ईडी की जयपुर में छापेमारी: पादरी रवि मोहन पहाड़िया पर ₹2.88 करोड़ की अवैध विदेशी फंडिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर जोनल ऑफिस ने 22 अगस्त 2025 को जयपुर में दो ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (फेमा) के प्रावधानों के तहत की गई, जो एफसीआरए पंजीकरण के बिना और घोषित उद्देश्य से भिन्न कार्यों के लिए ₹2 करोड़ से अधिक की विदेशी फंडिंग के कथित दुरुपयोग से संबंधित है। ईडी ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस पूरी कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया।
मामले की पृष्ठभूमि
जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला प्रोटेस्टेंट मिशनरी पादरी रवि मोहन पहाड़िया और मुख्य रूप से अमेरिका के निवासी थॉमस यूजीन लिंच से जुड़ा है। खुफिया सूचना के आधार पर शुरू की गई जांच में सामने आया कि पहाड़िया कथित तौर पर धर्म परिवर्तन और प्रचार-प्रसार की गतिविधियों के लिए लिंच से गैर-कानूनी तरीके से लगभग ₹2.20 करोड़ की विदेशी फंडिंग प्राप्त कर रहे थे। ये गतिविधियाँ जयपुर में एससी-वाल्मीकि समुदाय और दक्षिण राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में एसटी-भील समुदाय के बीच संचालित की जा रही थीं।
फंडिंग का स्वरूप और कथित छद्म
जांच में पता चला कि रवि मोहन पहाड़िया और उनकी पत्नी गुंजन शर्मा को मिलाकर कुल लगभग ₹2.34 करोड़ की विदेशी फंडिंग प्राप्त हुई। ईडी के अनुसार, यह धनराशि कथित तौर पर बिजनेस और मैनेजमेंट कंसल्टेंसी, पब्लिक रिलेशन सर्विस तथा परिवार के भरण-पोषण एवं बचत के लिए अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से प्राप्त इनवर्ड रेमिटेंस के रूप में दर्शाई गई थी। इस राशि का बड़ा हिस्सा अमेरिका निवासी थॉमस ई. लिंच से प्राप्त बताया गया है।
छापेमारी में क्या मिला
तलाशी अभियान के दौरान ईडी अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए। जांच में यह भी सामने आया कि पहाड़िया ने एफसीआरए की मंजूरी के बिना और उद्देश्य छुपाकर दान के रूप में कुल ₹2.88 करोड़ की विदेशी फंडिंग हासिल की। ईडी के अनुसार, इस राशि का उपयोग कथित तौर पर निजी खर्चों, विदेश यात्राओं और अपने नाम पर संपत्ति खरीदने में किया गया।
व्यापक गतिविधियों का आरोप
शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि पहाड़िया विदेशी नागरिकों के नियमित संपर्क में थे और उनके निर्देश पर अलग-अलग राज्यों में वंचित व आदिवासी वर्गों के बीच धर्म परिवर्तन और प्रचार-प्रसार के लिए बैठकें और धार्मिक सभाएँ आयोजित करते रहे। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार एफसीआरए उल्लंघनों के मामलों में सख्ती बरत रही है और कई संगठनों के विदेशी अनुदान लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि फेमा, 1999 के तहत जांच जारी है। जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।