शिवमोग्गा में हाई कोर्ट सर्किट बेंच के लिए BJP सांसद राघवेंद्र ने राज्यपाल गहलोत से हस्तक्षेप माँगा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शिवमोग्गा सांसद बीवाई राघवेंद्र ने मंगलवार, 23 जून को लोक भवन में कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत से मुलाकात कर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा, जिसमें शिवमोग्गा में कर्नाटक हाई कोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को तत्काल निर्देश देने की अपील की। शिवमोग्गा से चार बार लोकसभा सांसद रहे राघवेंद्र, पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के पुत्र हैं और उन्होंने तर्क दिया कि जिला हर दृष्टि से इस न्यायिक सुविधा के लिए उपयुक्त है।
मुख्य माँग और तर्क
राघवेंद्र ने ज्ञापन में कहा कि शिवमोग्गा में सर्किट बेंच की स्थापना से मलनाड और मध्य कर्नाटक के लाखों नागरिकों के लिए न्याय तक पहुँच सरल, सुविधाजनक और प्रभावी होगी। उन्होंने शिवमोग्गा की मध्य कर्नाटक में एक प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षिक, वाणिज्यिक और परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित भूमिका को रेखांकित किया।
सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बेंच से केवल शिवमोग्गा जिले के नागरिक नहीं, बल्कि चिक्कमगलुरु, दावणगेरे और चित्रदुर्ग जैसे पड़ोसी जिलों के वादी और कानूनी पेशेवर भी लाभान्वित होंगे।
मंगलुरु बेंच के अधिकार क्षेत्र का विरोध
राघवेंद्र ने राज्यपाल को अवगत कराया कि शिवमोग्गा के वकीलों, वादियों और नागरिक समाज संगठनों ने जिले को प्रस्तावित मंगलुरु बेंच के अधिकार क्षेत्र में शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहुँच और सुविधा के दृष्टिकोण से बेंगलुरु स्थित कर्नाटक हाई कोर्ट की प्रधान बेंच शिवमोग्गा के लिए अभी भी सबसे व्यावहारिक न्यायिक केंद्र बनी हुई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक शिवमोग्गा में स्वतंत्र सर्किट बेंच स्थापित नहीं हो जाती, तब तक जिले को बेंगलुरु की प्रधान बेंच के अधिकार क्षेत्र में ही रखा जाए — मंगलुरु बेंच के अंतर्गत नहीं।
हितधारकों का समर्थन
इस ज्ञापन को व्यापक समर्थन मिला है। बैठक के दौरान बेंगलुरु एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सुब्बा रेड्डी भी उपस्थित रहे और उन्होंने सर्किट बेंच की माँग का पुरज़ोर समर्थन किया। राघवेंद्र ने बताया कि यह माँग क्षेत्र के वकीलों, बार एसोसिएशनों और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों द्वारा लंबे समय से उठाई जाती रही है।
आम जनता पर असर
सांसद के अनुसार, शिवमोग्गा में सर्किट बेंच स्थापित होने से वादियों पर मुकदमेबाजी से जुड़ा वित्तीय और समय का बोझ उल्लेखनीय रूप से कम होगा। दूरदराज के मलनाड और मध्य कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को न्याय पाने के लिए बेंगलुरु तक लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी, जिससे न्याय का अधिकार व्यावहारिक रूप से और मज़बूत होगा।
आगे की राह
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब यह देखना होगा कि राजभवन इस अपील पर क्या रुख अपनाता है और क्या कर्नाटक की राज्य सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है। यह मसला न केवल न्यायिक बुनियादी ढाँचे का है, बल्कि मध्य कर्नाटक के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी है।