2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

श्रीनगर में एनसी-भाजपा के आमने-सामने मार्च, पुलिस ने दोनों दलों को रोका; राज्य दर्जे की माँग पर तनाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
श्रीनगर में एनसी-भाजपा के आमने-सामने मार्च, पुलिस ने दोनों दलों को रोका; राज्य दर्जे की माँग पर तनाव

सारांश

श्रीनगर में सत्तारूढ़ एनसी और विपक्षी भाजपा एक ही दिन सड़क पर उतरे — एक-दूसरे के खिलाफ। पुलिस ने दोनों को रोका, झड़पें हुईं। लेकिन असली सवाल यह है: राज्य का दर्जा और आरक्षण युक्तिकरण जैसे वादे दो साल बाद भी केंद्र की फाइलों में क्यों अटके हैं?

मुख्य बातें

2 सितंबर को श्रीनगर में एनसी और भाजपा दोनों के विरोध मार्च जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बाधित किए।
एनसी नेताओं ने जवाहर नगर स्थित भाजपा कार्यालय की ओर मार्च किया; राजबाग थाने के पास रोका गया, कई कार्यकर्ता हिरासत में।
भाजपा ने लाल चौक से सिविल सचिवालय घेराव का प्रयास किया; जहांगीर चौक पर रोका गया।
मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने कहा — राज्य दर्जा, आरक्षण युक्तिकरण और महाधिवक्ता नियुक्ति जैसे मुद्दे दो साल से लंबित हैं।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर चुनाव घोषणापत्र के सभी वादे तोड़ने का आरोप लगाया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार, 2 सितंबर को श्रीनगर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अलग-अलग विरोध मार्च को बाधित कर दिया। दोनों दलों के प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों से झड़प हुई और कई एनसी कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया। यह घटना ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग लंबे समय से केंद्र सरकार के पास लंबित है।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री सकीना इटू, विधायक तनवीर सादिक, सलमान सागर, अहसान परदेसी, शमीमा फिरदौस और हिलाल पर्रे सहित एनसी के वरिष्ठ नेताओं ने जवाहर नगर स्थित भाजपा कार्यालय की ओर मार्च किया। उनकी प्रमुख माँगें थीं — अनुच्छेद 370 की बहाली, राज्य का दर्जा और अन्य संवैधानिक गारंटियाँ।

पुलिस ने राजबाग थाने के पास बैरिकेड्स लगाकर एनसी प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। झड़प के बाद कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, हालाँकि हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी।

दूसरी ओर, भाजपा प्रदर्शनकारी विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा और जम्मू-कश्मीर भाजपा के महासचिव अशोक कौल के नेतृत्व में लाल चौक सिटी सेंटर पर एकत्र हुए और बटमालू स्थित सिविल सचिवालय के घेराव के लिए मार्च शुरू किया। पुलिस ने जहांगीर चौक पर उन्हें रोका; प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।

एनसी की प्रतिक्रिया और माँगें

मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने पत्रकारों से कहा कि सरकार विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर है क्योंकि राज्य का दर्जा बहाल करने और आरक्षण को युक्तिसंगत बनाने जैसे अहम मुद्दे दो साल से अधिक समय से लंबित हैं। उन्होंने कहा, 'समझिए कि हम यह विरोध प्रदर्शन करने के लिए क्यों मजबूर हैं। दो साल से हम धैर्यपूर्वक बैठे हैं और इस उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं कि हमसे किए गए वादे पूरे होंगे।'

वानी ने आरक्षण युक्तिकरण पर स्पष्ट किया कि कैबिनेट ने इस मामले को मंजूरी देकर उपराज्यपाल को भेजा था, परंतु दिल्ली से कुछ सवाल आने के बाद इसे कैबिनेट को वापस भेज दिया गया — और यह मुद्दा अभी भी अनिर्णीत है। उन्होंने महाधिवक्ता की नियुक्ति में हो रही देरी पर भी चिंता जताई और कहा, 'स्थिति इस हद तक पहुँच गई है कि महाधिवक्ता की नियुक्ति भी अभी तक नहीं हुई है।'

भाजपा का रुख

विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा के विरोध मार्च में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली एनसी सरकार की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में जनता से किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं किया है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि लाल चौक और सचिवालय की ओर जाने वाले मार्गों पर भारी पुलिस और सुरक्षा बल तैनात रहे, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों को असुविधा हुई। यह ऐसे समय में हुआ जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के बाद पहली निर्वाचित सरकार राज्य के दर्जे की बहाली के लिए केंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

आगे की स्थिति

दोनों दलों के मार्च भले ही विफल हो गए, लेकिन राज्य का दर्जा, आरक्षण युक्तिकरण और महाधिवक्ता नियुक्ति जैसे मुद्दे अनसुलझे बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक केंद्र सरकार इन मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, श्रीनगर की सड़कों पर इस तरह के टकराव की पुनरावृत्ति हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दोनों को पुलिस ने रोका। एनसी का विरोध दरअसल उसी केंद्र सरकार के खिलाफ है जिसके समर्थन से वह सत्ता में आई — यह राजनीतिक विडंबना कम महत्वपूर्ण नहीं है। राज्य का दर्जा, जो विधानसभा चुनाव से पहले लगभग तय माना जा रहा था, दो साल बाद भी केंद्र की फाइलों में अटका है — और इसका जवाब न एनसी के पास है, न भाजपा के पास। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ 'विरोध प्रदर्शन' की खबर की तरह पेश कर रही है, जबकि असली कहानी यह है कि निर्वाचित सरकार अपने ही संवैधानिक अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में 2 सितंबर को एनसी और भाजपा का विरोध प्रदर्शन क्यों हुआ?
एनसी ने अनुच्छेद 370 की बहाली, राज्य का दर्जा और आरक्षण युक्तिकरण जैसी माँगों को लेकर भाजपा कार्यालय की ओर मार्च किया, जबकि भाजपा ने एनसी सरकार की कथित विफलताओं के विरोध में सिविल सचिवालय घेराव का प्रयास किया। दोनों मार्च पुलिस ने बाधित कर दिए।
पुलिस ने एनसी और भाजपा के मार्च कहाँ रोके?
एनसी प्रदर्शनकारियों को राजबाग थाने के पास बैरिकेड्स लगाकर रोका गया, जबकि भाजपा प्रदर्शनकारियों को जहांगीर चौक पर रोका गया। दोनों स्थानों पर पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती थी।
नासिर असलम वानी ने विरोध प्रदर्शन के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने कहा कि राज्य का दर्जा, आरक्षण युक्तिकरण और महाधिवक्ता नियुक्ति जैसे मुद्दे दो साल से अधिक समय से लंबित हैं और इन पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मामला कैबिनेट से उपराज्यपाल के पास जाने के बाद दिल्ली से सवाल आने पर वापस कैबिनेट को भेज दिया गया।
भाजपा ने एनसी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली एनसी सरकार ने चुनाव घोषणापत्र में जनता से किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि विरोध मार्च में बड़ी भागीदारी सरकार की विफलता का प्रमाण है।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाली का मुद्दा कहाँ तक पहुँचा है?
जम्मू-कश्मीर को 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था और तब से राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग लगातार उठती रही है। एनसी सरकार के सलाहकार के अनुसार, विधानसभा चुनाव के बाद भी इस मुद्दे पर केंद्र के स्तर पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई है और यह अभी भी लंबित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 5 घंटे पहले
  4. 17 घंटे पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 साल पहले