रो खन्ना बनाम रितेश टंडन: आईसीई खत्म करने और अरबपतियों पर टैक्स के मुद्दे पर कैलिफोर्निया में तीखी बहस
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना और उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी रितेश टंडन के बीच 29 अक्टूबर 2026 को कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट की सीट के लिए एक तीखी ऑनलाइन बहस हुई, जिसमें आव्रजन नीति, कर प्रस्ताव और अमेरिकी लोकतंत्र की दिशा पर दोनों भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों के बीच गहरे मतभेद उभरकर सामने आए। करीब 50 मिनट की यह बहस टंडन के चुनाव अभियान के यूट्यूब चैनल पर सीधे प्रसारित की गई।
आव्रजन: सबसे तीखा टकराव
बहस में सबसे अधिक मतभेद का विषय आव्रजन नीति रहा। खन्ना ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं आईसीई को खत्म कर दूंगा।' उन्होंने अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी को 'बेलगाम एजेंसी' करार देते हुए कहा कि इसकी जगह इमिग्रेशन एंड नेचुरलाइजेशन सर्विस (आईएनएस) जैसी एजेंसी होनी चाहिए — जो न्याय विभाग के अधीन काम करे, मानवीय दृष्टिकोण अपनाए और यौन तस्करी तथा आपराधिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करे।
टंडन ने इसके विपरीत रुख अपनाते हुए ग्रीन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में प्रति देश निर्धारित सीमा समाप्त करने और इस्तेमाल न हुए ग्रीन कार्ड को फिर से उपलब्ध कराने की माँग की। उन्होंने एच-1बी वीजा के दुरुपयोग पर रोक लगाने, मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य करने और अवैध सीमा पार को गंभीर अपराध घोषित करने का समर्थन किया।
गौरतलब है कि रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले भारतीय पेशेवरों को प्रति-देश सीमा के कारण सबसे लंबे प्रतीक्षाकाल का सामना करना पड़ता है — कुछ मामलों में यह दशकों तक खिंच जाता है। टंडन, जो 28 वर्ष की उम्र में भारत से अमेरिका आए थे, ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया और अपनी बारी का इंतजार किया। उन्होंने खन्ना पर तंज कसते हुए कहा कि उनके प्रतिद्वंद्वी करीब 10 वर्षों से कांग्रेस में हैं, फिर भी ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची लंबी होती गई है।
खन्ना ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका में पढ़ाई कर रहे, व्यवसाय शुरू करने वाले और कंपनियाँ स्थापित करने वाले लोगों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करने के रास्ते बनाए जाने चाहिए। आँकड़ों के अनुसार, इस समय 12 लाख से अधिक लोग ग्रीन कार्ड के लंबित आवेदनों की समस्या से जूझ रहे हैं।
अरबपति टैक्स पर सीधा टकराव
कर नीति के मुद्दे पर खन्ना ने अरबपतियों की संपत्ति पर 5 प्रतिशत कर लगाने के प्रस्ताव का बचाव करते हुए सवाल उठाया, 'यह अर्थव्यवस्था केवल कुछ अरबपतियों के लिए ही क्यों काम कर रही है?' उन्होंने कहा कि अमेरिका में एक नए सामाजिक समझौते की ज़रूरत है, जिसमें कामकाजी और मध्यम वर्ग के हितों को प्राथमिकता मिले।
टंडन ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह आय पर नहीं, बल्कि कागजों पर दर्ज संपत्ति के मूल्य पर कर लगाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले से ऊँचे करों के कारण कंपनियाँ और लोग कैलिफोर्निया छोड़कर अन्य राज्यों में जा रहे हैं। इस पर खन्ना ने पलटवार किया, 'किसी को नहीं लगता कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की क्रांति ऑस्टिन या मियामी में हो रही है — यह सिलिकॉन वैली में हो रही है।'
वैचारिक मतभेद और राजनीतिक आरोप
टंडन ने खन्ना पर डेमोक्रेटिक पार्टी को अत्यधिक वामपंथी दिशा में ले जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाजवादी राजनीति अमेरिका को 'वेनेजुएला के रास्ते' पर ले जा सकती है। टंडन ने न्यूयॉर्क के मेयर पद के लिए एक लोकतांत्रिक समाजवादी उम्मीदवार को खन्ना के समर्थन का भी उल्लेख किया।
इस तमाम तीखेपन के बावजूद, बहस की शुरुआत सौहार्दपूर्ण रही। खन्ना ने टंडन की सभ्य राजनीति की सराहना करते हुए कहा, 'लोकतंत्र के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम ऐसे लोगों के साथ विचारों पर बहस कर सकें, जिनसे हर मामले में हमारी सहमति नहीं होती।'
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए महत्व
यह बहस ऐसे समय में हुई जब सिलिकॉन वैली में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की संख्या और राजनीतिक प्रभाव तेज़ी से बढ़ रहा है। कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में भारतीय मूल के दो उम्मीदवारों की यह सीधी प्रतिस्पर्धा अपने आप में एक ऐतिहासिक संदर्भ है। ग्रीन कार्ड की लंबित सूची, एच-1बी वीजा सुधार और आईसीई की कार्यप्रणाली — ये सभी मुद्दे इस समुदाय के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर प्रासंगिक हैं।
आगामी चुनाव में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आव्रजन सुधार और कर नीति पर उभरे ये तीखे मतभेद भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के मतदान व्यवहार को प्रभावित करते हैं।