नागालैंड में 7:1 छात्र-शिक्षक अनुपात पर चिंता, CM रियो ने स्कूल पुनर्गठन और शिक्षक पुनर्तैनाती का संकेत दिया
सारांश
मुख्य बातें
नागालैंड सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात की गंभीर असमानता को स्वीकार किया है और वास्तविक नामांकन के आधार पर स्कूलों के पुनर्गठन तथा शिक्षकों की पुनर्तैनाती की दिशा में कदम उठाने का संकेत दिया है। नागालैंड विधानसभा में 2 सितंबर को दिए गए जवाब में मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और शिक्षा मंत्री तेमजेन इमना अलोंग ने माना कि राज्य का छात्र-शिक्षक अनुपात 7:1 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24:1 है — यह असंतुलन शिक्षा संसाधनों के अकुशल वितरण की ओर इशारा करता है।
विधानसभा में उठा मुद्दा
यह मुद्दा विधायक ए. न्याम्न्येई कोन्याक द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में सामने आया, जिन्होंने उच्च माध्यमिक, हाई, मिडिल और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की रिक्तियों की जिला-वार जानकारी माँगी थी। मुख्यमंत्री रियो ने स्वीकार किया कि राज्य में असामान्य रूप से कम छात्र-शिक्षक अनुपात का एक कारण 2001 की जनगणना के आँकड़ों पर आधारित जनसंख्या अनुमान हैं, जिनकी सटीकता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 'शिक्षा का अधिकार' (आरटीई) ढाँचा लागू होने के बाद इन्हीं जनसंख्या आँकड़ों के आधार पर अलग-अलग इलाकों में स्कूल बनाए और अपग्रेड किए गए, जिससे बाद में स्कूलों का अत्यधिक विस्तार हो गया। गौरतलब है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक नामांकन की बजाय अनुमानित माँग को आधार बनाया गया था।
मुख्य समस्या: शिक्षक हैं, छात्र नहीं
मुख्यमंत्री रियो ने बताया कि कुछ स्कूलों में शिक्षक तैनात हैं, लेकिन वहाँ छात्र बहुत कम हैं या एक भी नहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन स्कूलों में 10 से कम छात्र हैं और आसपास कोई अन्य स्कूल उपलब्ध है, उन्हें मिलाने पर विचार किया जा सकता है। विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) क्षेत्र और मोन जिले के स्कूलों का छात्र उपलब्धता, पहुँच और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर पुनर्मूल्यांकन किए जाने की आवश्यकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में स्कूलों की कुल संख्या 1,939 से घटकर 1,881 हो चुकी है — एक तथ्य जिसे विधायक कोन्याक ने विशेष रूप से रेखांकित किया।
शिक्षक भर्ती में देरी पर चिंता
विधायक कोन्याक ने मिडिल इंग्लिश (ME) और लोअर प्राइमरी (LP) स्कूलों में रिक्त पदों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति के कारण प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है, लेकिन उनकी जगह नई भर्ती उतनी तेज़ी से नहीं हुई। जहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षकों की भर्ती नागालैंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है, वहीं ME और LP शिक्षकों के लिए भर्ती साक्षात्कार की तिथि अभी स्पष्ट नहीं है।
शिक्षा मंत्री का जवाब
शिक्षा मंत्री तेमजेन इमना अलोंग ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की तैनाती किसी जिला-वार कोटे के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्कूलों की आवश्यकता के अनुसार की जाती है। उन्होंने बताया कि विभाग सरकारी प्राथमिक स्कूल (GPS), सरकारी मिडिल स्कूल (GMS), सरकारी हाई स्कूल (GHS) और सरकारी उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की ज़रूरतों का अलग-अलग आकलन करता है।
अलोंग ने यह भी कहा कि जहाँ स्कूलों में छात्र नहीं हैं, उन्हें पास के स्कूलों के साथ मिलाकर शिक्षकों को उन संस्थानों में पुनर्तैनात किया जा सकता है जहाँ वास्तव में छात्र हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम किसी विशेष जिले, जनजाति या समुदाय को लक्षित करके नहीं, बल्कि वास्तविक शैक्षिक आवश्यकताओं के आधार पर उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का बेंचमार्क भी राष्ट्रीय अनुपात 24:1 के आसपास है।
दूरदराज़ इलाकों पर असर की चेतावनी
विधायक कोन्याक ने चेतावनी दी कि स्कूलों के अंधाधुंध विलय से शिक्षा के लिहाज़ से पिछड़े इलाकों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने माँग की कि दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्कूलों के पुनर्गठन के लिए एक विशेष और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिसमें भौगोलिक पहुँच, आर्थिक स्थिति और संस्थागत उपलब्धता जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाए। आगे, राज्य सरकार की समीक्षा प्रक्रिया और ME-LP शिक्षकों की भर्ती की समयसीमा पर निर्णय नागालैंड की शिक्षा प्रणाली की दिशा तय करेंगे।