ब्रिक्स में पहलगाम समेत आतंकवाद की निंदा: गुजरात मंत्री पानसेरिया बोले — भारत की कूटनीतिक जीत
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले सहित विश्व के किसी भी क्षेत्र में होने वाली आतंकवादी घटनाओं और टेरर फंडिंग की सामूहिक निंदा को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा कि यह सफलता केवल सरकार की नहीं, बल्कि समस्त भारतीय नागरिकों की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतिफल है।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने 13 सितंबर 2026 को सूरत में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ देश को आगे ले जा रहे हैं, उसका प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज विश्व के अनेक देश भारत को आर्थिक, मानवीय और वैश्विक नेतृत्व के क्षेत्र में एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
भारत का पक्ष और ब्रिक्स में समर्थन
पानसेरिया ने कहा कि ब्रिक्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत का स्पष्ट और दृढ़ पक्ष रखा। उनके अनुसार, 'आतंकवाद चाहे पहलगाम में हो या विश्व के किसी भी कोने में — ऐसी घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।' उन्होंने रेखांकित किया कि आतंकवाद और उसे मिलने वाले आर्थिक सहयोग के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में आया है जब पहलगाम हमले के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के मुद्दे पर कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा चुका है। गौरतलब है कि ब्रिक्स में टेरर फंडिंग की सामूहिक निंदा भारत की उस रणनीतिक प्राथमिकता को बल देती है, जिसे वह संयुक्त राष्ट्र, जी20 और एससीओ जैसे मंचों पर भी उठाता रहा है।
मंत्री की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय गौरव
पानसेरिया ने कहा, 'भारतीयता के नाते हमें इस बात पर गर्व है कि भारत की आवाज आज वैश्विक मंचों पर मजबूती से सुनी जा रही है और आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के देशों को एकजुट करने में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों ने भारत के इस विचार का समर्थन किया है, जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और भारत की कूटनीतिक दृढ़ता का प्रमाण है।
आम जनता और देश पर असर
ब्रिक्स में यह सहमति भारत के उन नागरिकों के लिए विशेष महत्व रखती है जो पहलगाम हमले से सीधे प्रभावित हुए। आलोचकों का कहना है कि बहुपक्षीय निंदा तब अर्थपूर्ण होती है जब वह ठोस कार्रवाई — जैसे आतंकी वित्तपोषण पर प्रतिबंध और प्रत्यर्पण सहयोग — में परिवर्तित हो। हालाँकि, सरकार समर्थक विशेषज्ञों का मत है कि ब्रिक्स जैसे विविध भू-राजनीतिक हितों वाले मंच पर इस स्तर की सहमति हासिल करना अपने आप में एक उल्लेखनीय कूटनीतिक उपलब्धि है।
क्या होगा आगे
ब्रिक्स सम्मेलन के बाद भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता आगामी अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भी जारी रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेरर फंडिंग पर वैश्विक सहमति को व्यावहारिक तंत्र में बदलना अगली चुनौती होगी, और भारत की कूटनीतिक सफलता की असली परीक्षा इसी में निहित है।