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हजारीबाग में भर्ती सुधार यात्रा: देवेंद्र महतो ने झारखंड सरकार को दी CBI जांच की चेतावनी

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हजारीबाग में भर्ती सुधार यात्रा: देवेंद्र महतो ने झारखंड सरकार को दी CBI जांच की चेतावनी

सारांश

झारखंड में भर्ती सुधार यात्रा का दूसरा दिन हजारीबाग पहुँचा — 26 साल की पीड़ा, परीक्षाओं में धाँधली और प्रवासी मज़दूरों के सपनों की आवाज़ लेकर। देवेंद्र महतो ने साफ कहा: सीआईडी से बचाया तो सीबीआई जाँच होगी, कोई नहीं बचेगा।

मुख्य बातें

देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में भर्ती सुधार यात्रा 25 अगस्त को दूसरे दिन हजारीबाग पहुँची।
यात्रा रामगढ़ और जत्था जिले से होते हुए हजारीबाग के गांधी मैदान तक पहुँची।
आंदोलन 2 जुलाई से शुरू हुआ; 2 अगस्त से भूख हड़ताल भी की गई।
जेसीसीजीएल और 11वीं-17वीं जेपीएससी परीक्षाओं में धाँधली के आरोप में रद्द करने की माँग।
सीआईडी जाँच से संतुष्ट न होने पर सीबीआई जाँच की माँग की चेतावनी दी।
आंदोलन को झारखंड के 24 जिलों के लाखों परिवारों की लड़ाई बताया गया।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में 'जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच' की भर्ती सुधार यात्रा मंगलवार, 25 अगस्त को अपने दूसरे दिन हजारीबाग पहुँची। रामगढ़ और जत्था जिले से गुज़रते हुए यह जत्था हजारीबाग के गांधी मैदान पहुँचा, जहाँ छात्रों ने परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष परिणाम की माँग दोहराई तथा झारखंड सरकार को आंदोलनकारियों को डराने-धमकाने के विरुद्ध कड़ी चेतावनी दी।

यात्रा का क्रम और पृष्ठभूमि

देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि इस संघर्ष की शुरुआत 2 जुलाई से हुई, 5 जुलाई को आंदोलन का आगाज़ हुआ, 25 जुलाई को सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ हुआ और 2 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की गई। इस दौरान विधानसभा घेराव, तिरंगा यात्रा और संविधान यात्रा जैसे कदम उठाए गए। महतो ने कहा, 'यह हमारे लिए सिर्फ यात्रा नहीं, एक संकल्प है।'

26 सालों की पीड़ा और भर्ती भ्रष्टाचार का आरोप

महतो ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी के अभ्यर्थी पिछले 26 वर्षों से भर्ती व्यवस्था की खामियों और भ्रष्टाचार के कारण त्रस्त हैं। उन्होंने माँग की कि जेसीसीजीएल तथा 11वीं से 17वीं जेपीएससी परीक्षाओं सहित जिन भी परीक्षाओं में धाँधली हुई है, उन्हें रद्द किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषी चाहे वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस अधिकारी हों या कोई मंत्री, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

CBI जांच की माँग

महतो ने आगाह किया कि यदि सीआईडी जाँच के माध्यम से दोषियों को बचाने की कोशिश की गई, तो आंदोलन सीबीआई जाँच की माँग करेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी वर्ग को क्षमा नहीं मिलेगी और जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

झारखंड के 24 जिलों की आवाज़

महतो ने इस आंदोलन को केवल अभ्यर्थियों की लड़ाई नहीं, बल्कि झारखंड के 24 जिलों के हर उस परिवार की आवाज़ बताया जहाँ माँ अपनी ज़रूरतों में कटौती कर बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाती है, किसान पिता खेत में पसीना बहाकर फीस भरते हैं, और प्रवासी मज़दूर दूसरे राज्यों में शोषण झेलते हुए भी यह उम्मीद रखते हैं कि उनके बच्चे अपने राज्य में रोज़गार पाएँगे।

आगे की राह

गांधी मैदान से यात्रा को हजारीबाग के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की योजना है। आंदोलन का दबाव बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि झारखंड सरकार भर्ती सुधारों पर ठोस कदम उठाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो खुद इस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। असली चुनौती यह है कि झारखंड में प्रतिभाशाली युवाओं का पलायन रोकना तब तक संभव नहीं जब तक भर्ती प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार न हो — और इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत है, जो अब तक अनुपस्थित रही है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भर्ती सुधार यात्रा क्या है और इसकी माँगें क्या हैं?
'जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच' द्वारा आयोजित यह यात्रा झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रक्रिया की माँग को लेकर निकाली गई है। मुख्य माँगों में धाँधली वाली परीक्षाओं को रद्द करना और दोषियों पर सीबीआई जाँच शामिल है।
देवेंद्र नाथ महतो ने CBI जाँच की माँग क्यों की?
महतो ने कहा कि यदि सीआईडी जाँच के ज़रिए दोषियों को बचाने की कोशिश हुई तो आंदोलन सीबीआई जाँच की माँग करेगा। उनका कहना है कि आईएएस-आईपीएस अधिकारी या मंत्री — कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए।
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन कब से चल रहा है?
इस आंदोलन की शुरुआत 2 जुलाई से हुई, 5 जुलाई को औपचारिक आंदोलन, 25 जुलाई को सत्याग्रह और 2 अगस्त से भूख हड़ताल प्रारंभ हुई। अभ्यर्थी 26 वर्षों से भर्ती व्यवस्था की खामियों से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
किन परीक्षाओं को रद्द करने की माँग की जा रही है?
आंदोलनकारी जेसीसीजीएल और 11वीं से 17वीं जेपीएससी परीक्षाओं सहित उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की माँग कर रहे हैं जिनमें कथित तौर पर धाँधली हुई है।
इस आंदोलन से झारखंड के किन लोगों पर असर पड़ रहा है?
महतो के अनुसार यह आंदोलन झारखंड के 24 जिलों के उन लाखों परिवारों की आवाज़ है जिनके बच्चे सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। इसमें किसान परिवार, प्रवासी मज़दूरों के परिजन और आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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