1 अगस्त 2026
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राजकोट नगर निगम ने 3 खाद्य इकाइयाँ सील कीं, 1,020 किलो बासी भोजन नष्ट; 75 प्रतिष्ठानों की जाँच

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राजकोट नगर निगम ने 3 खाद्य इकाइयाँ सील कीं, 1,020 किलो बासी भोजन नष्ट; 75 प्रतिष्ठानों की जाँच

सारांश

राजकोट नगर निगम के खाद्य सुरक्षा अभियान में 'पशु आहार' थैलों वाला आटा, बिना लेबल के मसाले और बिना तिथि के एसेंस मिले — तीन इकाइयाँ सील, 1,020 किलो भोजन नष्ट और ₹34,500 जुर्माना। 75 प्रतिष्ठानों की जाँच में सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरे उजागर हुए।

मुख्य बातें

राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने 1 अगस्त 2026 को खाद्य निगरानी अभियान में 3 इकाइयाँ सील कीं।
1,020 किलोग्राम बासी और अखाद्य भोजन नष्ट किया गया; 10 खाद्य नमूने प्रयोगशाला जाँच के लिए एकत्र।
केसर फूड प्रोडक्ट्स में 'पशु आहार' अंकित थैलों में आटा मिला; ₹5,000 जुर्माना।
शाह फूड प्रोसेसिंग में 5,972 किलो खाद्य उत्पाद और 2,000 लीटर बिना तिथि के एसेंस जब्त; ₹10,000 जुर्माना।
श्रीनाथजी ट्रेडिंग में 5,600 किलो बिना लेबल के मसाले मिले; ₹10,000 जुर्माना।
75 प्रतिष्ठानों की जाँच; 12 को नोटिस; कुल ₹34,500 प्रशासनिक शुल्क वसूला गया।

राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने 1 अगस्त 2026 को शहर में खाद्य मिलावट के विरुद्ध चलाए गए निगरानी अभियान में तीन खाद्य इकाइयों को सील कर दिया, 1,020 किलोग्राम से अधिक बासी और अखाद्य भोजन नष्ट किया तथा 10 खाद्य नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए एकत्र किए। आरएमसी स्वास्थ्य विभाग की खाद्य सुरक्षा टीमों ने इस अभियान में 75 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया, जिनमें रेस्तरां और खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय शामिल थे।

मुख्य घटनाक्रम

अभियान के दौरान 12 प्रतिष्ठानों को भंडारण, लाइसेंस और स्वच्छता उल्लंघनों के लिए नोटिस जारी किए गए। कुल ₹34,500 का प्रशासनिक शुल्क वसूला गया। इसके अतिरिक्त, यूनिवर्सिटी रोड, 150 फीट रिंग रोड और श्रद्धा पार्क क्षेत्र में भी कई खाद्य व्यवसायों का निरीक्षण किया गया। डेयरी आउटलेट्स से खुले मावा, मलाई और भैंस के दूध के नमूने भी एकत्र किए गए।

सील की गई इकाइयों का ब्यौरा

पहली सीलबंद इकाई केसर फूड प्रोडक्ट्स, वावड़ी गाँव के पास औद्योगिक क्षेत्र में स्थित थी। अधिकारियों ने पाया कि भोजन तैयार करने के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जा रहा आटा 'पशु आहार' अंकित थैलों में पैक था, जबकि तैयार फरसान को अस्वच्छ परिस्थितियों में सीधे फर्श पर रखा गया था। लगभग 1,020 किलोग्राम मीठा शक्करपारा और मैदा नष्ट किया गया। इकाई पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया गया और नमूने एकत्र किए गए।

दूसरी इकाई शाह फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, गोंडल रोड पर स्थित थी। यह इकाई आवश्यक तकनीकी कर्मियों के बिना और बैच-वार उत्पादन रिकॉर्ड रखे बिना संचालित हो रही थी। निरीक्षकों ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत अनिवार्य लेबल के बिना प्रीमिक्स एसेंस, चाय और कॉफी प्रीमिक्स, शीतल पेय सांद्रण, खाद्य योजक, परिरक्षक और सोडा मसाला बरामद किया। 5,972 किलोग्राम खाद्य उत्पाद और लगभग 2,000 लीटर विभिन्न स्वाद वाले एसेंस जब्त किए गए, जिन पर निर्माण या समाप्ति तिथि अंकित नहीं थी। इकाई पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया।

तीसरी सीलबंद इकाई श्रीनाथजी ट्रेडिंग थी, जहाँ बैच-वार उत्पादन रिकॉर्ड अनुपस्थित पाए गए और अनिवार्य लेबल के बिना पैक किए गए मिर्च, हल्दी और धनिया-जीरा पाउडर का लगभग 5,600 किलोग्राम संदिग्ध स्टॉक मिला। इस प्रतिष्ठान पर भी ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया और तीनों मसालों के नमूने जाँच के लिए भेजे गए।

आम जनता पर असर

यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में खाद्य मिलावट की घटनाओं को लेकर उपभोक्ता चिंताएँ बढ़ रही हैं। 'पशु आहार' थैलों में पैक आटे का मानव उपभोग के लिए उपयोग और बिना तिथि वाले खाद्य योजकों की बिक्री सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करती है। गौरतलब है कि एकत्र किए गए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

आगे क्या होगा

आरएमसी के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि खाद्य नमूनों की प्रयोगशाला जाँच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित इकाइयों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। निगम ने स्पष्ट किया है कि ऐसे निगरानी अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे और उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'पशु आहार' थैलों में आटा और बिना समाप्ति तिथि के हजारों लीटर एसेंस आखिर बाज़ार तक पहुँचे कैसे — यानी नियमित निरीक्षण तंत्र कहाँ विफल रहा। ₹5,000 से ₹10,000 तक के जुर्माने उन व्यवसायों के लिए नाममात्र हैं जो हजारों किलो उत्पाद बेच रहे थे; विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम दंड से दीर्घकालिक अनुपालन सुनिश्चित नहीं होता। नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट ही बताएगी कि यह कार्रवाई महज कागज़ी खानापूर्ति थी या वास्तविक जवाबदेही की शुरुआत।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजकोट नगर निगम ने किन खाद्य इकाइयों को सील किया?
आरएमसी ने 1 अगस्त 2026 को तीन इकाइयाँ सील कीं — वावड़ी गाँव के पास केसर फूड प्रोडक्ट्स, गोंडल रोड पर शाह फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड और श्रीनाथजी ट्रेडिंग। तीनों में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत गंभीर उल्लंघन पाए गए।
केसर फूड प्रोडक्ट्स में क्या गड़बड़ी मिली?
केसर फूड प्रोडक्ट्स में भोजन बनाने के लिए 'पशु आहार' अंकित थैलों में पैक आटा कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जा रहा था और तैयार फरसान को अस्वच्छ परिस्थितियों में सीधे फर्श पर रखा गया था। लगभग 1,020 किलोग्राम मीठा शक्करपारा और मैदा नष्ट किया गया तथा ₹5,000 जुर्माना लगाया गया।
इस अभियान में कुल कितना जुर्माना वसूला गया?
अभियान में कुल ₹34,500 का प्रशासनिक शुल्क वसूला गया। इसमें केसर फूड प्रोडक्ट्स पर ₹5,000, शाह फूड प्रोसेसिंग और श्रीनाथजी ट्रेडिंग पर ₹10,000-₹10,000 तथा अन्य व्यवसायों पर ₹500 से ₹1,000 तक के शुल्क शामिल हैं।
खाद्य नमूनों की जाँच के बाद क्या होगा?
एकत्र किए गए 10 खाद्य नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत संबंधित इकाइयों के विरुद्ध अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। आरएमसी ने संकेत दिया है कि उल्लंघन की पुष्टि होने पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
राजकोट में यह खाद्य सुरक्षा अभियान क्यों चलाया गया?
यह अभियान खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच और निगरानी के उद्देश्य से चलाया गया। आरएमसी स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 75 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया, जिसमें रेस्तरां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ और डेयरी आउटलेट शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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