8 अगस्त 2026
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जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025 में गड़बड़ी: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, सीबीआई जांच की मांग

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जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025 में गड़बड़ी: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, सीबीआई जांच की मांग

सारांश

जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित गड़बड़ियों का मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुँच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की जनहित याचिका में सीबीआई जांच, परीक्षा रद्द करने और सभी अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग है — यह तब, जब झारखंड में छात्र आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा।

मुख्य बातें

सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने 8 अगस्त 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की।
याचिका में जेपीएससी कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा-2025 की सीबीआई जांच या स्वतंत्र समिति से जांच की मांग।
19 अप्रैल को आयोजित परीक्षा को रद्द करने का निर्देश देने की भी अपील।
जांच समिति में फॉरेंसिक साइंस, साइबर सुरक्षा, ओएमआर मूल्यांकन सहित छह क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल करने की मांग।
ओएमआर शीट, सीसीटीवी फुटेज, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड सहित सभी परीक्षा दस्तावेज सुरक्षित रखने का आदेश माँगा गया।
झारखंड में छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल जारी; सरकार-छात्र वार्ता में अब तक कोई सहमति नहीं।

सर्वोच्च न्यायालय में 8 अगस्त 2025 को एक जनहित याचिका दाखिल कर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की गई है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने दायर की है। मामला ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा है जब झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल पर हैं।

याचिका में क्या मांगा गया है

याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने सर्वोच्च न्यायालय से तीन प्रमुख राहतें माँगी हैं। पहली, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच सीबीआई से कराई जाए। दूसरी, यदि सीबीआई जांच संभव न हो, तो सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा झारखंड से बाहर के किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए। तीसरी, 19 अप्रैल को आयोजित जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का निर्देश दिया जाए।

विशेषज्ञ समिति की संरचना पर जोर

याचिका में यह भी कहा गया है कि जांच समिति में फॉरेंसिक साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, ओएमआर मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया के हर पहलू की गहन जांच के लिए बहु-विषयक विशेषज्ञता अनिवार्य है।

दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील

सर्वोच्च न्यायालय से यह भी आग्रह किया गया है कि परीक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। इनमें मूल ओएमआर शीट, अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन डेटा और रिजल्ट जनरेशन डेटा शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इन दस्तावेजों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ जांच को प्रभावित कर सकती है।

झारखंड में छात्र आंदोलन जारी

गौरतलब है कि झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र इस परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में आंदोलन और भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को छात्र प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन आंदोलन समाप्त करने की कोई घोषणा नहीं हुई। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती नहीं दिख रही और अब यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय इस जनहित याचिका पर सुनवाई की तारीख तय करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय जांच के लिए किस एजेंसी या समिति को अधिकृत करता है और क्या परीक्षा रद्द करने की मांग पर कोई अंतरिम आदेश जारी होता है। इस बीच, झारखंड में छात्र आंदोलन की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य लोक सेवा आयोगों की विश्वसनीयता पर बढ़ते सवालों की एक कड़ी है। छात्र आंदोलन और सरकारी वार्ता के बीच गतिरोध यह संकेत देता है कि प्रशासन के पास कथित अनियमितताओं का संतोषजनक जवाब अभी तक नहीं है। सीबीआई जांच की मांग राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि केंद्रीय एजेंसी का हस्तक्षेप राज्य सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। असली कसौटी यह होगी कि सर्वोच्च न्यायालय दस्तावेज संरक्षण पर कितनी तेज़ी से कार्यवाही करता है, क्योंकि साक्ष्य सुरक्षित रहे बिना कोई भी जांच निर्णायक नहीं हो सकती।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025 विवाद क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा-2025, जो 19 अप्रैल को आयोजित हुई, उसमें कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के विरोध में झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल पर हैं।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका किसने और क्यों दाखिल की?
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने 8 अगस्त 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में यह जनहित याचिका दाखिल की। याचिका का उद्देश्य परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना है।
याचिका में सीबीआई जांच के अलावा और क्या माँगा गया है?
याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने, 19 अप्रैल की परीक्षा रद्द करने और ओएमआर शीट, सीसीटीवी फुटेज, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड सहित सभी परीक्षा दस्तावेज सुरक्षित रखने के आदेश की भी मांग की गई है।
झारखंड में छात्र आंदोलन की क्या स्थिति है?
झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को छात्र प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के बीच बातचीत हुई, लेकिन आंदोलन समाप्त करने की कोई घोषणा नहीं हुई और दोनों पक्षों के बीच अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।
जांच समिति में किन विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग है?
याचिका के अनुसार जांच समिति में फॉरेंसिक साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, ओएमआर मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञ होने चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए कि परीक्षा प्रक्रिया के हर पहलू की गहन जांच हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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