हाइड्रोजन ट्रेन खराब होने का वायरल दावा झूठा, लोको पायलट और भारतीय रेलवे ने किया खंडन
सारांश
मुख्य बातें
देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा वायरल दावा भ्रामक निकला है। भारतीय रेलवे और ट्रेन के लोको पायलट रामचंद्र ने 20 जुलाई को स्पष्ट किया कि यह ट्रेन पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही है और इसमें किसी प्रकार की कोई तकनीकी खराबी नहीं आई है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी।
वायरल वीडियो का सच
लॉन्चिंग के अगले ही दिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से फैला, जिसमें दावा किया गया कि हाइड्रोजन ट्रेन खराब हो गई और उसे डीजल इंजन से खींचकर ले जाया जा रहा है। लोको पायलट रामचंद्र ने इस वीडियो को सिरे से फर्जी करार दिया। उन्होंने बताया कि मेंटेनेंस के लिए ट्रेन के आवागमन के दौरान एक लोकोमोटिव का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया गया।
ट्रेन का संचालन और रूट
लोको पायलट के अनुसार, यह हाइड्रोजन ट्रेन 17 जुलाई से जींद और सोनीपत के बीच नियमित रूप से चल रही है। इस रूट पर कुल 12 स्टॉपेज हैं और सप्ताह में छह दिन इसका परिचालन होता है — शुक्रवार को ट्रेन नहीं चलती। सेक्शन की निर्धारित गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि ट्रेन की अधिकतम क्षमता 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक है। यात्रियों के लिए किराया मात्र ₹25 निर्धारित किया गया है।
तकनीक और पर्यावरणीय महत्व
लोको पायलट रामचंद्र ने बताया कि यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की तकनीक से ट्रैक्शन पावर तैयार करती है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तरह धुआं नहीं निकलता, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत हरित ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
भारतीय रेलवे का आधिकारिक खंडन
भारतीय रेलवे ने भी वायरल दावे को आधिकारिक तौर पर गलत बताया है। रेलवे की ओर से स्पष्ट किया गया कि देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन अपनी तय योजना के अनुसार संचालित हो रही है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि मेंटेनेंस के दौरान सहायक लोकोमोटिव का उपयोग एक सामान्य तकनीकी प्रक्रिया है, न कि खराबी का संकेत।
आगे क्या
यह घटना उस बड़ी चुनौती की ओर ध्यान दिलाती है जो नई तकनीकों की शुरुआत के साथ सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से उत्पन्न होती है। भारतीय रेलवे का यह स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन प्रयोग देश के हरित परिवहन भविष्य की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, और अधिकारियों के अनुसार इसका संचालन निर्बाध जारी रहेगा।