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महाराष्ट्र मानसून सत्र 23 जून से: 'ऑपरेशन टाइगर' की छाया, किसान संकट और विपक्ष का आक्रामक रुख

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महाराष्ट्र मानसून सत्र 23 जून से: 'ऑपरेशन टाइगर' की छाया, किसान संकट और विपक्ष का आक्रामक रुख

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र इस बार सिर्फ विधायी कार्यवाही नहीं होगा — 'ऑपरेशन टाइगर' की सियासी आग, ₹36,585 करोड़ की कृषि ऋण माफी पर घमासान और 3,000 से अधिक जलाशयों में घटता जलस्तर मिलकर इसे महायुति सरकार की सबसे कठिन परीक्षा बना रहे हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र 23 जून से 10 जुलाई 2025 तक चलेगा।
कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर शिवसेना (यूबीटी) और महायुति के बीच तीखा टकराव, संजय राउत ने 'ऑपरेशन वुल्फ' की चेतावनी दी।
विपक्ष ₹36,585 करोड़ की कृषि ऋण माफी की शर्तों और 3,000 से अधिक जलाशयों में घटते जलस्तर पर सरकार को घेरेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार अब तक 40 लाख से अधिक किसानों को ऋण माफी का लाभ मिल चुका है।
दोनों सदनों में आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की संभावना; विधान परिषद उपसभापति चुनाव पहले सप्ताह में संभव।
सरकार महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक और राजस्व सुधार संबंधी घोषणाएं कर सकती है।

महाराष्ट्र विधानसभा का तीन सप्ताह का मानसून सत्र सोमवार, 23 जून 2025 से शुरू होने जा रहा है और यह 10 जुलाई तक चलेगा। कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर सियासी माहौल पहले से ही गर्म है, जबकि अनियमित मानसून और किसानों की बिगड़ती स्थिति सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए बड़ी परीक्षा बन चुकी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह सत्र सामान्य विधायी कार्यवाही से कहीं अधिक शक्ति-प्रदर्शन और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का मंच बनेगा।

ऑपरेशन टाइगर: सियासी तूफान की आहट

सत्र से पहले राज्य की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा कथित 'ऑपरेशन टाइगर' की है। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सांसदों को तोड़कर अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर कथित बागी नेताओं को 'बेशर्म और एहसान फरामोश' बताते हुए कड़ा हमला बोला। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 'ऑपरेशन टाइगर' के जवाब में 'ऑपरेशन वुल्फ' शुरू करने की चेतावनी दी है, जो सदन में विपक्ष के आक्रामक तेवर का संकेत है।

नेता प्रतिपक्ष का अभाव और विधान परिषद उपसभापति चुनाव

इस सत्र की एक उल्लेखनीय संवैधानिक स्थिति यह है कि विधानसभा और विधान परिषद — दोनों सदनों में आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता पक्ष इस स्थिति का लाभ उठाकर अपने विधायी एजेंडे को तेज़ी से आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।

सत्तारूढ़ गठबंधन मानसून सत्र के पहले सप्ताह में विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए चुनाव कराने की तैयारी में है। शिवसेना नेता नीलम गोरहे के दोबारा विधान परिषद सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें फिर से इस पद पर बैठाने की संभावना जताई जा रही है।

किसान संकट और अनियमित मानसून

सदन के बाहर और भीतर दोनों जगह किसानों की समस्याएं प्रमुख मुद्दा रहेंगी। महाराष्ट्र में अनियमित और लंबे समय तक कमज़ोर रहे मानसून ने कृषि क्षेत्र की चिंताएं गहरी कर दी हैं। सरकार ने किसानों से जल्दबाज़ी में बुवाई न करने और मौसम विभाग की अगली सलाह का इंतज़ार करने की अपील की है।

राज्य के 3,000 से अधिक जलाशयों में जलस्तर लगातार घट रहा है। आलोचकों का कहना है कि एल नीनो के कारण पैदा हुई सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पर्याप्त तैयारी नहीं की। विपक्ष ₹36,585 करोड़ की कृषि ऋण माफी योजना की शर्तों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है और बिना शर्त कर्ज माफी तथा फसल नुकसान की तत्काल भरपाई की मांग उठाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कृषि मंत्री दत्ता भराणे का कहना है कि सरकार ने ऋण माफी योजना की कई शर्तों में ढील दी है और अब तक 40 लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल चुका है।

विपक्ष के निशाने पर कौन-कौन से मुद्दे

विपक्ष इस सत्र में महंगाई, पश्चिम एशिया संघर्ष के असर, नीट परीक्षा विवाद, महिलाओं के खिलाफ अपराध, कानून-व्यवस्था, मराठा-ओबीसी आरक्षण विवाद, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अनुसूचित जाति आरक्षण के उप-वर्गीकरण जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।

सरकार की ओर से मराठा और ओबीसी समुदायों से जुड़े मुद्दों के समाधान, पुलिस आधुनिकीकरण, नशे के बढ़ते कारोबार पर नियंत्रण और महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां गिनाई जाएंगी। सरकार महिला किसानों को सशक्त बनाने संबंधी एक विधेयक भी पेश कर सकती है और राजस्व विभाग से जुड़े कई सुधारात्मक कदमों की घोषणा संभव है।

आगे क्या होगा

पूरक बजट मांगों की मंजूरी के साथ शुरू होने वाले इस सत्र में तीखी बहस, नारेबाज़ी, वॉकआउट और राजनीतिक टकराव की पूरी संभावना है। यह सत्र 10 जुलाई तक चलेगा और महाराष्ट्र की राजनीतिक एवं आर्थिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह जवाबदेही के उस ढाँचे को कमज़ोर करता है जिसके बिना विधायी बहस महज औपचारिकता बन जाती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र 2025 कब से कब तक चलेगा?
महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र 23 जून 2025 से शुरू होकर 10 जुलाई 2025 तक चलेगा। यह तीन सप्ताह का सत्र पूरक बजट मांगों की मंजूरी के साथ शुरू होगा।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर है?
कथित 'ऑपरेशन टाइगर' वह कथित रणनीति है जिसके तहत विपक्ष का आरोप है कि महायुति गठबंधन, शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सांसदों को अपने पक्ष में तोड़ने की कोशिश कर रहा है। इसके जवाब में संजय राउत ने 'ऑपरेशन वुल्फ' की चेतावनी दी है, जिससे मानसून सत्र में तीखे टकराव के संकेत हैं।
महाराष्ट्र में ₹36,585 करोड़ की कृषि ऋण माफी योजना का क्या हाल है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कृषि मंत्री दत्ता भराणे के अनुसार, सरकार ने योजना की कई शर्तों में ढील दी है और अब तक 40 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिल चुका है। विपक्ष बिना शर्त कर्ज माफी और फसल नुकसान की तत्काल भरपाई की मांग के साथ सरकार को घेरने की तैयारी में है।
मानसून सत्र में विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा?
विपक्ष महंगाई, नीट परीक्षा विवाद, मराठा-ओबीसी आरक्षण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, कानून-व्यवस्था, एसआईआर और अनुसूचित जाति आरक्षण के उप-वर्गीकरण जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब माँगेगा। किसान संकट और जलाशयों में घटता जलस्तर भी प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
महाराष्ट्र में मानसून की स्थिति और किसानों पर इसका क्या असर है?
महाराष्ट्र में अनियमित और कमज़ोर मानसून के कारण राज्य के 3,000 से अधिक जलाशयों में जलस्तर लगातार घट रहा है। एल नीनो के प्रभाव से सूखे जैसी स्थिति बनी है, जिसने खरीफ फसलों की बुवाई पर असर डाला है और सरकार ने किसानों को जल्दबाज़ी में बुवाई न करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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