ट्विशा शर्मा केस: सीसीटीवी इंस्टॉलर विनोद वाणी का खुलासा — सॉफ्टवेयर अपडेट न होने से '2 दिन, 2 घंटे, 20 मिनट' पीछे था सिस्टम
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत की जाँच के दौरान एक अहम बयान सामने आया है। सीसीटीवी इंस्टॉलर विनोद वाणी ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के आवास पर लगा सीसीटीवी सिस्टम '2 दिन, 2 घंटे और 20 मिनट' पीछे चल रहा था — और इसकी वजह कोई छेड़छाड़ नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर का समय पर अपडेट न होना था। वाणी के अनुसार रिकॉर्डिंग पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें लगभग एक टेराबाइट डेटा संग्रहीत है।
मुख्य घटनाक्रम
विनोद वाणी ने बताया कि उन्होंने 2023 में गिरिबाला सिंह के घर पर आठ कैमरों का सीसीटीवी सेटअप लगाया था। 12 मई को हुई घटना के बाद उन्हें एक कॉल आया, लेकिन शुरू में उन्हें घटना की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं था, क्योंकि ऐसे कॉल आमतौर पर चोरी या फुटेज निकालने से जुड़े होते हैं।
13 मई को पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह का फोन आने पर वाणी ने बताया कि वे तुरंत वहाँ नहीं पहुँच सकते। इसलिए उन्होंने अपने स्टाफ सदस्य रोहित विश्वकर्मा को सिस्टम जाँचने के लिए भेजा।
सॉफ्टवेयर समस्या का खुलासा
वाणी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'सीसीटीवी सिस्टम में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई थी। यह सॉफ्टवेयर की समस्या थी। अगर सॉफ्टवेयर समय पर अपडेट किया गया होता, तो यह गड़बड़ी नहीं होती।' उन्होंने यह भी बताया कि रिकॉर्डिंग पूरी है और उसमें करीब एक टेराबाइट डेटा जमा है।
स्टाफ सदस्य रोहित विश्वकर्मा ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जब वे गिरिबाला सिंह के घर पहुँचे, तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहले से मौजूद थे। अधिकारियों के निर्देश पर उन्होंने शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक की फुटेज दिखाई। विश्वकर्मा के अनुसार, समय की यह गड़बड़ी सिस्टम की नियमित सर्विसिंग न होने के कारण हुई।
पुलिस को फुटेज सौंपी गई
वाणी ने बताया कि उनके स्टाफ ने फुटेज पुलिस को सौंप दी। इसके बाद पुलिस ने फुटेज और उपकरण जब्त कर लिए। जब्ती के बाद वाणी को घर पर नया सीसीटीवी सेटअप लगाने के लिए कहा गया, ताकि आगे की किसी भी गतिविधि पर नज़र रखी जा सके। वाणी ने बताया कि दो दिनों बाद नया सेटअप लगाया गया।
जाँच पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब ट्विशा शर्मा की मौत की जाँच कई अहम सवालों के घेरे में है। सीसीटीवी फुटेज के समय में गड़बड़ी को लेकर पहले छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन इंस्टॉलर के बयान ने इस पहलू पर नई रोशनी डाली है। जाँच एजेंसियाँ अब तकनीकी विशेषज्ञों से इस दावे की स्वतंत्र जाँच करा सकती हैं।