टाटा ट्रस्ट को राहत: चैरिटी कमिश्नर ने 1989 के 833 शेयर हस्तांतरण की शिकायत खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने नवलबाई रतन टाटा ट्रस्ट से नवल एच. टाटा को 1989 में टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के 833 शेयरों के हस्तांतरण की जाँच की माँग करने वाली शिकायत को बंद कर दिया है। टाटा ट्रस्ट्स ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस आदेश ने उनके उस रुख को पुष्ट किया है कि उठाए गए आरोप निराधार और दुर्भावनापूर्ण थे।
शिकायत की पृष्ठभूमि
यह शिकायत नवलबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी विजय सिंह ने 10 जून 2026 को एक ईमेल के माध्यम से दर्ज कराई थी। चैरिटी कमिश्नर ने शिकायत में उठाए गए मुद्दों, नवलबाई रतन टाटा ट्रस्ट के जवाब और उससे जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जाँच की। यह मामला तीन दशक से भी पुराने एक कॉर्पोरेट लेनदेन को लेकर था, जो अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बंद हो गया है।
चैरिटी कमिश्नर के मुख्य निष्कर्ष
आदेश में चैरिटी कमिश्नर ने निर्धारित किया कि 1989 में की गई यह बिक्री वैधानिक आवश्यकताओं के कारण संपन्न हुई थी और शेयरों का हस्तांतरण उचित दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत हुआ था। कमिश्नर ने यह भी पाया कि वेल्थ टैक्स आयुक्त द्वारा स्वीकृत मूल्यांकन के आधार पर ट्रस्ट को उचित प्रतिफल मिला था।
गौरतलब है कि इस लेनदेन से ट्रस्ट को लाभ हुआ था, जिसे 31 मार्च 1989 को समाप्त वित्तीय वर्ष की बैलेंस शीट में भी दर्ज किया गया था। शेयरों के हस्तांतरण में यह शर्त रखी गई थी कि इन्हें किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचा जाएगा और ये प्राप्तकर्ता के परिवार में ही बने रहेंगे।
कानूनी अनुपालन की पुष्टि
जाँच में पाया गया कि यह हस्तांतरण उस समय लागू सभी कानूनी प्रावधानों के पूर्ण अनुरूप था। इसी आधार पर चैरिटी कमिश्नर ने निष्कर्ष निकाला कि महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 के तहत इस शेयर हस्तांतरण के संबंध में किसी और जाँच की आवश्यकता नहीं है।
ट्रस्टी विजय सिंह के आचरण पर टिप्पणी
चैरिटी कमिश्नर ने शिकायतकर्ता ट्रस्टी विजय सिंह के आचरण पर भी महत्त्वपूर्ण टिप्पणी की। कमिश्नर ने कहा कि सिंह ने अपना शिकायती ईमेल ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टियों के साथ साझा नहीं किया, जो यह दर्शाता है कि उन्होंने इसे अन्य ट्रस्टियों और पूरे ट्रस्ट से छिपाने का प्रयास किया। कमिश्नर ने इसे नवलबाई रतन टाटा ट्रस्ट के एक ट्रस्टी के अनुरूप आचरण नहीं माना।
टाटा ट्रस्ट्स की प्रतिक्रिया
टाटा ट्रस्ट्स ने इन आरोपों को संस्था की छवि को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से चलाए गए एक सुनियोजित, दुर्भावनापूर्ण और जानबूझकर किए गए अभियान का हिस्सा बताया। यह आदेश टाटा ट्रस्ट्स के लिए एक महत्त्वपूर्ण कानूनी राहत है और यह मामला अब नियामकीय दृष्टि से बंद हो गया है।