कोरवियो कॉइन क्रिप्टो घोटाला: ईडी की चंडीगढ़-मोहाली में छापेमारी, ₹72 लाख जब्त, अतुल सूद गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोरवियो कॉइन (KRO) से जुड़े ₹500 करोड़ के क्रिप्टोकरेंसी घोटाले की जाँच के तहत 28 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़, मोहाली और जीरकपुर में एकसाथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, बैंक रिकॉर्ड और ₹72 लाख नगद जब्त किए गए। ईडी के शिमला उप क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17(1) के अंतर्गत यह तलाशी अभियान चलाया गया।
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
तलाशी के दौरान घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा के करीबी सहयोगी अतुल सूद को गिरफ्तार किया गया। जाँच में सामने आया कि अतुल सूद सुभाष शर्मा से मिलने दुबई गया था और उसके लिए कॉन्फ्रेंस व अन्य कार्यक्रम आयोजित करने में शामिल था। गौरतलब है कि यह गतिविधियाँ मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जारी रहीं। 29 अक्टूबर 2026 को अतुल सूद को शिमला की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 5 नवंबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया।
घोटाले का तरीका: पोंजी मॉडल पर आधारित MLM योजना
ईडी के अनुसार, सुभाष शर्मा ने अपने सहयोगियों हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और अन्य के साथ मिलकर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) योजना संचालित की। निवेशकों को उच्च रिटर्न का आश्वासन देकर कोरवियो कॉइन में निवेश के लिए प्रेरित किया गया। यह योजना पोंजी मॉडल पर चलती थी, जिसमें नए निवेशकों के धन से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था।
बरामद डिजिटल डेटा से पता चला कि 24 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इस धोखाधड़ी से प्रभावित हुए और इसमें 219 मिलियन डॉलर से अधिक के लेनदेन शामिल थे, जिससे निवेशकों को लगभग ₹500 करोड़ का नुकसान हुआ।
धन के लेनदेन का जाल
जाँच में सामने आया कि निवेशकों से जुटाई गई अधिकांश धनराशि नगद में प्राप्त हुई और टीम नेताओं के माध्यम से अंततः सुभाष शर्मा तथा उनके सहयोगियों विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा तक पहुँचाई गई। धन के एक हिस्से का उपयोग अचल संपत्तियों की खरीद में हुआ, जिसमें बड़ी रकम नगद दी गई और पंजीकृत मूल्य वास्तविक मूल्य से काफी कम रखे गए। स्रोत और लेनदेन छिपाने के लिए कुछ राशि को फर्जी फर्मों, बिचौलियों और बैंक खातों के माध्यम से भेजकर आंशिक रूप से क्रिप्टोकरेंसी में भी परिवर्तित किया गया।
पूर्व कार्रवाइयाँ और पहले से गिरफ्तार आरोपी
यह ईडी की इस मामले में तीसरी बड़ी तलाशी है। इससे पहले 13 दिसंबर 2025 और 15 जून 2026 को भी छापेमारी हो चुकी है, जिनमें आपत्तिजनक दस्तावेजों व डिजिटल उपकरणों के साथ ₹1.5 करोड़ की चल संपत्ति जब्त की गई थी। इससे पहले सुभाष शर्मा के सहयोगियों हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा, मिलन गर्ग और मासूम जुनेजा को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके विरुद्ध आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र शिमला की विशेष अदालत में दाखिल किए जा चुके हैं। ईडी की जाँच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
मास्टरमाइंड अब भी फरार
इस पूरे घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा हजारों निवेशकों को ठगने के बाद दुबई भाग गए हैं। ईडी ने सक्षम अधिकारियों के समक्ष उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। जाँच एजेंसी के अनुसार फरार आरोपी तक पहुँचने के प्रयास जारी हैं और आने वाले समय में और कार्रवाई की संभावना है।