महाराष्ट्र मानसून सत्र 23 जून से: 'ऑपरेशन टाइगर' की छाया, किसान संकट और विपक्ष का आक्रामक रुख
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा का तीन सप्ताह का मानसून सत्र सोमवार, 23 जून 2025 से शुरू होने जा रहा है और यह 10 जुलाई तक चलेगा। कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर सियासी माहौल पहले से ही गर्म है, जबकि अनियमित मानसून और किसानों की बिगड़ती स्थिति सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए बड़ी परीक्षा बन चुकी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह सत्र सामान्य विधायी कार्यवाही से कहीं अधिक शक्ति-प्रदर्शन और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का मंच बनेगा।
ऑपरेशन टाइगर: सियासी तूफान की आहट
सत्र से पहले राज्य की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा कथित 'ऑपरेशन टाइगर' की है। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सांसदों को तोड़कर अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर कथित बागी नेताओं को 'बेशर्म और एहसान फरामोश' बताते हुए कड़ा हमला बोला। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 'ऑपरेशन टाइगर' के जवाब में 'ऑपरेशन वुल्फ' शुरू करने की चेतावनी दी है, जो सदन में विपक्ष के आक्रामक तेवर का संकेत है।
नेता प्रतिपक्ष का अभाव और विधान परिषद उपसभापति चुनाव
इस सत्र की एक उल्लेखनीय संवैधानिक स्थिति यह है कि विधानसभा और विधान परिषद — दोनों सदनों में आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता पक्ष इस स्थिति का लाभ उठाकर अपने विधायी एजेंडे को तेज़ी से आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।
सत्तारूढ़ गठबंधन मानसून सत्र के पहले सप्ताह में विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए चुनाव कराने की तैयारी में है। शिवसेना नेता नीलम गोरहे के दोबारा विधान परिषद सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें फिर से इस पद पर बैठाने की संभावना जताई जा रही है।
किसान संकट और अनियमित मानसून
सदन के बाहर और भीतर दोनों जगह किसानों की समस्याएं प्रमुख मुद्दा रहेंगी। महाराष्ट्र में अनियमित और लंबे समय तक कमज़ोर रहे मानसून ने कृषि क्षेत्र की चिंताएं गहरी कर दी हैं। सरकार ने किसानों से जल्दबाज़ी में बुवाई न करने और मौसम विभाग की अगली सलाह का इंतज़ार करने की अपील की है।
राज्य के 3,000 से अधिक जलाशयों में जलस्तर लगातार घट रहा है। आलोचकों का कहना है कि एल नीनो के कारण पैदा हुई सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पर्याप्त तैयारी नहीं की। विपक्ष ₹36,585 करोड़ की कृषि ऋण माफी योजना की शर्तों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है और बिना शर्त कर्ज माफी तथा फसल नुकसान की तत्काल भरपाई की मांग उठाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कृषि मंत्री दत्ता भराणे का कहना है कि सरकार ने ऋण माफी योजना की कई शर्तों में ढील दी है और अब तक 40 लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल चुका है।
विपक्ष के निशाने पर कौन-कौन से मुद्दे
विपक्ष इस सत्र में महंगाई, पश्चिम एशिया संघर्ष के असर, नीट परीक्षा विवाद, महिलाओं के खिलाफ अपराध, कानून-व्यवस्था, मराठा-ओबीसी आरक्षण विवाद, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अनुसूचित जाति आरक्षण के उप-वर्गीकरण जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
सरकार की ओर से मराठा और ओबीसी समुदायों से जुड़े मुद्दों के समाधान, पुलिस आधुनिकीकरण, नशे के बढ़ते कारोबार पर नियंत्रण और महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां गिनाई जाएंगी। सरकार महिला किसानों को सशक्त बनाने संबंधी एक विधेयक भी पेश कर सकती है और राजस्व विभाग से जुड़े कई सुधारात्मक कदमों की घोषणा संभव है।
आगे क्या होगा
पूरक बजट मांगों की मंजूरी के साथ शुरू होने वाले इस सत्र में तीखी बहस, नारेबाज़ी, वॉकआउट और राजनीतिक टकराव की पूरी संभावना है। यह सत्र 10 जुलाई तक चलेगा और महाराष्ट्र की राजनीतिक एवं आर्थिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।