22 जुलाई 2026
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कानपुर देहात आसरा कॉलोनी: 398 परिवारों को घर मिला, पर सड़क-नाला-बिजली का इंतज़ार जारी

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कानपुर देहात आसरा कॉलोनी: 398 परिवारों को घर मिला, पर सड़क-नाला-बिजली का इंतज़ार जारी

सारांश

घर मिला, मगर ज़िंदगी नहीं सँवरी। कानपुर देहात की आसरा कॉलोनी में 398 परिवारों को पक्की छत तो मिली, लेकिन कच्ची सड़क, घुटनों तक पानी और दिनों तक गुल रहने वाली बिजली ने इस 'आसरे' को आफत में बदल दिया है। प्रशासन ने समस्या मानी, समाधान अभी बजट की राह देख रहा है।

मुख्य बातें

कानपुर देहात की आसरा आवास कॉलोनी में 398 परिवार उत्तर प्रदेश सरकार की आवास योजना के तहत रह रहे हैं।
कच्ची सड़कें, जलभराव, टूटी नालियाँ, बिजली और पानी की समस्या से निवासी परेशान हैं; बरसात में घुटनों तक पानी भर जाता है।
स्कूल वाहन कॉलोनी के अंदर नहीं आते — अभिभावकों को बच्चों को गोद या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक छोड़ना पड़ता है।
अपर जिलाधिकारी अमित कुमार ने जल निकासी की समस्या स्वीकार की; स्थायी समाधान के लिए बजट स्वीकृति का इंतज़ार है।
मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने एक सड़क की मंजूरी दिए जाने की बात कही और अन्य समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

कानपुर देहात की आसरा आवास कॉलोनी में उत्तर प्रदेश सरकार की आवास योजना के तहत पक्के मकान पाने वाले 398 परिवार बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्षपूर्ण जीवन जीने को विवश हैं। जलभराव, कच्ची सड़कें, टूटी नालियाँ, बिजली की बाधा और पानी की किल्लत — ये समस्याएँ बरसात के मौसम में और भी विकराल रूप ले लेती हैं। निवासियों के अनुसार, बार-बार शिकायत और धरना-प्रदर्शन के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला है।

मुख्य समस्याएँ: कीचड़, अँधेरा और घुटनों तक पानी

कॉलोनी निवासी बुद्ध प्रकाश ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से यहाँ रह रहे हैं। उनके अनुसार, बारिश होते ही पूरी कॉलोनी की सड़कें दलदल में तब्दील हो जाती हैं, जिससे बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो जाता है। स्कूल वाहन कॉलोनी के भीतर आने से इनकार कर देते हैं, इसलिए अभिभावकों को छोटे बच्चों को गोद या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक छोड़ने जाना पड़ता है। उनका कहना है कि मोटरसाइकिल से निकलना भी बेहद कठिन हो जाता है।

बुद्ध प्रकाश ने यह भी कहा कि सरकार को पहले सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएँ विकसित करनी चाहिए थीं, उसके बाद ही मकानों का आवंटन होना चाहिए था।

निवासियों की आपबीती: चोटें, बीमारियाँ और आर्थिक तंगी

स्थानीय निवासी सुहाना बेगम, जो पिछले चार वर्षों से कॉलोनी में रह रही हैं, ने बताया कि बरसात के दिनों में घुटनों तक पानी भर जाता है। सड़कें कच्ची हैं और नालियों का निर्माण नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे स्कूल जाते समय फिसलकर गिर जाते हैं और कई बार घायल हो चुके हैं। बिजली की समस्या भी लगातार बनी रहती है — कई-कई दिन आपूर्ति बाधित रहती है।

सुहाना बेगम ने आगे कहा कि कॉलोनी के अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं और बच्चों के घायल होने पर इलाज कराना भी कई परिवारों के लिए मुश्किल हो जाता है। एक अन्य निवासी अनूप मिश्रा ने बताया कि हाल ही में एक महिला सड़क पर फिसलकर गिर गई थीं। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों को आवेदन दिए गए और धरना-प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया: समस्या स्वीकारी, समाधान अटका

कानपुर देहात के अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अमित कुमार ने स्वीकार किया कि अकबरपुर नगर पंचायत की ओर से रूरा रोड स्थित आसरा आवास कॉलोनी का आवंटन पहले ही किया जा चुका है और वर्तमान में वहाँ 398 परिवार रह रहे हैं। उन्होंने माना कि कॉलोनी निचले इलाके में होने के कारण जल निकासी की समस्या बनी हुई है।

अमित कुमार ने बताया कि स्थायी समाधान के लिए सीएंडडीएस के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है। परियोजना तैयार होने के बाद उसे शासन को भेजा जाएगा और बजट स्वीकृत होने पर पक्के नाले तथा अन्य आवश्यक निर्माण कार्य कराए जाएंगे। फिलहाल बारिश को देखते हुए रास्तों पर मिट्टी डलवाकर आवागमन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

मंत्री का आश्वासन

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि उनकी ओर से एक सड़क को मंजूरी दी जा चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि अन्य समस्याएँ भी सामने आती हैं तो उनका भी समाधान कराया जाएगा।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार आवास योजनाओं को अपनी उपलब्धियों में प्रमुखता से गिनाती है। गौरतलब है कि केवल मकान का आवंटन पर्याप्त नहीं है — बिना सड़क, नाला, बिजली और पानी के, पक्का घर भी रहने योग्य नहीं बन पाता। बजट स्वीकृति और परियोजना क्रियान्वयन की समयसीमा अभी अनिश्चित है, जबकि मानसून का मौसम जारी है और निवासियों की परेशानियाँ बढ़ती जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि प्रशासन 'बजट स्वीकृति' और 'परियोजना तैयार होने' की प्रतीक्षा में है। यह कोई अकेली घटना नहीं — देशभर में ऐसी कई आवास कॉलोनियाँ हैं जहाँ आवंटन से पहले सड़क, नाला और बिजली सुनिश्चित नहीं की गई। असली सवाल यह है कि क्या आवास योजनाओं की निगरानी प्रणाली में 'बुनियादी सुविधा पूर्णता' को अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा, या आश्वासन देते रहना ही पर्याप्त माना जाएगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर देहात की आसरा आवास कॉलोनी में क्या समस्याएँ हैं?
कॉलोनी में कच्ची सड़कें, जलभराव, टूटी नालियाँ, बिजली की बाधा और पानी की किल्लत प्रमुख समस्याएँ हैं। बरसात में घुटनों तक पानी भर जाता है और स्कूल वाहन कॉलोनी के अंदर आने से इनकार कर देते हैं।
आसरा कॉलोनी में कितने परिवार रहते हैं और कब से?
अकबरपुर नगर पंचायत की ओर से आवंटित इस कॉलोनी में वर्तमान में 398 परिवार रह रहे हैं। कुछ निवासी एक वर्ष से, तो कुछ चार वर्षों से यहाँ रह रहे हैं।
प्रशासन ने इस समस्या पर क्या कहा?
कानपुर देहात के अपर जिलाधिकारी अमित कुमार ने जल निकासी की समस्या स्वीकार की और बताया कि स्थायी समाधान के लिए सीएंडडीएस के साथ संपर्क जारी है। परियोजना तैयार होने पर बजट स्वीकृति के बाद पक्के नाले और निर्माण कार्य कराए जाएंगे; फिलहाल मिट्टी डलवाकर आवागमन बनाए रखा जा रहा है।
मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने क्या आश्वासन दिया?
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि उनकी ओर से एक सड़क को मंजूरी दी जा चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अन्य समस्याएँ सामने आने पर उनका भी समाधान कराया जाएगा।
बच्चों पर इन समस्याओं का क्या असर पड़ रहा है?
कच्ची और दलदली सड़कों के कारण बच्चे स्कूल जाते समय फिसलकर घायल हो चुके हैं। स्कूल वाहन कॉलोनी के भीतर नहीं आते, इसलिए अभिभावकों को छोटे बच्चों को गोद या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक छोड़ना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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