केन-बेतवा परियोजना: MP सरकार का दावा — पन्ना-छतरपुर के 5,039 प्रभावित परिवारों को पुनर्वास लाभ स्वीकृत
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा में 22 जुलाई 2026 को प्रश्नकाल के दौरान केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना से विस्थापित परिवारों का मुद्दा तीखे रूप में उठा। पन्ना और छतरपुर जिलों में कुल 5,039 प्रभावित परिवारों को पुनर्वास एवं मुआवजा लाभ स्वीकृत किए जाने का दावा राज्य सरकार ने सदन के पटल पर किया। राजस्व मंत्री के अनुसार, किसी भी पात्र परिवार को लाभ से वंचित नहीं रखा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने विधानसभा में सरकार से परियोजना प्रभावित परिवारों के विस्थापन, पुनर्वास और शिकायतों का विस्तृत ब्यौरा माँगा। इसके जवाब में राजस्व मंत्री कर्ण सिंह वर्मा ने जिलेवार आँकड़े सदन के सामने रखे।
मंत्री के उत्तर के अनुसार, पन्ना जिले में परियोजना के अंतर्गत सात गाँवों के 1,321 परिवार विस्थापित हुए हैं, जबकि आठ गाँवों के 644 खाताधारक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हैं। छतरपुर जिले के ब्लॉक-बाजार क्षेत्र के 14 गाँवों के 3,718 परिवार भूमि अधिग्रहण या जलमग्नता के कारण प्रभावित बताए गए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
राजस्व मंत्री कर्ण सिंह वर्मा ने सदन को आश्वस्त किया कि पन्ना में सभी 1,321 विस्थापित परिवारों को पुनर्वास पैकेज प्रदान किए जा चुके हैं और 644 खाताधारकों को मुआवजा दिया गया है। छतरपुर में सभी 3,718 परिवारों को निर्धारित लाभों के लिए मंजूरी दी जा चुकी है।
गौरतलब है कि सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि पन्ना जिले से पुनर्वास सूचियों में पात्र व्यक्तियों को बाहर रखने, मुआवजे के आकलन में त्रुटियों और लाभ वितरण में अनियमितताओं से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
विशेष सर्वेक्षण और शिकायत निवारण
शिकायतों के बाद एक विशेष दल गठित कर नया सर्वेक्षण कराया गया। सरकार के अनुसार, सर्वेक्षण में पुष्टि हुई कि कोई भी पात्र व्यक्ति सूची से नहीं छूटा, मुआवजा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम, 2013 के अनुसार निर्धारित किया गया था, और वितरण में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
छतरपुर जिले में 15 अप्रैल 2026 के एक आधिकारिक आदेश के बाद ग्राम-वार टीमें गठित की गईं। प्रारंभ में 3,080 परिवारों को लाभ स्वीकृत किए गए थे। नई सर्वेक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अतिरिक्त 638 पात्र परिवारों को भी निर्धारित राशि के लिए मंजूरी दी गई।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब केन-बेतवा परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र की जल समस्या के समाधान के रूप में प्रस्तुत की जा रही है, लेकिन विस्थापन की पीड़ा झेल रहे परिवारों के लिए पुनर्वास की पारदर्शिता एक केंद्रीय सवाल बनी हुई है। पन्ना टाइगर रिजर्व के निकट स्थित गाँवों के विस्थापित परिवारों की स्थिति पर पर्यावरण और मानवाधिकार संगठन पहले से नजर रख रहे हैं।
क्या होगा आगे
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे और जमीनी स्तर पर स्वतंत्र सत्यापन की माँग करेंगे। सरकार के दावों की विश्वसनीयता तब परखी जाएगी जब प्रभावित परिवारों तक वास्तविक लाभ की पहुँच का स्वतंत्र आकलन होगा।