मध्य प्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान को वैश्विक मान्यता, 6 देशों के राजनयिकों ने सराहा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान अब केवल एक राज्य सरकार की पहल नहीं रहा — यह एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है जिसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा शुरू किए गए इस अभियान की प्रशंसा 7 जून 2026 को भोपाल के भारत भवन में संपन्न हुए सात दिवसीय 'सदानीरा समागम' में साइप्रस, फिजी, मैक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा इक्वाडोर के राजनयिकों ने की।
सदानीरा समागम: वैश्विक संवाद का मंच
भारत भवन, भोपाल में आयोजित इस सात दिवसीय कार्यक्रम में जल संरक्षण को भारत की सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। विभिन्न देशों के राजनयिकों ने मध्य प्रदेश मॉडल को एक वैश्विक जल संकट के व्यावहारिक समाधान के रूप में रेखांकित किया। कई दूतों ने इस पहल को अपने-अपने देशों में दोहराने में रुचि व्यक्त की।
राजनयिकों की प्रतिक्रिया
साइप्रस के उच्चायुक्त एवागोरस व्रियोनाइड्स ने जल संकट को एक गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए जन जागरूकता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि साइप्रस का एक सांस्कृतिक दल इसी महीने के अंत में भोपाल में प्रदर्शन करेगा।
फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर चिंता बताते हुए भारत और फिजी के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया और कहा कि दोनों देश पर्यावरण संरक्षण में समान प्राथमिकताएँ साझा करते हैं। मैक्सिकन दूतावास की वैनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि प्राचीन सभ्यताओं के उत्तराधिकारी भारत और मैक्सिको को मिलकर समाधान खोजने चाहिए।
नेपाल के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की बात की और कहा कि इस यात्रा से उन्हें अपनेपन का एहसास हुआ। त्रिनिदाद और टोबैगो के चंद्रदाथ सिंह ने सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के ज़रिए पर्यावरण चिंताओं को उठाने की पहल की सराहना की। इक्वाडोर के मिशन के उप प्रमुख जॉर्ज विनीसियो अनरांगो ने घोषणा की कि उनका देश शीघ्र ही मध्य प्रदेश के प्रयासों से प्रेरित होकर 'सदानीरा संगम' का आयोजन करेगा।
अभियान की प्रगति: आँकड़े क्या कहते हैं
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक 3,66,000 के लक्ष्य के मुकाबले 2,12,000 से अधिक जल संरचनाओं पर काम पूरा किया जा चुका है। नदियों, तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों के कायाकल्प पर केंद्रित यह अभियान सरकारी योजना से जन भागीदारी वाले आंदोलन में रूपांतरित हो चुका है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब देश के कई हिस्सों में जल संकट गहराता जा रहा है।
आगे की राह
इक्वाडोर द्वारा 'सदानीरा संगम' आयोजित करने की घोषणा और साइप्रस के सांस्कृतिक दल की आगामी यात्रा यह संकेत देती है कि मध्य प्रदेश का यह मॉडल अब द्विपक्षीय सहयोग का आधार बन सकता है। सांस्कृतिक विरासत को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने की यह अनूठी पद्धति वैश्विक जल प्रबंधन की चर्चा में एक नया अध्याय जोड़ रही है।