ईडी की जैसलमेर में छापेमारी: बेल्जियम की संस्था से ₹5.10 करोड़ के FCRA उल्लंघन का मामला
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 सितंबर 2026 को राजस्थान के जैसलमेर जिले में दो ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बेल्जियम की संस्था से प्राप्त कथित ₹5.10 करोड़ के विदेशी फंड के दुरुपयोग के सिलसिले में की गई, जिसे 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' (FCRA) के तहत अनिवार्य पंजीकरण के बिना हासिल किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस फंड का इस्तेमाल कमज़ोर वर्गों को सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से प्रभावित करने के लिए किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
जांच एजेंसी को खुफिया सूचना मिली थी कि जैसलमेर निवासी देउ राम को बेल्जियम की संस्थाओं से लगातार विदेशी रेमिटेंस प्राप्त हो रहा था। ईडी के अनुसार, देउ राम और उनके सहयोगी ज्ञान चंद ने मिलकर यह धनराशि प्राप्त की और इसे शिक्षा एवं समाज कल्याण के कार्यों की आड़ में उपयोग किया गया। जांच में 'फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट' (FEMA) 1999 के तहत कार्रवाई की गई।
ब्रुसेल्स की संस्था 'अमर एएसबीएल' की भूमिका
ईडी के अनुसार, प्राप्त विदेशी फंड का एक बड़ा हिस्सा ब्रुसेल्स स्थित गैर-लाभकारी संस्था 'अमर एएसबीएल' से आया था, जिसकी स्थापना 2011 में हुई थी। इस संस्था का संचालन बेल्जियम के नागरिक जोस गोफिनेट और उनके बेटे सालियन गोफिनेट द्वारा किया जाता है। गौरतलब है कि यह संस्था केवल जैसलमेर में ही सक्रिय थी, फिर भी इसने भारत में कोई ट्रस्ट या एनजीओ पंजीकृत नहीं कराया।
आरोप है कि 14-15 वर्षों से यह संस्था देउ राम और ज्ञान चंद के माध्यम से भारत में अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रही थी। जोस और सालियन गोफिनेट हर वर्ष जैसलमेर आते थे, लाभार्थी बच्चों के परिवारों से मुलाकात करते थे, और बैठकें तथा धार्मिक सभाएँ आयोजित करते थे।
धन के दुरुपयोग के आरोप
ईडी का आरोप है कि ₹5.10 करोड़ का यह विदेशी फंड कई मकसद-कोड के तहत भेजा गया — जैसे परिवार का भरण-पोषण, शैक्षिक सेवाएँ, सांस्कृतिक एवं मनोरंजक सेवाएँ, कमीशन एजेंट सेवाएँ और कर्मचारियों का वेतन — जबकि बेल्जियम की संस्था को वास्तव में ऐसी कोई सेवा नहीं दी गई थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, संबंधित बैंक खातों से लगभग ₹2.60 करोड़ निकाले गए और विदेशी फंड प्राप्ति व उसके उपयोग का कोई वैध वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा गया। आरोप है कि फंड का एक हिस्सा निजी खर्चों में भी लगाया गया, जबकि शेष राशि का उपयोग कमज़ोर समुदायों की सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित करने के लिए किया गया।
तलाशी में मिले साक्ष्य
तलाशी अभियान के दौरान अधिकारियों को कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद हुए। ईडी ने यह भी बताया कि जब बैंकों ने देउ राम और ज्ञान चंद के खातों में विदेशी रेमिटेंस स्वीकार करना बंद किया, तो जैसलमेर में अन्य सहयोगियों के व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से धन भेजने का प्रयास किया गया।
आगे की जांच
एजेंसी के अनुसार इस मामले में आगे की जांच जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार विदेशी फंडिंग पर निगरानी को लेकर पहले से सख्त रुख अपना रही है। FCRA उल्लंघन के इस प्रकार के मामलों में ईडी की सक्रियता भविष्य में इस श्रेणी की जांच की दिशा तय कर सकती है।