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निर्मोही अखाड़े की सुप्रीम कोर्ट में याचिका: राम जन्मभूमि ट्रस्ट में भागीदारी, फोरेंसिक ऑडिट समेत 8 मांगें

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निर्मोही अखाड़े की सुप्रीम कोर्ट में याचिका: राम जन्मभूमि ट्रस्ट में भागीदारी, फोरेंसिक ऑडिट समेत 8 मांगें

सारांश

निर्मोही अखाड़े ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर राम जन्मभूमि ट्रस्ट में 'उचित प्रतिनिधित्व' के अर्थ से लेकर फोरेंसिक ऑडिट तक 8 मांगें रखी हैं। साथ ही महंत दिनेंद्र दास को पद से हटाकर 102 वर्षीय राजा रामचंद्राचार्य जी को नया मुख्य महंत बनाया गया है।

मुख्य बातें

निर्मोही अखाड़े ने 20 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में एम.
सिद्दीक बनाम महंत सुरेश दास मामले में याचिका दाखिल की।
याचिका में 8 मांगें हैं — जिनमें ट्रस्ट में 'उचित प्रतिनिधित्व' की व्याख्या, फोरेंसिक ऑडिट और निगरानी समिति गठन प्रमुख हैं।
5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को जब्त मूर्तियों को पूजा के लिए वापस करने या पूजा की अनुमति देने की माँग।
5 जुलाई 2026 को अखाड़े ने महंत दिनेंद्र दास को मुख्य महंत पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया।
गुजरात के डाकोर निवासी 102 वर्षीय राजा रामचंद्राचार्य जी को नया मुख्य महंत नियुक्त किया गया।

निर्मोही अखाड़े ने 20 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अपनी भागीदारी के दायरे को स्पष्ट करने, ट्रस्ट के कामकाज का फोरेंसिक ऑडिट कराने और दशकों पहले जब्त की गई मूर्तियों की वापसी समेत कुल 8 मांगें रखी हैं। यह याचिका ऐतिहासिक एम. सिद्दीक बनाम महंत सुरेश दास मामले में दाखिल की गई है, जिसमें 9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुनाया था।

मुख्य मांगें क्या हैं

अखाड़े के वकील तरुणजीत वर्मा के अनुसार, याचिका में सबसे प्रमुख मांग 9 नवंबर 2019 के फैसले में दिए गए 'उचित प्रतिनिधित्व' के निर्देश को स्पष्ट करने की है। उन्होंने बताया कि 15 सदस्यीय ट्रस्ट में अखाड़े के प्रतिनिधि के रूप में महंत दिनेंद्र दास शामिल हैं, लेकिन अखाड़ा यह जानना चाहता है कि 'उचित प्रतिनिधित्व' का वास्तविक अर्थ और विधिक दायरा क्या है।

याचिका में ट्रस्ट के वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों की फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी माँग है। इसके अतिरिक्त अखाड़े ने माँग की है कि 5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को विवादित परिसर के भीतरी और बाहरी आँगन से जब्त की गई मूर्तियाँ पूजा के लिए वापस की जाएँ। यदि यह संभव न हो, तो अखाड़े को स्वतंत्र रूप से पूजा करने की अनुमति दी जाए।

निगरानी समिति की माँग

निर्मोही अखाड़े ने ट्रस्ट के कामकाज पर नज़र रखने के लिए उच्च न्यायालय के अधीन एक निगरानी समिति गठित करने की माँग भी रखी है। अखाड़े का तर्क है कि ऐसी स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था से ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और किसी भी अनियमितता को समय रहते सुधारा जा सकेगा।

प्रतिनिधि नियुक्ति की प्रक्रिया

वकील तरुणजीत वर्मा ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट में अखाड़े के प्रतिनिधि को लेकर अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, यदि नामित प्रतिनिधि की मृत्यु हो, इस्तीफा हो या किसी अन्य कारण से पद रिक्त हो, तो अखाड़ा तीन नामों का पैनल सुझाएगा, जिनमें से एक को ट्रस्ट का कोरम नियुक्त कर सकता है। फिलहाल यह प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई है।

महंत दिनेंद्र दास हटाए गए, नए मुख्य महंत नियुक्त

इस बीच निर्मोही अखाड़े ने महंत दिनेंद्र दास को मुख्य महंत पद से हटाने का निर्णय लिया है। 5 जुलाई 2026 को अखाड़े ने यह प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कथित तौर पर मनमाने तरीके से कार्य करने और अन्य सदस्यों की बात न सुनने जैसे आरोप लगाए गए। अब महंत दिनेंद्र दास केवल पंच की भूमिका में रहेंगे। उनके स्थान पर गुजरात के डाकोर निवासी 102 वर्षीय राजा रामचंद्राचार्य जी को निर्मोही अखाड़े का नया मुख्य महंत नियुक्त किया गया है।

यह याचिका ऐसे समय में दाखिल हुई है जब अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और ट्रस्ट के प्रशासन को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच आंतरिक मतभेद सार्वजनिक होते जा रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है, यह आगे के घटनाक्रम की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि निर्णायक बनाना चाहता है। फोरेंसिक ऑडिट की माँग ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर अविश्वास का संकेत देती है, जो एक ऐसे संस्थान के लिए असहज प्रश्न खड़े करती है जिसे राष्ट्रीय धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। महंत दिनेंद्र दास को हटाना और 102 वर्षीय नए महंत की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि अखाड़े के भीतर नेतृत्व का संघर्ष भी समानांतर चल रहा है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की?
निर्मोही अखाड़े ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अपनी भागीदारी के दायरे को स्पष्ट करने और ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की माँग की है। यह याचिका 9 नवंबर 2019 के अयोध्या फैसले में दिए गए 'उचित प्रतिनिधित्व' के निर्देश की व्याख्या से जुड़ी है।
निर्मोही अखाड़े की 8 मांगों में क्या-क्या शामिल है?
याचिका में 'उचित प्रतिनिधित्व' की व्याख्या, ट्रस्ट का फोरेंसिक ऑडिट, 1950 और 1982 में जब्त मूर्तियों की वापसी या पूजा की अनुमति, और उच्च न्यायालय के अधीन निगरानी समिति गठन प्रमुख मांगें हैं। कुल 8 मांगें एम. सिद्दीक बनाम महंत सुरेश दास मामले में रखी गई हैं।
महंत दिनेंद्र दास को मुख्य महंत पद से क्यों हटाया गया?
5 जुलाई 2026 को निर्मोही अखाड़े ने प्रस्ताव पारित कर महंत दिनेंद्र दास को मुख्य महंत पद से हटाया, जिसमें कथित तौर पर मनमाने तरीके से काम करने और अन्य सदस्यों की बात न सुनने जैसे आरोप लगाए गए। अब वे केवल पंच की भूमिका में रहेंगे।
निर्मोही अखाड़े के नए मुख्य महंत कौन हैं?
गुजरात के डाकोर निवासी 102 वर्षीय राजा रामचंद्राचार्य जी को निर्मोही अखाड़े का नया मुख्य महंत नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति महंत दिनेंद्र दास को पद से हटाए जाने के बाद की गई।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व कैसे होता है?
सर्वोच्च न्यायालय के 9 नवंबर 2019 के फैसले के अनुसार निर्मोही अखाड़े को 15 सदस्यीय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में 'उचित प्रतिनिधित्व' दिया गया है। फिलहाल महंत दिनेंद्र दास अखाड़े के प्रतिनिधि के रूप में ट्रस्टी हैं, और पद रिक्त होने पर अखाड़ा तीन नामों का पैनल सुझाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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