दिल्ली विधानसभा में साइकिल खरीद विवाद: 'आप' विधायक निष्कासित, ₹70 करोड़ की अनियमितता का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विधानसभा में सोमवार, 10 अगस्त को स्कूली बच्चों के लिए साइकिल खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर तीखा हंगामा हुआ। आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने इस मामले पर सदन में चर्चा की माँग की, जिसे अनुमति न मिलने पर विरोध बढ़ा और अंततः कई 'आप' विधायकों को सदन से बाहर निकाल दिया गया। पार्टी ने इसे विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश करार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
'आप' विधायक दल के चीफ व्हीप संजीव झा ने विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष कथित घोटालों पर चर्चा कराने के बजाय सरकार का पक्ष ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'आप' विधायकों ने नियम 55 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा की माँग रखी थी, लेकिन विधायक कुलदीप कुमार, सोमदत्त और प्रेम चौहान सहित अन्य विधायकों को बोलने का अवसर नहीं दिया गया और विरोध करने पर उन्हें सदन से बाहर कर दिया गया।
कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप
संजीव झा के अनुसार, बाज़ार में लगभग ₹4,000 में उपलब्ध साइकिल को सरकार ने करीब ₹7,000 प्रति साइकिल की दर से खरीदा। उनका दावा है कि कुल 1 लाख 30 हजार साइकिलों की खरीद में प्रति साइकिल लगभग ₹3,000 का अंतर है, जिससे कथित तौर पर ₹70 करोड़ की वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है। हालाँकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
संजीव झा ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, साइकिल निर्माता कंपनी हीरो ने भी टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था, लेकिन ठेका सीधे निर्माता को न देकर एक व्यापारी को दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि जब एक निर्माता कंपनी खुद टेंडर में शामिल हो, तो एक बिचौलिया व्यापारी उससे सस्ता टेंडर कैसे दे सकता है। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर जारी होने से पहले अनिवार्य प्री-बिड मीटिंग भी नहीं आयोजित की गई, जो प्रक्रिया की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। यह भी कहा गया कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल एक बोलीदाता ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें टेंडर की तय राशि को ही गलत बताया गया था।
विपक्ष की जाँच की माँग
तिलक नगर से 'आप' विधायक जरनैल सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि साइकिल निर्माता से सीधे खरीद करने के बजाय एक डीलर के माध्यम से खरीद किए जाने से कीमत बढ़ने की आशंका स्वाभाविक है। जरनैल सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि कथित अनियमितताओं के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस या केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। 'आप' नेताओं ने माँग की है कि साइकिल खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच कराई जाए और विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत बहस हो।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच विधानसभा में टकराव का सिलसिला जारी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रश्नकाल को लेकर 'आप' विधायक आपत्ति जता चुके हैं। साइकिल खरीद मामले में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और किसी स्वतंत्र जाँच के आदेश पर सभी की नज़रें टिकी हैं।