29 जुलाई 2026
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कोयला ब्लॉक आवंटन: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व PM मनमोहन सिंह को दोषमुक्त किया, 2015 का समन रद्द

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कोयला ब्लॉक आवंटन: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व PM मनमोहन सिंह को दोषमुक्त किया, 2015 का समन रद्द

सारांश

दशक से अधिक समय तक चले कोयला ब्लॉक आवंटन विवाद का पटाक्षेप — सर्वोच्च न्यायालय ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को दोषमुक्त कर 2015 का समन रद्द कर दिया और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की। यूपीए काल के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक अब कानूनी रूप से बंद।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.
मनमोहन सिंह को तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन मामले में दोषमुक्त किया।
स्पेशल सीबीआई कोर्ट का 11 मार्च 2015 का समन आदेश निरस्त; सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने माना — स्पेशल जज के पास क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने का कोई पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था।
मामला 2005 के तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था; डॉ.
मनमोहन सिंह सहित 6 लोगों को समन जारी हुआ था।
सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अप्रैल 2015 को ही इस कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन मामले में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को औपचारिक रूप से दोषमुक्त कर दिया और 11 मार्च 2015 को स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द कर दिया। न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले को गुण-दोष के आधार पर बंद कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह और पाँच अन्य अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और धारा 409 (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के अंतर्गत ट्रायल के लिए तलब किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए माना कि स्पेशल जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करने और अपराधों का संज्ञान लेने का कोई पर्याप्त आधार नहीं था।

सीबीआई ने अपनी जाँच पूरी करने के बाद दो अलग-अलग क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थीं, जिन्हें स्पेशल जज ने खारिज कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने इसी निर्णय को पलट दिया और क्लोजर रिपोर्ट को विधिसम्मत ठहराया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद वर्ष 2005 में तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है, जो यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुआ था। 11 मार्च 2015 को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह सहित छह लोगों को समन जारी किया था। इसके बाद 1 अप्रैल 2015 को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं इस कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। यह मामला यूपीए शासनकाल के सर्वाधिक चर्चित आपराधिक विवादों में गिना जाता रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय का तर्क

पीठ ने स्पष्ट किया कि सीबीआई ने विस्तृत जाँच के उपरांत क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी और स्पेशल जज के पास उसे नकारने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं था। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त साक्ष्य का अभाव था। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया।

आगे क्या

इस निर्णय के साथ डॉ. मनमोहन सिंह — जिनका दिसंबर 2024 में निधन हो चुका है — के विरुद्ध तालाबीरा-2 मामले में सभी कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है। यह फैसला उन पाँच अन्य अभियुक्तों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है जिन्हें 2015 में समन जारी किया गया था। कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े अन्य मामलों पर इस निर्णय के संभावित प्रभाव पर कानूनी विशेषज्ञों की नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह मामला वर्षों तक राजनीतिक बहस का केंद्र रहा। अब जब न्यायालय ने स्वयं माना कि संज्ञान लेने का आधार नहीं था, तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जाँच एजेंसियों की क्लोजर रिपोर्ट को निचली अदालतें किस आधार पर नकारती हैं। भविष्य में ऐसे मामलों में यह निर्णय एक महत्त्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक मामले में दोषमुक्त क्यों किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि स्पेशल सीबीआई कोर्ट के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और डॉ. मनमोहन सिंह के विरुद्ध अपराधों का संज्ञान लेने का कोई पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था। इसलिए न्यायालय ने 2015 का समन रद्द कर मामला बंद कर दिया।
तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन मामला क्या था?
यह मामला वर्ष 2005 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। 2015 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने डॉ. मनमोहन सिंह और पाँच अन्य को आईपीसी की धारा 120-बी और 409 के तहत समन जारी किया था, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है।
2015 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
11 मार्च 2015 को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह सहित छह लोगों को आपराधिक षड्यंत्र और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट के आरोपों में ट्रायल के लिए तलब किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अप्रैल 2015 को ही इस कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
इस फैसले का अन्य अभियुक्तों पर क्या असर होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. मनमोहन सिंह के साथ-साथ पाँच अन्य अभियुक्तों को जारी समन भी रद्द किया है और मामले को गुण-दोष के आधार पर बंद किया है। इससे इस विशेष मामले में सभी छह अभियुक्तों के विरुद्ध कार्यवाही समाप्त हो गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर क्या कहा?
पीठ ने स्पष्ट किया कि सीबीआई ने जाँच पूरी करने के बाद दो अलग-अलग क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थीं और ये रिपोर्ट विधिसम्मत थीं। स्पेशल जज के पास इन्हें खारिज करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं था, इसलिए न्यायालय ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर मामला बंद किया।
राष्ट्र प्रेस
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