11 जुलाई 2026
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ऑपरेशन क्लीन एयर: सीएक्यूएम ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा की 46.87 किमी सड़कों का निरीक्षण किया, 8 सड़कों पर मिलीं खामियाँ

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ऑपरेशन क्लीन एयर: सीएक्यूएम ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा की 46.87 किमी सड़कों का निरीक्षण किया, 8 सड़कों पर मिलीं खामियाँ

सारांश

सीएक्यूएम ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा की 17 सड़कों पर 4 फ्लाइंग स्क्वॉड उतारीं। 9 सड़कें फ्रेमवर्क के अनुरूप मिलीं, लेकिन 8 पर पेविंग अधूरी और फुटपाथ गायब पाए गए। आयोग ने अधूरे कार्यों में तेजी और नियमित रखरखाव के निर्देश दिए हैं।

मुख्य बातें

सीएक्यूएम ने 11 जुलाई 2026 को 'ऑपरेशन क्लीन एयर' के तहत नोएडा-ग्रेटर नोएडा में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया।
4 फ्लाइंग स्क्वॉड ने 46.87 किलोमीटर लंबाई की 17 सड़कों का निरीक्षण किया — 11 जीएनआईडीए और 6 नोएडा अथॉरिटी के अंतर्गत।
9 सड़कों पर पूर्ण पेविंग पाई गई; 8 सड़कों पर पेविंग अधूरी मिली।
8 सड़कों पर बिना पेविंग वाले या गायब फुटपाथ और 5 सड़कों पर कच्चे सेंट्रल वर्ज चिह्नित किए गए।
संबंधित अधिकारियों को शेष री-डेवलपमेंट कार्यों में तेजी लाने और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 11 जुलाई 2026 को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 'ऑपरेशन क्लीन एयर' के तहत एक विशेष सड़क निरीक्षण अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में सड़क की धूल से होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। आयोग द्वारा जारी स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क के तहत किए गए सड़क पुनर्निर्माण कार्यों की स्थिति का आकलन इस अभियान का केंद्रीय लक्ष्य था।

निरीक्षण का दायरा और तैनाती

इस अभियान के लिए आयोग ने 4 फ्लाइंग स्क्वॉड गठित कीं, जिन्हें ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएनआईडीए) और नोएडा अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सड़कों पर तैनात किया गया। निरीक्षण में कुल 46.87 किलोमीटर लंबाई की 17 सड़कें शामिल रहीं — इनमें 11 सड़कें जीएनआईडीए और 6 सड़कें नोएडा अथॉरिटी के अंतर्गत थीं। इन सड़कों में 10 से 15 मीटर और 15 मीटर से अधिक चौड़ाई वाली विभिन्न 'राइट ऑफ वे' (आरओडब्ल्यू) श्रेणियाँ शामिल थीं।

मुख्य निष्कर्ष: कहाँ हुई प्रगति, कहाँ रहीं कमियाँ

निरीक्षण में पाया गया कि 9 सड़कों — जिनमें 5 जीएनआईडीए और 4 नोएडा अथॉरिटी के अंतर्गत हैं — पर पूर्ण पेविंग (सड़क की सतह का पक्काकरण) की जा चुकी है, जो स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क के अनुपालन को दर्शाती है। हालाँकि, 8 सड़कों (6 जीएनआईडीए और 2 नोएडा अथॉरिटी) पर पूरी पेविंग नहीं पाई गई।

इसके अतिरिक्त, 8 सड़कों के किनारे बिना पेविंग वाले या गायब फुटपाथ चिह्नित किए गए, जबकि 5 सड़कों पर सेंट्रल वर्ज (सड़क के मध्य का हिस्सा) अभी भी कच्चे पाए गए — ये दोनों निर्धारित फ्रेमवर्क के अनुसार सुधार की माँग करते हैं।

सड़क की धूल और वायु प्रदूषण का संबंध

सीएक्यूएम के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में सड़क की धूल से होने वाले उत्सर्जन की अहम भूमिका है। पूर्ण पेविंग, पक्के फुटपाथ और विकसित सेंट्रल वर्ज वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल को कम करने के साथ-साथ मशीनीकृत सड़क सफाई को भी अधिक प्रभावी बनाते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच जाता है, और सड़क की धूल इसमें एक स्थायी योगदानकर्ता मानी जाती है।

संबंधित अधिकारियों को निर्देश

आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शेष री-डेवलपमेंट कार्यों में तेजी लाएं और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करें। सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि दिल्ली-एनसीआर में सड़कों की देखरेख करने वाली सभी एजेंसियों द्वारा स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क का पालन दीर्घकालिक धूल नियंत्रण के लिए अनिवार्य है।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

आयोग ने पुष्टि की है कि 'ऑपरेशन क्लीन एयर' के तहत दिल्ली-एनसीआर में इस प्रकार के निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों के जमीनी कार्यान्वयन की निगरानी हो सके और जहाँ आवश्यक हो, समय पर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता दे रही है और सीएक्यूएम की भूमिका लगातार विस्तृत होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि खामियाँ उजागर होने के बाद सुधार की समयसीमा और जवाबदेही तय होती है या नहीं। दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी AQI संकट के बाद एजेंसियाँ सक्रिय दिखती हैं, लेकिन गर्मियों में रखरखाव की निगरानी कमज़ोर पड़ जाती है। 8 सड़कों पर अधूरी पेविंग यह भी दर्शाती है कि जीएनआईडीए जैसी संस्थाओं में फ्रेमवर्क अनुपालन की संस्कृति अभी पूरी तरह नहीं बनी है। बिना दंडात्मक प्रावधान और सार्वजनिक डैशबोर्ड के, ये निरीक्षण रिपोर्टें फ़ाइलों में दबकर रह जाने का जोखिम उठाती हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन क्लीन एयर क्या है और इसे किसने शुरू किया?
'ऑपरेशन क्लीन एयर' वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जमीनी निगरानी के लिए चलाया जा रहा निरीक्षण अभियान है। इसके तहत सड़क पेविंग, फुटपाथ और सेंट्रल वर्ज जैसे बुनियादी ढाँचे की स्थिति का आकलन किया जाता है।
11 जुलाई के निरीक्षण में कितनी सड़कें शामिल थीं और क्या पाया गया?
निरीक्षण में नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कुल 17 सड़कें (46.87 किलोमीटर) शामिल थीं। इनमें से 9 सड़कों पर पूर्ण पेविंग मिली, जबकि 8 सड़कों पर पेविंग अधूरी पाई गई और 8 सड़कों पर फुटपाथ भी अनुपस्थित या बिना पेविंग के थे।
सड़क की धूल और वायु प्रदूषण में क्या संबंध है?
सड़क की धूल दिल्ली-एनसीआर में पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है। वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल PM2.5 और PM10 स्तर बढ़ाती है, और पक्की सड़कें व फुटपाथ इसे प्रभावी ढंग से कम करते हैं।
जीएनआईडीए और नोएडा अथॉरिटी को क्या निर्देश दिए गए हैं?
सीएक्यूएम ने दोनों अधिकारियों को शेष री-डेवलपमेंट कार्यों में तेजी लाने और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क का पूर्ण अनुपालन दीर्घकालिक धूल नियंत्रण के लिए अनिवार्य है।
क्या भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण होते रहेंगे?
हाँ, सीएक्यूएम ने पुष्टि की है कि 'ऑपरेशन क्लीन एयर' के तहत दिल्ली-एनसीआर में इस प्रकार के निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे। इनका उद्देश्य वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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