पाकिस्तान का अरुणाचल दुष्प्रचार बेनकाब: बेंगलुरु का 2026 का अभ्यास वीडियो चीनी तलाशी बताकर वायरल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 25 अक्टूबर 2026 को खुलासा किया कि पाकिस्तान स्थित सोशल मीडिया हैंडल्स ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय जवानों की तलाशी लिए जाने का झूठा दावा फैलाने के लिए बेंगलुरु में मई 2026 में हुए आतंकवाद विरोधी सैन्य अभ्यास का एक पुराना वीडियो वायरल किया है। सेना ने इस दावे को पूरी तरह भ्रामक और निराधार बताया है।
क्या था झूठा दावा
पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक वीडियो प्रसारित करते हुए दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिक भारतीय जवानों की जाँच कर रहे हैं और भारतीय सेना को राज्य में आवाजाही के लिए चीनी सेना से अनुमति लेनी पड़ती है। यह कथित तौर पर भारत की संप्रभुता को कमज़ोर दिखाने की सुनियोजित कोशिश थी।
सेना की फैक्ट चेक टीम का खुलासा
भारतीय सेना की फैक्ट चेक टीम ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो अरुणाचल प्रदेश का नहीं, बल्कि कर्नाटक के बेंगलुरु में मई 2026 में आयोजित आतंकवाद विरोधी सैन्य अभ्यास का है। सेना के अनुसार, वीडियो की पहचान, स्थान और संदर्भ बदलकर सीमा सुरक्षा से जुड़ी भ्रामक कहानी गढ़ी गई है।
गौरतलब है कि वास्तविक सैन्य अभ्यास के दृश्यों को चीनी सैनिकों की कार्रवाई बताकर प्रसारित करना और उसे अरुणाचल प्रदेश का बताना — यह दो-स्तरीय झूठ का तरीका है जिससे सीमा पर टकराव का भ्रम पैदा किया जाता है।
पाकिस्तानी दुष्प्रचार का पैटर्न
यह ऐसे समय में आया है जब हाल के महीनों में पाकिस्तान स्थित सोशल मीडिया हैंडल्स भारतीय सेना को लेकर लगातार झूठी सूचनाएँ फैला रहे हैं। इससे पहले ऐसे ही अकाउंट्स ने सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को लेकर भ्रामक दावे किए थे, जिनमें कथित तौर पर कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बयान देने के कारण जनरल सेठ को पद से हटाने की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय सेना ने उस दावे को भी दुष्प्रचार बताते हुए खारिज किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत-चीन सीमा मामलों पर जनमत को प्रभावित करने और दोनों देशों के बीच अविश्वास बढ़ाने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
सेना की अपील और सावधानी
भारतीय सेना ने नागरिकों से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत, स्थान और संदर्भ की पुष्टि करें। सेना ने यह भी कहा कि सैन्य अभ्यास और वास्तविक सीमा टकराव के बीच अंतर समझना ज़रूरी है, और अपुष्ट दावों को आगे प्रसारित करने से बचा जाए।
आगे की स्थिति
भारतीय सेना द्वारा इस दुष्प्रचार का समय पर खंडन डिजिटल सूचना युद्ध में सतर्कता की ज़रूरत को रेखांकित करता है। आने वाले समय में ऐसे और मामलों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, और सेना की फैक्ट चेक टीम की सक्रियता इस मोर्चे पर निर्णायक भूमिका निभाती रहेगी।