18 सितंबर 2026
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दिल्ली पुलिस का 'शिष्टाचार' एंटी-ईव टीजिंग स्क्वॉड होगा और मजबूत, सभी जिलों में हॉटस्पॉट मैपिंग के निर्देश

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दिल्ली पुलिस का 'शिष्टाचार' एंटी-ईव टीजिंग स्क्वॉड होगा और मजबूत, सभी जिलों में हॉटस्पॉट मैपिंग के निर्देश

सारांश

दिल्ली पुलिस का 'शिष्टाचार' स्क्वॉड अब सिर्फ नाम नहीं रहेगा — PHQ में हुई उच्चस्तरीय बैठक में हॉटस्पॉट मैपिंग, डिकॉय ऑपरेशन और RWA भागीदारी के साथ इसे व्यवस्थित रूप दिया जा रहा है। राजधानी में महिला सुरक्षा को लेकर यह एहतियाती पुलिसिंग की दिशा में ठोस कदम है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 18 सितंबर 2026 को PHQ में उच्चस्तरीय बैठक कर 'शिष्टाचार' एंटी-ईव टीजिंग स्क्वॉड को मजबूत करने का निर्णय लिया।
सभी जिलों के DCP को संवेदनशील स्थानों की नियमित हॉटस्पॉट मैपिंग करने के निर्देश दिए गए।
अपराधियों को पकड़ने के लिए सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों को 'डिकॉय' के रूप में तैनात किया जाएगा।
बसों व सार्वजनिक वाहनों में औचक निरीक्षण और यात्रियों से संवाद को अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा।
RWA, MWA और स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ सहयोग बढ़ाकर सामुदायिक सतर्कता को मजबूत किया जाएगा।
स्क्वॉड कर्मियों के लिए संवेदनशीलता और सहानुभूति को अनिवार्य मानदंड बनाया गया है।

दिल्ली पुलिस ने 18 सितंबर 2026 को सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और उत्पीड़न पर लगाम लगाने के लिए अपने 'शिष्टाचार' एंटी-ईव टीजिंग स्क्वॉड को व्यापक रूप से पुनर्गठित करने का निर्णय लिया। पुलिस मुख्यालय (PHQ) के विमर्श हॉल में महिला एवं बाल विशेष पुलिस इकाई (SPUWAC) के स्पेशल कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सभी जिलों के उपायुक्त (DCP) को ठोस निर्देश दिए गए। यह कदम ऐसे समय में आया है जब राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में महिला सुरक्षा को लेकर बहस जारी है।

बैठक में क्या तय हुआ

बैठक में स्पष्ट किया गया कि जिलावार शिष्टाचार स्क्वॉड को अधिक संसाधन और कार्यबल उपलब्ध कराकर सुदृढ़ किया जाएगा। संवेदनशील और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में इन दलों की उपस्थिति बढ़ाई जाएगी। स्क्वॉड को विशेष रूप से सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के विरुद्ध होने वाले छोटे-मोटे अपराधों की रोकथाम, हस्तक्षेप और तत्काल कार्रवाई के लिए समर्पित दल के रूप में तैयार किया जाना है।

सभी DCP को अपने-अपने जिलों में संवेदनशील स्थानों की नियमित पहचान और मैपिंग करने का निर्देश दिया गया, ताकि कवरेज व्यवस्थित और समयानुकूल हो सके। तैनाती में नियमित फेरबदल का प्रावधान भी रखा गया है।

रणनीतिक तरीके और 'डिकॉय' ऑपरेशन

अधिकारियों ने बताया कि स्क्वॉड को रोकथाम, हस्तक्षेप और पीड़ित सहायता — तीनों स्तरों पर काम करना होगा। आवश्यकता पड़ने पर सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों को 'डिकॉय' के रूप में तैनात किया जाएगा, जिससे अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में सुविधा होगी। यह तरीका पहले भी दिल्ली में सीमित स्तर पर आज़माया जा चुका है, लेकिन अब इसे व्यापक पैमाने पर लागू किया जाएगा।

सार्वजनिक परिवहन को विशेष फोकस में रखा गया है। स्क्वॉड को बसों और अन्य सार्वजनिक वाहनों में औचक निरीक्षण करने, चालकों, परिचालकों और यात्रियों से संवाद कर बारंबार समस्या उत्पन्न करने वालों की पहचान करने और घटनाओं की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने की सलाह दी गई।

सामुदायिक भागीदारी पर जोर

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), महिला कल्याण संघ (MWA) और स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना भी बैठक में सामने आई। उद्देश्य है कि संवेदनशील स्थानों की पहचान में नागरिकों की भूमिका हो और सामुदायिक सतर्कता मजबूत हो। गौरतलब है कि पुलिस और समाज के बीच इस तरह का समन्वय महिला सुरक्षा अभियानों में पहले भी कारगर रहा है।

कर्मियों के चयन के मानदंड

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिष्टाचार स्क्वॉड में शामिल कर्मी संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और स्वप्रेरित होने चाहिए। स्क्वॉड को सख्ती से कानून लागू करने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पीड़ितों को अनावश्यक सार्वजनिक जांच या शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े — यह पहलू इस अभियान को मात्र दंडात्मक कार्रवाई से अलग बनाता है।

आगे की राह

पुलिस के अनुसार, 'शिष्टाचार' पहल का व्यापक उद्देश्य केवल कानून का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि निरंतर एहतियाती पुलिसिंग, नागरिक जुड़ाव और तत्काल कार्रवाई के माध्यम से महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सार्वजनिक माहौल तैयार करना है। सभी जिलों के DCP को स्क्वॉड के कामकाज की बारीकी से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले हफ्तों में इन दलों की परिचालन प्रभावशीलता की समीक्षा की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर ऐसी घोषणाएँ पहले भी हुई हैं जो ज़मीन पर टिकी नहीं। डिकॉय ऑपरेशन और हॉटस्पॉट मैपिंग सैद्धांतिक रूप से प्रभावी हैं, पर इनकी सफलता कर्मियों की संख्या, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और जवाबदेही तंत्र पर निर्भर करेगी। सामुदायिक भागीदारी का जोर सकारात्मक है, किंतु RWA और MWA की भूमिका की सीमाएँ स्पष्ट करना ज़रूरी है ताकि निगरानी की आड़ में गोपनीयता हनन न हो। पीड़ितों को शर्मिंदगी से बचाने का संकल्प तभी सार्थक होगा जब शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को वास्तव में सरल और भरोसेमंद बनाया जाए।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस का 'शिष्टाचार' एंटी-ईव टीजिंग स्क्वॉड क्या है?
'शिष्टाचार' दिल्ली पुलिस का एंटी-ईव टीजिंग दल है जो सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और उत्पीड़न की रोकथाम के लिए गठित है। इसे जिलेवार तैनात किया जाता है और अब इसे व्यापक पुनर्गठन के साथ और मजबूत बनाया जा रहा है।
18 सितंबर 2026 की बैठक में क्या मुख्य निर्देश दिए गए?
बैठक में सभी जिलों के DCP को हॉटस्पॉट मैपिंग, नियमित गश्त, सार्वजनिक वाहनों में औचक निरीक्षण और RWA-MWA के साथ सहयोग बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, डिकॉय ऑपरेशन के लिए सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती को भी मंजूरी दी गई।
डिकॉय ऑपरेशन किस प्रकार काम करेगा?
इस तरीके में सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मी आम नागरिक की तरह सार्वजनिक स्थलों पर तैनात रहेंगी ताकि उत्पीड़न करने वालों की पहचान और तत्काल गिरफ्तारी की जा सके। यह रणनीति मुख्यतः उन इलाकों में अपनाई जाएगी जहाँ छेड़छाड़ की घटनाएँ अधिक होती हैं।
इस पहल से आम महिलाओं को क्या फायदा होगा?
स्क्वॉड के मजबूत होने से भीड़-भाड़ वाले इलाकों, बसों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की दृश्य उपस्थिति बढ़ेगी, जिससे उत्पीड़न की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। पीड़ितों को तत्काल सहायता और शर्मिंदगी से बचाने का भी प्रावधान रखा गया है।
SPUWAC क्या है और इसकी इस अभियान में क्या भूमिका है?
SPUWAC यानी महिला एवं बाल विशेष पुलिस इकाई (Special Police Unit for Women and Children) दिल्ली पुलिस का वह प्रकोष्ठ है जो महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों पर विशेष ध्यान देता है। इसी इकाई के स्पेशल कमिश्नर ने 18 सितंबर की बैठक की अध्यक्षता की और 'शिष्टाचार' स्क्वॉड के पुनर्गठन का नेतृत्व किया।
राष्ट्र प्रेस
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