30 जुलाई 2026
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राम मंदिर के नए सचिव जगदीश आफले: IIT बॉम्बे से अमेरिकी करियर, फिर अयोध्या को समर्पण

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राम मंदिर के नए सचिव जगदीश आफले: IIT बॉम्बे से अमेरिकी करियर, फिर अयोध्या को समर्पण

सारांश

IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग, अमेरिका में शानदार कॉर्पोरेट करियर — और फिर सब छोड़कर अयोध्या। जगदीश आफले पाँच साल से बिना वेतन राम मंदिर निर्माण की देखरेख कर रहे हैं। अब विवादों से घिरे ट्रस्ट के पुनर्गठन के बाद उन्हें 'सचिव' पद की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

मुख्य बातें

जगदीश आफले को अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के नवसृजित 'सचिव' पद पर 2 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से नियुक्त किए जाने की उम्मीद है।
आफले IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक व एमटेक और यूरोप-अमेरिका में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यानुभव रखते हैं।
वे पिछले करीब पाँच वर्षों से बिना वेतन 'मानद प्रोजेक्ट मैनेजर' के रूप में 70 एकड़ राम मंदिर परिसर की देखरेख कर रहे हैं।
जून 2026 में दान अनियमितताओं के आरोपों के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ.
अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया था।
22 जुलाई 2026 की ट्रस्ट बैठक में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत सचिव पद सृजित कर आफले का नाम सर्वसम्मति से प्रस्तावित हुआ।

अयोध्या राम मंदिर की प्रशासनिक कमान अब जगदीश आफले के हाथों में सौंपी जाएगी। 22 जुलाई 2026 को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम को सर्वसम्मति से नवसृजित 'सचिव' पद के लिए प्रस्तावित किया गया, और इस नियुक्ति पर आधिकारिक मुहर 2 सितंबर 2026 को लगने की उम्मीद है। पुणे के पद्मावती इलाके से ताल्लुक रखने वाले आफले का जीवन-सफर एक असाधारण यात्रा है — वैश्विक तकनीकी सफलता से अयोध्या की पवित्र भूमि तक।

शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि

जगदीश आफले ने देश के सर्वोच्च तकनीकी संस्थानों में से एक, आईआईटी बॉम्बे, से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की उपाधियाँ अर्जित कीं। उच्च शिक्षा के बाद उनका पेशेवर सफर भारत से यूरोप और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका की शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक पहुँचा, जहाँ उन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता से विशेष पहचान बनाई।

वैश्विक कॉर्पोरेट जगत में अपनी धाक जमाने के बावजूद आफले की जड़ें सदैव भारतीय संस्कृति और सेवाभाव से जुड़ी रहीं। वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित सदस्य रहे हैं।

अमेरिका में RSS सेवा और भारत वापसी

अमेरिका में अपने कॉर्पोरेट कार्यकाल के दौरान भी आफले का सामाजिक दायित्वबोध अटूट रहा। उन्होंने और उनकी धर्मपत्नी माधुरी आफले ने लगभग तीन वर्षों तक अमेरिका में RSS के 'विस्तारक' — अर्थात पूर्णकालिक स्वयंसेवक — के रूप में निःस्वार्थ सेवाएं दीं।

जब सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया, तब सेवानिवृत्ति के बाद भारत लौट चुके आफले दंपत्ति ने एक नई राह चुनी। RSS की सिफारिश पर, जगदीश आफले बिना किसी वेतन के 'मानद प्रोजेक्ट मैनेजर' के रूप में 70 एकड़ में फैले राम मंदिर निर्माण परिसर से जुड़ गए।

अयोध्या में पाँच साल की निःस्वार्थ सेवा

पिछले करीब पाँच वर्षों से जगदीश आफले और उनकी पत्नी माधुरी — जो स्वयं मंदिर वास्तुकला और मूर्तिकला की विशेषज्ञ हैं — अयोध्या के तीर्थ क्षेत्र भवन में ही निवास कर रहे हैं। एक इंजीनियर की कड़ी अनुशासन-दृष्टि के साथ वे निर्माण कार्य की हर तकनीकी बारीकी पर नज़र रखते हैं।

उनकी कार्यशैली अत्यंत व्यवस्थित है — प्रत्येक शनिवार को वे निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा करते हैं और प्रत्येक सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा तथा उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ प्रगति-बैठक में भाग लेते हैं।

ट्रस्ट में विवाद और प्रशासनिक पुनर्गठन

यह नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब राम मंदिर ट्रस्ट एक गंभीर प्रशासनिक संकट से उबर रहा है। जून 2026 के पहले सप्ताह में दान और चढ़ावे में अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारियाँ हुईं। इसके परिणामस्वरूप ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को अपने-अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा।

इस पृष्ठभूमि में 22 जुलाई 2026 की ट्रस्ट बैठक में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत 'सचिव' का नया पद सृजित किया गया और जगदीश आफले का नाम सर्वसम्मति से प्रस्तावित हुआ। उनकी औपचारिक नियुक्ति 2 सितंबर 2026 को अपेक्षित है।

आगे की राह

आफले की नियुक्ति ट्रस्ट के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है — तकनीकी विशेषज्ञता, पाँच वर्षों का ज़मीनी अनुभव और निःस्वार्थ सेवा की विरासत लेकर वे इस जिम्मेदारी को संभालेंगे। राम मंदिर का प्रशासन अब पारदर्शिता और जवाबदेही की नई कसौटी पर परखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या नया प्रशासनिक ढाँचा वित्तीय पारदर्शिता के लिए स्वतंत्र जाँच तंत्र स्थापित करता है। करोड़ों श्रद्धालुओं के दान से चलने वाले ट्रस्ट में जवाबदेही केवल आंतरिक समीक्षा से नहीं, बल्कि बाहरी ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण से आएगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगदीश आफले कौन हैं और राम मंदिर से उनका क्या संबंध है?
जगदीश आफले पुणे के पद्मावती इलाके के निवासी और IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक डिग्रीधारी हैं। वे पिछले करीब पाँच वर्षों से बिना वेतन 'मानद प्रोजेक्ट मैनेजर' के रूप में 70 एकड़ राम मंदिर निर्माण परिसर की तकनीकी देखरेख कर रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट में 'सचिव' का नया पद क्यों बनाया गया?
जून 2026 में दान और चढ़ावे की अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ा। 22 जुलाई 2026 की बैठक में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत यह नया पद सृजित किया गया।
जगदीश आफले की नियुक्ति कब आधिकारिक होगी?
उनकी नियुक्ति की औपचारिक घोषणा 2 सितंबर 2026 को अपेक्षित है। 22 जुलाई की बैठक में उनका नाम सर्वसम्मति से प्रस्तावित किया जा चुका है।
जगदीश आफले की पत्नी माधुरी आफले की इसमें क्या भूमिका है?
माधुरी आफले मंदिर वास्तुकला और मूर्तिकला की विशेषज्ञ हैं। वे भी अपने पति के साथ अयोध्या के तीर्थ क्षेत्र भवन में निवास करती हैं और मंदिर परियोजना में सक्रिय योगदान दे रही हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट विवाद क्या था जिसके बाद यह बदलाव हुआ?
जून 2026 के पहले सप्ताह में ट्रस्ट पर दान-चढ़ावे में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारियाँ हुईं और महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को पद छोड़ना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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