वारिस पठान बोले — दिशा सालियान केस को राजनीतिक रंग न दें, यूसीसी संविधान के खिलाफ
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 15 सितंबर 2026 को मुंबई में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने दिशा सालियान मामले में सीबीआई की एफआईआर को लेकर मीडिया ट्रायल और अटकलों से बचने की अपील की, तथा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को संविधान प्रदत्त अधिकारों के विरुद्ध बताया। इसके अलावा उन्होंने मराठा आरक्षण, यूपीआई शुल्क विवाद, राजस्थान निकाय चुनाव और पाकिस्तान की आतंकवाद नीति पर भी अपनी राय साझा की।
दिशा सालियान मामला: जांच पर भरोसा, राजनीति से परहेज की अपील
वारिस पठान ने कहा कि दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान पिछले छह वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और शुरुआत से ही उनका दावा रहा है कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की है और पिता का बयान दर्ज किया है। पठान ने कहा कि शिकायत में जिन लोगों के नाम हैं, उनकी भूमिका की जांच एजेंसी करेगी और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई को यह भी खंगालना होगा कि पूर्व में क्लोजर रिपोर्ट किस आधार पर दाखिल की गई थी और किन साक्ष्यों को तब नजरअंदाज किया गया था। उनके अनुसार, जब सीबीआई अपनी रिपोर्ट या चार्जशीट अदालत में रखेगी, तब ही तस्वीर साफ होगी। पठान ने मीडिया ट्रायल से बचने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने पर जोर दिया।
समान नागरिक संहिता पर कड़ा विरोध
पठान ने यूसीसी को भारत के संविधान के तहत दिए गए अधिकारों के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और बहुलतावादी संस्कृति से है और अलग-अलग धर्मों, रीति-रिवाजों वाले समाज को एक ही कानूनी ढाँचे में नहीं बांधा जा सकता। उनके अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए मुस्लिम समुदाय पर एक विशेष धार्मिक कानून थोपने की कोशिश की जा रही है।
पठान ने अलग-अलग राज्यों में प्रचलित कानूनों और प्रथाओं का उदाहरण देते हुए यूसीसी की तथाकथित 'यूनिफॉर्मिटी' पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि AIMIM आगे भी यूसीसी का विरोध जारी रखेगी और कानून बनाते समय सभी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
मराठा आरक्षण और मुस्लिम पिछड़े वर्गों की मांग
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा मुंबई मार्च की तारीख घोषित किए जाने पर पठान ने कहा कि AIMIM ने हमेशा मराठा आरक्षण का समर्थन किया है। उनके अनुसार, मराठा समाज के साथ-साथ धनगर समाज और मुस्लिम समाज के सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने सच्चर कमेटी और अन्य रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुस्लिम पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की मांग दोहराई।
यूपीआई शुल्क, पाकिस्तान और अन्य मुद्दे
₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की प्रस्तावित व्यवस्था पर पठान ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब लोग डिजिटल भुगतान पर निर्भर हो चुके हैं, तब शुल्क लगाना आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और इससे सरकार पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर पाकिस्तान द्वारा इनाम घोषित किए जाने को पठान ने महज दिखावा बताया। उन्होंने पुलवामा, 26/11 और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और सख्त कार्रवाई की मांग की।
राजस्थान निकाय चुनाव में AIMIM के दो उम्मीदवारों की जीत पर पठान ने इसे पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) नेता हनुमान बेनीवाल की पार्टी के साथ गठबंधन में यह सफलता मिली और उत्तर प्रदेश में भी आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में एक महिला आईएएस अधिकारी के तबादले के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 'अस्सलाम वालेकुम' और 'इंशाअल्लाह' जैसे शब्द सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ हैं और इन पर आपत्ति 'नफरत की राजनीति' है। संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में यूसीसी, आरक्षण और धार्मिक अभिव्यक्ति से जुड़े मुद्दे तेजी से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में AIMIM का रुख इन मुद्दों पर और स्पष्ट होने की संभावना है।