राम मंदिर के नए सचिव जगदीश आफले: IIT बॉम्बे से अमेरिकी करियर, फिर अयोध्या को समर्पण
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या राम मंदिर की प्रशासनिक कमान अब जगदीश आफले के हाथों में सौंपी जाएगी। 22 जुलाई 2026 को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम को सर्वसम्मति से नवसृजित 'सचिव' पद के लिए प्रस्तावित किया गया, और इस नियुक्ति पर आधिकारिक मुहर 2 सितंबर 2026 को लगने की उम्मीद है। पुणे के पद्मावती इलाके से ताल्लुक रखने वाले आफले का जीवन-सफर एक असाधारण यात्रा है — वैश्विक तकनीकी सफलता से अयोध्या की पवित्र भूमि तक।
शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि
जगदीश आफले ने देश के सर्वोच्च तकनीकी संस्थानों में से एक, आईआईटी बॉम्बे, से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की उपाधियाँ अर्जित कीं। उच्च शिक्षा के बाद उनका पेशेवर सफर भारत से यूरोप और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका की शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों तक पहुँचा, जहाँ उन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता से विशेष पहचान बनाई।
वैश्विक कॉर्पोरेट जगत में अपनी धाक जमाने के बावजूद आफले की जड़ें सदैव भारतीय संस्कृति और सेवाभाव से जुड़ी रहीं। वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित सदस्य रहे हैं।
अमेरिका में RSS सेवा और भारत वापसी
अमेरिका में अपने कॉर्पोरेट कार्यकाल के दौरान भी आफले का सामाजिक दायित्वबोध अटूट रहा। उन्होंने और उनकी धर्मपत्नी माधुरी आफले ने लगभग तीन वर्षों तक अमेरिका में RSS के 'विस्तारक' — अर्थात पूर्णकालिक स्वयंसेवक — के रूप में निःस्वार्थ सेवाएं दीं।
जब सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया, तब सेवानिवृत्ति के बाद भारत लौट चुके आफले दंपत्ति ने एक नई राह चुनी। RSS की सिफारिश पर, जगदीश आफले बिना किसी वेतन के 'मानद प्रोजेक्ट मैनेजर' के रूप में 70 एकड़ में फैले राम मंदिर निर्माण परिसर से जुड़ गए।
अयोध्या में पाँच साल की निःस्वार्थ सेवा
पिछले करीब पाँच वर्षों से जगदीश आफले और उनकी पत्नी माधुरी — जो स्वयं मंदिर वास्तुकला और मूर्तिकला की विशेषज्ञ हैं — अयोध्या के तीर्थ क्षेत्र भवन में ही निवास कर रहे हैं। एक इंजीनियर की कड़ी अनुशासन-दृष्टि के साथ वे निर्माण कार्य की हर तकनीकी बारीकी पर नज़र रखते हैं।
उनकी कार्यशैली अत्यंत व्यवस्थित है — प्रत्येक शनिवार को वे निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा करते हैं और प्रत्येक सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा तथा उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ प्रगति-बैठक में भाग लेते हैं।
ट्रस्ट में विवाद और प्रशासनिक पुनर्गठन
यह नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब राम मंदिर ट्रस्ट एक गंभीर प्रशासनिक संकट से उबर रहा है। जून 2026 के पहले सप्ताह में दान और चढ़ावे में अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारियाँ हुईं। इसके परिणामस्वरूप ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को अपने-अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा।
इस पृष्ठभूमि में 22 जुलाई 2026 की ट्रस्ट बैठक में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत 'सचिव' का नया पद सृजित किया गया और जगदीश आफले का नाम सर्वसम्मति से प्रस्तावित हुआ। उनकी औपचारिक नियुक्ति 2 सितंबर 2026 को अपेक्षित है।
आगे की राह
आफले की नियुक्ति ट्रस्ट के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है — तकनीकी विशेषज्ञता, पाँच वर्षों का ज़मीनी अनुभव और निःस्वार्थ सेवा की विरासत लेकर वे इस जिम्मेदारी को संभालेंगे। राम मंदिर का प्रशासन अब पारदर्शिता और जवाबदेही की नई कसौटी पर परखा जाएगा।