा 363(A) (अपहरण), 376 (दुष्कर्म), 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के साथ POCSO अधिनियम की धारा 6 के तहत दर्ज था। सरकारी वकील तपन भट्ट ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की।
क्या उत्पल रॉय इस फैसले के विरुद्ध अपील कर सकता है?
हाँ, उत्पल रॉय गुवाहाटी उच्च न्यायालय में इस फैसले के विरुद्ध अपील कर सकता है। भारतीय कानून के अनुसार मृत्युदंड की किसी भी सजा की उच्च न्यायालय द्वारा अनिवार्य पुष्टि आवश्यक होती है, इसलिए यह मामला अगले कानूनी चरण में जाएगा।
POCSO अधिनियम के तहत मृत्युदंड का प्रावधान कब से है?
2019 में POCSO अधिनियम में संशोधन कर 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ गंभीर यौन अपराध के मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान जोड़ा गया था। इस प्रावधान का उद्देश्य बाल यौन उत्पीड़न के जघन्य अपराधों पर अधिकतम दंड सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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