दिल्ली पुलिस ने फर्जी शादी रैकेट का भंडाफोड़ किया, पति-पत्नी सहित तीन गिरफ्तार; पीड़ित से ₹6 लाख की ठगी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 2 जुलाई 2026 को एक सुनियोजित फर्जी शादी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो शादीशुदा महिलाओं को कुंवारी बताकर भोले-भाले पुरुषों से मोटी रकम ठगते थे। ख्याला थाना क्षेत्र से संचालित इस मामले में पीड़ित श्रवण वैष्णव, जो राजस्थान के जालौर के निवासी हैं, से ₹6 लाख की धोखाधड़ी की गई।
मामला कैसे सामने आया
यह प्रकरण तब उजागर हुआ जब 18 जून 2026 को ख्याला थाने में लवली उर्फ ललिता नाम की एक महिला के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने जाँच के लिए एक विशेष टीम गठित की, जिसने तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचना-तंत्र की मदद से पता लगाया कि वह महिला राजस्थान के पाली जिले में छिपी हुई है। टीम ने तत्परता से तखतगढ़ पुलिस स्टेशन पहुँचकर उसे बरामद किया।
रैकेट का तरीकाकार
पूछताछ में लवली उर्फ ललिता ने खुलासा किया कि उसकी शादी 18 साल पहले कमल लोहरा से हो चुकी है और दोनों के चार बच्चे हैं। इसके बावजूद, गिरोह ने उसे कुंवारी महिला बताकर 1 जून 2026 को जालौर निवासी श्रवण वैष्णव से उसकी फर्जी शादी करवाई। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने पीड़ित से ₹6 लाख वसूले और आपस में बाँट लिए। योजना यह थी कि शादी के बाद ससुराल से नकदी और कीमती सामान लेकर फरार हो जाएँ।
आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे शादीशुदा महिलाओं को दुल्हन के रूप में पेश करके कुंवारे पुरुषों को निशाना बनाते थे, शादी के नाम पर धन एकत्र करते थे और बाद में भागने की योजना बनाते थे।
गिरफ्तार आरोपी
पीड़ित की शिकायत और जाँच में मिले साक्ष्यों के आधार पर 29 जून 2026 को ख्याला थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया — लवली उर्फ ललिता और उसके पति कमल लोहरा (दोनों झारखंड के गुमला के निवासी), तथा दीपू उर्फ राकेश एक्का (दिल्ली के रघुबीर नगर के निवासी)। गिरोह के अन्य सदस्यों — अंकित वर्मा, दीपिका और गोपाल — की तलाश अभी जारी है।
आगे की जाँच
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह जाँच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या यह गिरोह दूसरे राज्यों में भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी को अंजाम दे चुका है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। यह मामला इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि अंतर-राज्यीय विवाह धोखाधड़ी के मामलों में समन्वित पुलिस कार्रवाई कितनी ज़रूरी है।