ईसीआई नोटिस पर कांग्रेस का पलटवार: खड़गे की 'आतंकवादी' टिप्पणी विवाद में विपक्ष ने लगाया एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

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ईसीआई नोटिस पर कांग्रेस का पलटवार: खड़गे की 'आतंकवादी' टिप्पणी विवाद में विपक्ष ने लगाया एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

सारांश

चुनाव आयोग के नोटिस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए ED-CBI के दुरुपयोग का आरोप लगाया। खड़गे की 'आतंकवादी' टिप्पणी विवाद में सपा ने भी चुनाव आयोग पर चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया। यह विवाद लोकसभा चुनाव 2024 के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

Key Takeaways

  • भारतीय चुनाव आयोग ने बुधवार, 23 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 24 घंटे में जवाब देने का नोटिस जारी किया।
  • विवाद चेन्नई में मंगलवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़गे द्वारा पीएम मोदी के संदर्भ में 'आतंकवादी' शब्द के इस्तेमाल से शुरू हुआ।
  • कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल विपक्ष को डराने के लिए किया जा रहा है।
  • कांग्रेस नेता उदित राज ने भाजपा पर 'मनुवादी मानसिकता' का आरोप लगाया और बंगारू लक्ष्मण का उदाहरण दिया।
  • सपा नेता एसटी हसन ने चुनाव आयोग पर 'चुनिंदा कार्रवाई' का आरोप लगाते हुए बंगाल में भड़काऊ बयानों पर कार्रवाई न होने का जिक्र किया।
  • खड़गे ने पहले ही सफाई दी थी कि उनके बयान का 'गलत अर्थ निकाला गया' — उनका जवाब चुनाव आयोग को भेजा जाना अभी बाकी है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल: भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को उनकी कथित 'आतंकवादी' टिप्पणी पर नोटिस जारी किए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को तीखा पलटवार किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि ईडी, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब देश में लोकसभा चुनाव 2024 अपने चरम पर हैं।

विवाद की जड़: चेन्नई प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ?

यह पूरा मामला मंगलवार को चेन्नई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ। खड़गे ने एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में 'आतंकवादी' शब्द का इस्तेमाल किया। इस बयान के वायरल होते ही राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया।

बुधवार को भारतीय चुनाव आयोग ने इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए खड़गे से 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, खड़गे ने पहले ही सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान का 'गलत अर्थ निकाला गया' था।

कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा, "खड़गे का मतलब बिल्कुल वह नहीं था जो भाजपा बता रही है। जिस तरह पीएम मोदी ने ईडी, सीबीआई और दूसरी एजेंसियों को हथियार बनाया है, उससे विपक्ष को डराने का काम हो रहा है।"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदित राज ने इस नोटिस को भाजपा की 'मनुवादी मानसिकता' से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे दलित समुदाय से आने वाले देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष हैं और भाजपा यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही।

उदित राज ने भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का हवाला देते हुए कहा, "भाजपा ने अपने ही दलित अध्यक्ष को बदनाम किया, जेल भिजवाया और उनकी जिंदगी तबाह की। यह नोटिस चुनाव आयोग ने नहीं, भाजपा ने भेजा है — अब दोनों में कोई फर्क नहीं रहा।"

समाजवादी पार्टी की मिली-जुली प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी को भी अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, चाहे वह किसी भी नीति से असहमत हो। प्रधानमंत्री पर निजी टिप्पणी करना उचित नहीं है।

हालांकि, सपा नेता एसटी हसन ने चुनाव आयोग पर 'चुनिंदा कार्रवाई' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में जिन नेताओं ने खुलेआम भड़काऊ बयान दिए, उनके खिलाफ आज तक कोई नोटिस नहीं आया।

एसटी हसन ने यह भी स्पष्ट किया कि खड़गे ने पीएम मोदी को 'आतंकवादी' नहीं कहा, बल्कि कहा कि वे 'एक आतंकवादी की तरह बर्ताव करते हैं' — और इसमें कोई चौंकाने वाली बात नहीं है।

गहरा विश्लेषण: क्या यह महज बयानबाजी है या बड़ी राजनीतिक रणनीति?

यह विवाद केवल एक शब्द तक सीमित नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह कम से कम तीसरी बार है जब ईसीआई ने विपक्षी नेताओं को नोटिस जारी किए हैं। आलोचकों का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई में असंतुलन दिखता है — विपक्षी नेताओं पर तत्काल नोटिस, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं के विवादित बयानों पर अपेक्षाकृत ढील।

गौरतलब है कि बंगारू लक्ष्मण प्रकरण का जिक्र करते हुए उदित राज ने एक पुरानी राजनीतिक चोट को ताजा किया — लक्ष्मण पहले दलित भाजपा अध्यक्ष थे जिन्हें 2003 में रिश्वत मामले में दोषी ठहराया गया था। यह संदर्भ कांग्रेस की उस रणनीति को उजागर करता है जिसमें वह दलित मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा दलित नेतृत्व को स्वीकार नहीं करती।

आने वाले दिनों में खड़गे का लिखित जवाब और ईसीआई की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि यह मामला चुनावी प्रचार पर कितना असर डालता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पूरा विवाद दोनों पक्षों के लिए मतदाताओं को लामबंद करने का अवसर बन गया है।

Point of View

लेकिन सत्तापक्ष के भड़काऊ बयानों पर मौन रहता है — तो यह असंतुलन लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है। उदित राज का बंगारू लक्ष्मण वाला संदर्भ यह बताता है कि कांग्रेस इस विवाद को दलित राजनीति के चश्मे से लड़ना चाहती है — जो चुनावी गणित में निर्णायक हो सकता है। मुख्यधारा की मीडिया जहां 'आतंकवादी' शब्द पर अटकी है, असली कहानी वहां है जहां चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता दांव पर लगी है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

खड़गे ने 'आतंकवादी' टिप्पणी कब और कहां की थी?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी के संदर्भ में 'आतंकवादी' शब्द का इस्तेमाल किया था। बाद में उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया।
चुनाव आयोग ने खड़गे को नोटिस क्यों भेजा?
भारतीय चुनाव आयोग ने बुधवार को खड़गे की टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा। आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का संभावित उल्लंघन माना।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के नोटिस पर क्या कहा?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह नोटिस दरअसल भाजपा की ओर से भेजा गया है और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को डराने के लिए हो रहा है। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का भी आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अपशब्दों के इस्तेमाल को गलत बताया, जबकि सपा नेता एसटी हसन ने चुनाव आयोग पर चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया। हसन ने कहा कि बंगाल में भड़काऊ बयान देने वालों पर आज तक कोई नोटिस नहीं आया।
क्या खड़गे ने सच में पीएम मोदी को आतंकवादी कहा था?
खड़गे और उनके समर्थकों के अनुसार उन्होंने पीएम मोदी को 'आतंकवादी' नहीं कहा, बल्कि कहा कि वे 'एक आतंकवादी की तरह बर्ताव करते हैं।' खड़गे ने खुद कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया।
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