जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025 में गड़बड़ी: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, सीबीआई जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में 8 अगस्त 2025 को एक जनहित याचिका दाखिल कर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की गई है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने दायर की है। मामला ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा है जब झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल पर हैं।
याचिका में क्या मांगा गया है
याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने सर्वोच्च न्यायालय से तीन प्रमुख राहतें माँगी हैं। पहली, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच सीबीआई से कराई जाए। दूसरी, यदि सीबीआई जांच संभव न हो, तो सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा झारखंड से बाहर के किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए। तीसरी, 19 अप्रैल को आयोजित जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का निर्देश दिया जाए।
विशेषज्ञ समिति की संरचना पर जोर
याचिका में यह भी कहा गया है कि जांच समिति में फॉरेंसिक साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, ओएमआर मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया के हर पहलू की गहन जांच के लिए बहु-विषयक विशेषज्ञता अनिवार्य है।
दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील
सर्वोच्च न्यायालय से यह भी आग्रह किया गया है कि परीक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। इनमें मूल ओएमआर शीट, अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन डेटा और रिजल्ट जनरेशन डेटा शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इन दस्तावेजों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ जांच को प्रभावित कर सकती है।
झारखंड में छात्र आंदोलन जारी
गौरतलब है कि झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र इस परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में आंदोलन और भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को छात्र प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन आंदोलन समाप्त करने की कोई घोषणा नहीं हुई। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती नहीं दिख रही और अब यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय इस जनहित याचिका पर सुनवाई की तारीख तय करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय जांच के लिए किस एजेंसी या समिति को अधिकृत करता है और क्या परीक्षा रद्द करने की मांग पर कोई अंतरिम आदेश जारी होता है। इस बीच, झारखंड में छात्र आंदोलन की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हैं।