कोयला ब्लॉक आवंटन: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व PM मनमोहन सिंह को दोषमुक्त किया, 2015 का समन रद्द
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन मामले में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को औपचारिक रूप से दोषमुक्त कर दिया और 11 मार्च 2015 को स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द कर दिया। न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले को गुण-दोष के आधार पर बंद कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह और पाँच अन्य अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और धारा 409 (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के अंतर्गत ट्रायल के लिए तलब किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए माना कि स्पेशल जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करने और अपराधों का संज्ञान लेने का कोई पर्याप्त आधार नहीं था।
सीबीआई ने अपनी जाँच पूरी करने के बाद दो अलग-अलग क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थीं, जिन्हें स्पेशल जज ने खारिज कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने इसी निर्णय को पलट दिया और क्लोजर रिपोर्ट को विधिसम्मत ठहराया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वर्ष 2005 में तालाबीरा-2 कोल ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है, जो यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुआ था। 11 मार्च 2015 को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह सहित छह लोगों को समन जारी किया था। इसके बाद 1 अप्रैल 2015 को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं इस कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। यह मामला यूपीए शासनकाल के सर्वाधिक चर्चित आपराधिक विवादों में गिना जाता रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय का तर्क
पीठ ने स्पष्ट किया कि सीबीआई ने विस्तृत जाँच के उपरांत क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी और स्पेशल जज के पास उसे नकारने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं था। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त साक्ष्य का अभाव था। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया।
आगे क्या
इस निर्णय के साथ डॉ. मनमोहन सिंह — जिनका दिसंबर 2024 में निधन हो चुका है — के विरुद्ध तालाबीरा-2 मामले में सभी कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई है। यह फैसला उन पाँच अन्य अभियुक्तों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है जिन्हें 2015 में समन जारी किया गया था। कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े अन्य मामलों पर इस निर्णय के संभावित प्रभाव पर कानूनी विशेषज्ञों की नज़र रहेगी।