डूसू चुनाव में एनएसयूआई की हार पर बृजभूषण का राहुल गांधी पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 20 सितंबर 2026 को गोंडा में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की हार को कांग्रेस की विचारधारा की विफलता करार दिया। यह बयान इंदौर में आयोजित राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के तुरंत बाद आया है।
डूसू परिणाम को बनाया हथियार
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यदि राहुल गांधी की विचारधारा छात्रों के बीच वाकई प्रभावशाली है, तो उसका असर दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव परिणामों में दिखाई क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा, अभी दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंदर चुनाव हुआ, उनकी एनएसयूआई आउट हो गई।
उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देशभर के छात्र मतदाता हैं और उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को प्राथमिकता दी। भाजपा नेता के अनुसार इसकी वजह यह है कि उनकी विचारधारा में देश सर्वोपरि है।
'छात्रों की गूंज' पर सीधा निशाना
बृजभूषण ने इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर राहुल गांधी पर कहा कि वे केवल समस्याएँ उठाते हैं, समाधान की दिशा में उनके पास कोई रोडमैप नहीं है। उनके शब्दों में, केवल समस्याएँ उठाना आसान है, लेकिन उन्हें समाधान तक ले जाना कठिन होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में स्थापित नेताओं के बयानों को जनता बारीकी से देखती है और हर नेता को अपने आचरण को समझकर बोलना चाहिए।
मंच पर हुई टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति
भाजपा नेता ने 'छात्रों की गूंज' मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उनके परिवार को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बजाय उस टिप्पणी को रोकने के, उस पर हँसते रहे।
बृजभूषण ने कहा, इससे पीएम मोदी का कुछ नहीं बिगड़ता, यह राहुल गांधी का दुर्भाग्य है। उन्होंने अपनी बात को और पुख्ता करते हुए कहा कि यदि वे किसी मंच पर होते और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर कोई अनुचित टिप्पणी होती, तो वे तुरंत माइक थाम कर खेद व्यक्त करते।
संस्कार और परंपरा का उठाया सवाल
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि भारतीय परंपरा में माता को देवी का स्थान दिया जाता है और इस सोच का राहुल गांधी में अभाव है। उनके अनुसार यह न केवल एक राजनीतिक, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों का प्रश्न है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और भाजपा के बीच छात्र राजनीति और युवा वर्ग को लेकर तनातनी बढ़ रही है। डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत को भाजपा युवा वर्ग में अपनी पकड़ के प्रमाण के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' जैसे कार्यक्रम उसी मतदाता वर्ग तक पहुँचने की कोशिश हैं।
आगामी दिनों में यह बयानबाजी और तेज होने की संभावना है क्योंकि दोनों दल छात्र राजनीति के मंच को अपनी राष्ट्रीय आख्यान की नींव बनाने में जुटे हैं।