जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर 'श्री अरबिंदो यूनिवर्सिटी' करने की माँग, भाजपा विधायक सर्बोरी मुखर्जी ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा विधायक सर्बोरी मुखर्जी ने 3 सितंबर को जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम में माँग की कि इस प्रतिष्ठित संस्थान का नाम बदलकर 'श्री अरबिंदो यूनिवर्सिटी' किया जाए। जाधवपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित इस भाजपा विधायक का तर्क है कि संस्थान को अपने ऐतिहासिक संस्थापक के आदर्शों और विरासत को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
श्री अरबिंदो 'बंगाल नेशनल कॉलेज' के पहले प्राचार्य थे, जो स्वतंत्रता के बाद 'जाधवपुर यूनिवर्सिटी' के रूप में स्थापित हुआ। मुखर्जी का कहना है कि इस ऐतिहासिक संबंध को देखते हुए विश्वविद्यालय का नाम उन्हीं के सम्मान में होना चाहिए।
कार्यक्रम का स्वरूप
यह माँग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और हरिपाडा भारती स्मृति रक्षा समिति द्वारा कैंपस में आयोजित कार्यक्रमों की एक श्रृंखला के दौरान उठाई गई। इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज के साथ मार्च, वंदे मातरम का सामूहिक गायन,著名 विद्वानों की तस्वीरों का प्रदर्शन और वैदिक मंत्रोच्चार शामिल थे।
विधायक के बयान और राजनीतिक संदर्भ
सभा को संबोधित करते हुए सर्बोरी मुखर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने लोगों को राष्ट्रवाद पर खुलकर बोलने और माओवादी व वामपंथी विचारधाराओं का विरोध करने का अवसर दिया है। उन्होंने दावा किया कि हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजे अलग होते तो राज्य में अशांति फैल सकती थी।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, 'सभी हिंदू एकजुट हुए और जीत का झंडा फहराया। अगर (विधानसभा चुनाव के) नतीजे थोड़े अलग होते, तो पूरे पश्चिम बंगाल ने जाधवपुर में नरसंहार देखा होता। मैं यह बात जिम्मेदारी के साथ कह रही हूँ।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो राष्ट्रवाद के खिलाफ बोलेगा, उसका विरोध होता रहेगा।
याचिका की योजना
नाम परिवर्तन की माँग को औपचारिक रूप देने के लिए मुखर्जी ने कहा कि राज्य के उच्च शिक्षा विभाग, मुख्यमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को एक सामूहिक याचिका सौंपी जा सकती है। उन्होंने कहा, 'यह जाधवपुर के लिए गर्व की बात होगी।'
आगे क्या
फ़िलहाल यह माँग एक राजनीतिक मंच से उठाई गई है और इस पर राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी पश्चिम बंगाल के सर्वाधिक चर्चित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और यहाँ का राजनीतिक माहौल अक्सर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनता रहा है।