फ्यूचर रिटेल पर CBI की छापेमारी: ₹904 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में किशोर बियानी समेत अनेक आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुंबई स्थित फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में 6 नवंबर 2026 को मामला दर्ज कर छापेमारी की। आरोपियों में किशोर बियानी और राकेश बियानी समेत कंपनी के प्रबंध निदेशक, कार्यकारी निदेशक, गारंटर तथा अज्ञात लोक सेवक शामिल हैं। यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की 'स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच-III, मुंबई' की शिकायत पर आधारित है।
मामले की पृष्ठभूमि
फ्यूचर रिटेल लिमिटेड वह कंपनी है जो कभी बिग बाजार, फैशन बिग बाजार और फूडहॉल जैसे हाइपरमार्केट और सुपरमार्केट फॉर्मेट के ज़रिए देशभर में खुदरा कारोबार चलाती थी। कंपनी एफएमसीजी और फैशन उत्पादों की जनरल ट्रेडिंग में भी सक्रिय थी। SBI की कमर्शियल ब्रांच, फोर्ट, मुंबई से इसने बड़ी क्रेडिट सुविधाएँ हासिल की थीं।
CBI के अनुसार, आरोपियों ने SBI और 9 अन्य बैंकों के एक समूह से वर्किंग कैपिटल, टर्म लोन और लेटर ऑफ क्रेडिट सहित विभिन्न क्रेडिट सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर आपराधिक साजिश रची। आरोप है कि इन फंड का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए उन्हें स्वीकृत किया गया था।
धोखाधड़ी का तरीका
CBI के बयान के अनुसार, कंपनी ने बैंकों से प्राप्त ऋण राशि को सहयोगी कंपनियों या उससे जुड़ी अन्य इकाइयों में कथित तौर पर स्थानांतरित कर दिया, जिससे शिकायतकर्ता बैंक और समूह के अन्य बैंकों को ₹904.32 करोड़ का नुकसान हुआ। आरोपियों पर धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश रचने के साथ-साथ 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' के तहत अपराध करने का भी आरोप है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में बड़े कॉर्पोरेट ऋण धोखाधड़ी के मामलों पर नियामकीय और जांच एजेंसियों की निगरानी लगातार बढ़ रही है। फ्यूचर रिटेल पहले से ही वित्तीय संकट और कानूनी विवादों में उलझी हुई थी।
छापेमारी और बरामदगी
CBI ने बुधवार को मामला दर्ज करने के बाद शुक्रवार को मुंबई में फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच से संबंधित अहम दस्तावेज़ बरामद कर जब्त किए गए। CBI ने पुष्टि की कि जब्त दस्तावेज़ ऋण राशि के उपयोग और साजिश की व्यापकता की जांच में सहायक होंगे।
आगे की जांच
CBI के अनुसार, साजिश की पूरी गहराई का पता लगाने, इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की पहचान करने और ऋण राशि के अंतिम उपयोग का खुलासा करने के लिए जांच जारी है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि जांच के दायरे में अज्ञात लोक सेवक भी शामिल हैं, जो इस प्रकरण को बैंक-कॉर्पोरेट सांठगांठ की दिशा में ले जाता है।
यह मामला भारतीय रिटेल क्षेत्र के एक प्रमुख समूह के वित्तीय पतन की जांच का नया अध्याय है, और आने वाले हफ्तों में इसमें और गिरफ्तारियाँ या समन जारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।